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हरदोई में 820 बोरी नकली DAP! आपकी बोरी असली है? 7 जांचें जो बचाएंगी नुकसान

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 24 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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हरदोई में 820 बोरी नकली DAP! आपकी बोरी असली है? 7 जांचें जो बचाएंगी नुकसान

16 अक्टूबर की शाम। हरदोई के पिहानी में एक किसान सेवा केंद्र के बाहर ट्रेलर से बोरियां उतर रही थीं। तभी यूपी STF की टीम जिला कृषि अधिकारी के साथ वहां पहुंची। जांच में खुलासा हुआ कि 820 बोरियां नकली DAP खाद की थीं।

ट्रेलर हरियाणा नंबर का था। कागजों में माल हिसार से ओडिशा जा रहा था। ई-वे बिल में खाद की जगह “रॉ ग्रेन्यूल्स” लिखा था, जबकि खेप पिहानी में उतारी जा रही थी। मौके से फर्जी बिल-वाउचर भी बरामद हुए और खेप उतरवा रहे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

यह कोई अकेली घटना नहीं है। रबी सीजन में DAP और NPK की मांग बढ़ते ही मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। हापुड़ में प्रशासन ने 28 उर्वरक बिक्री और भंडारण प्रतिष्ठानों पर एक साथ औचक छापेमारी की। 15 नमूने गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए और 2 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस थमाया गया।

सवाल यह है कि दुकान पर खड़े होकर आप कैसे पहचानें कि बोरी असली है या नकली? कृषि विभाग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ये 7 जांचें हर खरीद पर कीजिए।

1. सील पहले देखिए, बोरी बाद में

नकली खाद का सबसे आम तरीका है असली जैसी दिखने वाली बोरी में घटिया माल भर देना। बोरी की सिलाई गौर से देखिए। फैक्ट्री की सिलाई एक जैसी, साफ और कसी होती है। दोबारा सिला हुआ मुंह, टेढ़ी-मेढ़ी सिलाई या गोंद से चिपकाई हुई सील दिखे तो वह बोरी मत उठाइए। कीटनाशक की बोतल या पैकेट की सील टूटी हो, ढक्कन ढीला हो या लेबल उखड़ा हुआ लगे, तो समझिए वह पैक पहले ही खुल चुका है।

2. लेबल पढ़िए, असली की पहचान यहीं छिपी है

कानूनन हर कीटनाशक के पैकेट पर पंजीयन संख्या, सक्रिय तत्व का नाम और उसका प्रतिशत, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तिथि लिखी होनी चाहिए। यह कीटनाशी अधिनियम, 1968 की अनिवार्य शर्त है। खाद की बोरी पर N-P-K की मात्रा साफ अक्षरों में छपी होती है। DAP का मतलब है 18-46-0, यानी 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फोरस। बोरी पर निर्माता कंपनी का नाम-पता, शुद्ध वजन और MRP भी छपा होना चाहिए। यह उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत जरूरी है। प्रिंट धुंधला हो, अक्षर टेढ़े-मेढ़े हों या जानकारी आधी-अधूरी छपी हो, तो उस बोरी से दूरी बना लीजिए।

3. एक्सपायरी डेट को कभी हल्के में मत लीजिए

एक्सपायरी निकल चुकी कीटनाशक दवा न सिर्फ बेअसर हो जाती है, बल्कि फसल को नुकसान भी पहुंचा सकती है। कृषि विभाग किसानों से बार-बार अपील करता है कि खरीद से पहले निर्माण और अवसान तिथि जरूर जांचें। दुकानदार चाहे जितना भरोसा दिलाए कि “माल अभी-अभी आया है”, तारीख अपनी आंखों से देखकर ही पैकेट उठाइए।

4. “बिना बिल सस्ता मिलेगा” सबसे बड़ा लाल झंडा है

नकली माल बेचने वाले अक्सर MRP से कम दाम का या बिना बिल पर छूट का लालच देते हैं। याद रखिए, पक्का बिल ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। बिल पर दुकान का नाम, तारीख, सामान का नाम और बैच नंबर जरूर लिखवाइए। फसल खराब हुई तो बिल के बिना आपकी शिकायत साबित ही नहीं होगी। कृषि विशेषज्ञों की सबसे पहली सलाह भी यही है कि कीटनाशक खरीदते समय बिल लेना न भूलें।

5. दुकान लाइसेंस वाली हो, पहचान वाली हो

कीटनाशक और उर्वरक बेचने के लिए कृषि विभाग का लाइसेंस जरूरी होता है। उसी दुकान से खरीदिए जो सालों से चल रही हो और जिसका लाइसेंस दुकान में साफ दिखाई दे। रास्ते में ट्रक से उतारकर सस्ता माल बेचने वालों से या बिल्कुल नई, बिना नाम-पते वाली दुकान से बचिए। हापुड़ की कार्रवाई में प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि ओवररेटिंग, कालाबाजारी या नकली खाद की आपूर्ति पर उर्वरक नियंत्रण आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

6. शक हो तो नमूना बचा कर रख लीजिए

कभी-कभी नकल इतनी सफाई से होती है कि दुकान पर पहचानना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हर बोरी या पैकेट से थोड़ा नमूना अलग पॉलीथिन में सील करके रख लीजिए और उस पर तारीख व दुकान का नाम लिख दीजिए। अगर दवा छिड़कने के बाद कीट न मरे या खाद डालने के बाद भी फसल पीली पड़े, तो यही नमूना प्रयोगशाला जांच में काम आएगा।

7. शिकायत का रास्ता पहले से पता रखिए

नकली या संदिग्ध खाद-कीटनाशक मिले तो चुप मत रहिए। अपने जिले के जिला कृषि अधिकारी को इसकी सूचना दीजिए। कृषि मंत्रालय का किसान कॉल सेंटर 1800-180-1551 भी है, जहां खेती से जुड़ी हर शिकायत और सलाह के लिए फोन किया जा सकता है। शिकायत मिलने पर विभाग नमूना लेकर प्रयोगशाला जांच कराता है। गड़बड़ी साबित हुई तो विक्रेता के खिलाफ लाइसेंस निलंबन से लेकर लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कार्रवाई हो सकती है।

रबी सीजन में खास सावधानी बरतिए

अभी रबी की बुवाई का समय चल रहा है। DAP और NPK की मांग ज्यादा है और यही समय मिलावटखोरों का पसंदीदा होता है। जल्दबाजी में दुकान पर भीड़ देखकर बोरी उठा लेने की गलती मत कीजिए। दो मिनट रुककर सील, लेबल और तारीख जांच लीजिए। सरकारी समिति या सहकारी भंडार से खरीदारी एक सुरक्षित विकल्प है, क्योंकि वहां माल सीधे अधिकृत स्रोत से आता है।

मुख्य बातें

  • सील, लेबल, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट, खरीद से पहले ये चार चीजें हर बार अपनी आंखों से जांचें।
  • पक्का बिल हर बार लें और उस पर बैच नंबर लिखवाएं, बिना बिल के शिकायत साबित नहीं होती।
  • संदेह हो तो जिला कृषि अधिकारी को बताएं या किसान कॉल सेंटर 1800-180-1551 पर फोन करें।

स्रोत: नवभारत टाइम्स (हरदोई में 820 बोरी नकली DAP बरामद), रॉयल बुलेटिन (हापुड़ में 28 दुकानों पर छापेमारी, 15 नमूने जांच को), एबीपी लाइव (नकली कीटनाशक पहचान), ईटीवी भारत (कृषि विभाग की किसान अपील)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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