₹600 गन्ना भाव और कर्ज माफी: मुजफ्फरनगर रैली की 20 मांगों पर अब सबकी नजर

पेराई सत्र की घड़ी नजदीक आ चुकी है, लेकिन यूपी के गन्ना किसानों को अभी तक यह पता नहीं है कि इस बार गन्ने का भाव क्या मिलेगा। इस एक सवाल ने गुरुवार को मुजफ्फरनगर की सड़कों को किसानों के ट्रैक्टरों से भर दिया।
दरअसल, किसान मजदूर संगठन ने 15 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में किसान मजदूर अधिकार महापंचायत बुलाई थी। लेकिन सुबह से हुई तेज बारिश ने टेंट गिरा दिया और मैदान में पानी भर गया। पंचायत तो रद्द हो गई, लेकिन किसान वापस नहीं लौटे। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह के नेतृत्व में किसानों ने महावीर चौक से ट्रैक्टर रैली शुरू की, जो आर्य समाज रोड, मीनाक्षी चौक, शिव चौक और झांसी की रानी चौक होते हुए कोर्ट रोड से कचहरी तक पहुंची। रैली में पैदल चल रहे किसानों का जत्था भी शामिल था। रैली की वजह से शहर के कई हिस्सों में जाम लग गया और ट्रैफिक पुलिस को उसे खुलवाने में घंटों लगे।
कचहरी पहुंचकर ठाकुर पूरण सिंह ने जिलाधिकारी को संबोधित 20 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन एडीएम प्रशासन को सौंपा। संगठन ने साफ कहा है कि किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
ज्ञापन की तीन सबसे बड़ी मांगें
पहली मांग गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने की है। संगठन का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत के मुकाबले किसानों को लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि किसानों को उनकी मेहनत और फसल में लगी लागत का सही मूल्य मिलना जरूरी है।
दूसरी बड़ी मांग किसानों का कर्ज माफ करने की है। कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को राहत देने के लिए यह मांग हर बड़े किसान आंदोलन में उठती है, और इस बार भी ज्ञापन में इसे प्रमुख स्थान मिला है।
तीसरी अहम मांग गन्ना बकाया भुगतान की है। ज्ञापन में कहा गया है कि गन्ना किसानों का बकाया भुगतान तुरंत कराया जाए और भविष्य में भुगतान निर्धारित समय सीमा में हो। साथ ही मांग है कि हर साल पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने का भाव घोषित किया जाए, ताकि किसान समय पर अपने फैसले ले सकें।
इसके अलावा ज्ञापन में किसान आय आयोग के गठन और डीजल, बिजली, खाद, बीज, कीटनाशक, मशीनरी व सिंचाई की बढ़ती लागत पर अंकुश लगाने जैसी मांगें भी शामिल हैं। रैली में जिलाध्यक्ष लोकेश पुंडीर, अंकित पुंडीर, वीरबहादुर सिंह, शुभम ठाकुर समेत संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
₹600 की मांग के पीछे की गणित
₹600 की मांग यूं ही नहीं उठी। इसके पीछे भाव तय करने की मौजूदा व्यवस्था और बढ़ती लागत का पूरा हिसाब है।
केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सत्र (1 अक्टूबर 2026 से शुरू) के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। यह 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर लागू होता है। उत्तर प्रदेश में राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) 2025-26 सत्र में ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती किस्म) था। लेकिन 2026-27 सत्र के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
इसी खाली जगह में दबाव की राजनीति चल रही है। 7 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना आयुक्त कार्यालय में हुई उपसमिति की बैठक में ही ₹600 प्रति क्विंटल की मांग पर चर्चा हुई थी, जहां बलरामपुर सहकारी गन्ना विकास समिति के प्रतिनिधि ने कृषि लागत बढ़ने का हवाला देकर भाव बढ़ाने की बात रखी थी। मुजफ्फरनगर की रैली उसी दबाव की कड़ी है।
किसान के लिए इसका मतलब क्या है
गन्ना पश्चिमी यूपी की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लाखों परिवारों की आजीविका इसी पर टिकी है। अगर भाव में बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा फायदा किसान की जेब पर पड़ेगा, लेकिन यह फैसला सरकार के हाथ में है। अभी तक की स्थिति यह है कि केंद्र का एफआरपी घोषित हो चुका है, पर राज्य का एसएपी अभी बाकी है। पेराई शुरू होने से पहले भाव घोषित करने की मांग इसलिए बार-बार उठ रही है क्योंकि बिना भाव तय हुए किसान को यह अनुमान नहीं लगता कि उसकी फसल उसे कितना देगी।
ज्ञापन में रखी गई “समय पर भुगतान” की मांग भी उतनी ही अहम है। कई मिलों का बकाया अटका हुआ है और ब्याज का सवाल तो अदालतों तक पहुंच चुका है। ऐसे में किसानों की नजर अब इस पर है कि प्रशासन और सरकार 20 सूत्रीय मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
अब आगे क्या
मुजफ्फरनगर की रैली ने एक बात साफ कर दी है कि बारिश जैसी बाधा भी किसान आंदोलन को रोक नहीं पा रही। संगठन ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दे रखी है। पेराई सत्र शुरू होने में अब हफ्ते बचे हैं और एसएपी का फैसला लटका हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार क्या कदम उठाती है, यह गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल है।
मुख्य बातें
- बारिश से जीआईसी मैदान की महापंचायत रद्द होने पर मुजफ्फरनगर में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर कचहरी तक मार्च किया।
- किसान मजदूर संगठन ने 20 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा: ₹600 गन्ना भाव, कर्ज माफी और बकाया भुगतान प्रमुख मांगें।
- 2026-27 सत्र का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है; पेराई से पहले भाव तय करने का दबाव बढ़ रहा है।
स्रोत: लाइव हिंदुस्तान, रॉयल बुलेटिन, चीनीमंडी (15-16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें)
