रोहाना कलां मिल चली: 2 नवंबर को पहली ट्रॉली तौली, तौल में पारदर्शिता का वादा

2 नवंबर को मुजफ्फरनगर के रोहाना कलां में गन्ने की पहली ट्रॉली कांटे पर चढ़ी तो मिल का नया पेराई सत्र विधिवत शुरू हो गया। इंडियन पोटाश लिमिटेड की इस इकाई में पेराई सत्र 2026-27 का शुभारंभ प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने किया। फीता काटने और कांटा पूजन के बाद गन्ने से भरी पहली ट्रॉली की तौल कराई गई, और उसी के साथ इस सत्र की गिनती शुरू हो गई।
उद्घाटन के दिन मिल में क्या हुआ
शुभारंभ समारोह पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। पहला गन्ना लेकर पहुंचे किसानों का मिल प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों ने फूल-मालाएं पहनाकर, तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया। समारोह में गन्ना समिति के चेयरमैन अनिल त्यागी, मिल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान मौजूद रहे।
इस मौके पर गन्ना समिति के चेयरमैन ने किसानों को यह भरोसा दिया कि पेराई सत्र के दौरान गन्ना तौल में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और तौल केंद्रों पर किसानों को असुविधा नहीं होने दी जाएगी। मिल प्रबंधन की ओर से भी यह आश्वासन दिया गया कि मिल अपनी पूरी क्षमता के साथ चलेगी और किसानों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। कैबिनेट मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है, पेराई बिना रुकावट चले और गन्ना मूल्य का भुगतान तय समय सीमा के भीतर कराया जाए, इस बारे में मिलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
जिले की 8 मिलों का क्रम क्या था
मुजफ्फरनगर जिले में कुल 8 चीनी मिलें हैं। 20 अक्टूबर को जारी शेड्यूल में मंसूरपुर 24 से 26 अक्टूबर, बुढ़ाना 25 से 26 अक्टूबर, खैखेड़ी 27 से 28 अक्टूबर और टिकौला 28 से 29 अक्टूबर के बीच चलनी थीं। रोहाना कलां के लिए 29 से 30 अक्टूबर का विंडो था, मोरना और तितावी 30 से 31 अक्टूबर के बीच, और खतौली की त्रिवेणी मिल 1 से 2 नवंबर के लिए तय थी।
रोहाना कलां में औपचारिक शुभारंभ की खबर 2 नवंबर को आई। पर्ची और इंडेंट का अपना कैलेंडर होता है, और किसान को अपनी बारी उसी के हिसाब से देखनी चाहिए।
रोहाना तक का रास्ता अभी भी चिंता का विषय है
पेराई शुरू होने से ठीक पहले रोहाना के किसानों ने एक और समस्या उठाई थी। रोहाना खुर्द और रोहाना कलां को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग, जिससे मिल तक पहुंचा जाता है, जगह-जगह गड्ढों में तब्दील है। हाल की बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। किसानों का कहना है कि इसी मार्ग से हर दिन सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और गन्ने से भरे वाहन मिल पहुंचते हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि इस मार्ग की मरम्मत को प्राथमिकता दी जाए। जब तक सड़क ठीक नहीं होती, ट्रॉली पर क्षमता से ज्यादा लदान न करें और गड्ढों वाले हिस्से में रफ्तार धीमी रखें।
भाव का सवाल अभी खुला है
पेराई शुरू हो गई है, पर पेराई सत्र 2026-27 के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई शुरू होने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई भाव घोषित नहीं हुआ है, यह बात 30 अक्टूबर की रिपोर्टों में भी दर्ज है। मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर क्षेत्र में 28 अक्टूबर को हुए धरने में गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग भी उठी थी।
यहां एक भ्रम से बचना जरूरी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगैती का राज्य परामर्शित मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल था। यह पिछले सत्र की दर है, इसे नए सत्र 2026-27 की दर न समझें। जब तक सरकार नए सत्र का भाव आधिकारिक रूप से घोषित नहीं करती, तब तक किसी भी वायरल दावे को पक्का भाव मानकर गन्ना न बेचें। राज्य के स्तर पर तस्वीर बड़ी है। उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं।
इस सत्र में किसान क्या-क्या जांच लें
पहली पर्ची मिलने से पहले किसान तीन कागज दुरुस्त कर लें। समिति से मिला कैलेंडर और इंडेंट, बैंक खाता जो आधार से जुड़ा हो, और पिछले सत्र के भुगतान का हिसाब। पर्ची पर केंद्र का नाम, तारीख और तौल का ब्योरा ध्यान से पढ़ें। तौल पर्ची की फोटो अपने फोन में संभालकर रखें, ताकि भुगतान में देरी होने पर हिसाब दिखाना आसान हो।
पर्ची या भुगतान की शिकायत हो तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या अपनी गन्ना समिति से संपर्क करें। टोल फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत में पर्ची की तारीख, केंद्र का नाम और तौल का ब्योरा जरूर बताएं।
मुख्य बातें
- रोहाना कलां की इंडियन पोटाश मिल में 2 नवंबर को पेराई सत्र 2026-27 शुरू हुआ, पहली ट्रॉली की तौल के साथ शुभारंभ हुआ।
- गन्ना समिति चेयरमैन ने तौल में पारदर्शिता का आश्वासन दिया, पर सत्र 2026-27 के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है।
- रोहाना खुर्द-कलां मार्ग के गड्ढों को लेकर किसान चिंतित हैं, उन्होंने मरम्मत की मांग की है।
स्रोत: रॉयल बुलेटिन (2 नवंबर 2026), रॉयल बुलेटिन (20 अक्टूबर 2026), पूजा न्यूज (1 नवंबर 2026), नवभारत टाइम्स (30 अक्टूबर 2026)।
