गन्ना इंडेंट: मुजफ्फरनगर में आज आखिरी दिन, 30 सितंबर के बाद कोटा-रिकॉर्ड में सुधार नहीं

मुजफ्फरनगर के हजारों गन्ना किसानों के लिए आज का दिन बेहद अहम है। गन्ना इंडेंट यानी बेसिक कोटा से जुड़ी आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख आज 30 सितंबर है। जिला गन्ना अधिकारी संजय सिंह सिसौदिया ने दो टूक कह दिया है कि आज के बाद आंकड़े पोर्टल पर अपलोड हो जाएंगे और फिर कोई संशोधन नहीं होगा। यानी शाम के बाद जो रिकॉर्ड पोर्टल पर चला जाएगा, उसी के आधार पर पूरे पेराई सत्र 2026-27 में गन्ना आपूर्ति होगी।
बेसिक कोटा वही आधार है जिसके हिसाब से पूरे सीजन पर्चियां बनती हैं। रकबा कम दर्ज हुआ तो पर्ची कम बनेगी, किस्म गलत लिखी तो भाव का गणित बिगड़ेगा। इसीलिए 30 सितंबर से पहले अपनी गन्ना समिति पहुंचकर रिकॉर्ड जांच लें।
आठ मिलों के सवा दो लाख किसान, सबके लिए एक ही डेडलाइन
मुजफ्फरनगर जनपद में आठ चीनी मिलें हैं और इनके क्षेत्र से जुड़े लगभग सवा दो लाख किसानों को आगामी पेराई सत्र के लिए प्राथमिक गन्ना सप्लाई कैलेंडर वितरित किए जा चुके हैं। यह प्राथमिक कैलेंडर किसानों को उनके रकबे, बेसिक कोटे और पर्चियों की जानकारी देता है ताकि सीजन शुरू होने से पहले गड़बड़ी पकड़ी जा सके।
पर जमीनी हकीकत कुछ और कह रही है। बड़ी संख्या में किसानों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें अभी तक कैलेंडर नहीं मिला है। अगर आप भी उन किसानों में हैं तो आज का दिन आपके लिए दोहरा जरूरी है। पहले समिति जाकर अपना प्राथमिक कैलेंडर लें, फिर उसमें दर्ज हर आंकड़े को ध्यान से जांचें। नाम की वर्तनी, रकबा, किस्म और बेसिक कोटा। इन चारों में से किसी एक में भी गड़बड़ी मिली तो वहीं आपत्ति दर्ज कराकर सुधार करा लें।
समितियों पर लगे हैं मेले, वहीं दर्ज कराएं आपत्ति
गन्ना विभाग और चीनी मिल प्रशासन ने जनपद की सभी समितियों पर गन्ने के रकबे, बेसिक कोटे और उसके आधार पर बनने वाली पर्चियों की जानकारी के लिए मेले लगाए हैं। इन मेलों में किसान दस्तावेज लेकर पहुंचे, सट्टा सूची से अपना रिकॉर्ड मिलाएं और गलती मिलने पर मौके पर ही आपत्ति दर्ज कराकर सुधार करा सकते हैं।
रोहना और मंसूरपुर की समितियों में शुरू हुए गन्ना सर्वे, सट्टा प्रदर्शन और समाधान मेलों का उप गन्ना आयुक्त सहारनपुर मंडल ओपी सिंह ने जनप्रतिनिधियों के साथ निरीक्षण किया था। खतौली चीनी मिल क्षेत्र में भी प्राथमिक कैलेंडर वितरण का शुभारंभ हो चुका है। सहारनपुर मंडल के तीनों जनपदों के 2164 गांवों के किसानों तक कैलेंडर पहुंचाने के निर्देश हैं, और वितरण में गन्ना विभाग के साथ चीनी मिलों की टीमें मिलकर काम कर रही हैं।
समिति नहीं पहुंच पा रहे हैं तो गन्ना विकास परिषद को ऑनलाइन शिकायत भेजने की सुविधा भी उपलब्ध है।
डेडलाइन के बाद क्या होगा, समझिए साफ-साफ
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया है कि 30 सितंबर के बाद आंकड़े पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएंगे और निर्धारित तिथि के बाद संशोधन नहीं किया जाएगा। पोर्टल पर डाटा फीडिंग का काम पूरा होते ही पक्के कैलेंडर वितरित कर दिए जाएंगे, और इसी पक्के कैलेंडर के आधार पर किसानों को चीनी मिलों में गन्ने की आपूर्ति करनी होगी। देर से आई आपत्ति पर विचार नहीं होगा।
आपत्ति में किन बातों पर दें ध्यान
आवेदन में इन पांच बातों की जांच जरूर करें। सट्टा सूची में नाम और पिता का नाम सही हो। खेत में जितना गन्ना खड़ा है, उतना ही रकबा दर्ज हो, कम या ज्यादा नहीं। गन्ने की किस्म अगेती, पछेती या सामान्य सही लिखी हो, क्योंकि भाव किस्म के हिसाब से तय होता है। बेसिक कोटा पिछले सीजन की आपूर्ति और इस बार के रकबे के हिसाब से उचित हो। और बैंक खाते की जानकारी सही हो, क्योंकि भुगतान सीधे खाते में आता है।
आवेदन के साथ आधार कार्ड और खतौनी या खसरे की प्रति जरूर रखें। किसी परेशानी की स्थिति में किसान मुख्यालय स्तर पर संचालित टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
15 अक्टूबर के बाद शुरू होगा नया पेराई सत्र
इस बार डेडलाइन का महत्व और बढ़ गया है क्योंकि मुजफ्फरनगर में नया पेराई सत्र पिछले साल से लगभग 15 दिन पहले शुरू होने जा रहा है। प्रशासन ने जनपद की सभी आठ मिलों में अक्टूबर के पहले सप्ताह तक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं, यानी 15 अक्टूबर के बाद नए सत्र का आगाज हो जाएगा।
जल्दी पेराई से खेत जल्दी खाली होंगे और रबी गेहूं की बुवाई समय पर हो सकेगी। लेकिन इंडेंट, कैलेंडर और पर्ची का पूरा चक्र भी पहले शुरू होगा, इसलिए आज की डेडलाइन चूकना इस बार और भारी पड़ सकता है।
प्रदेश स्तर पर गन्ना समिति की नई सदस्यता और उपज बढ़ोतरी के आवेदनों की अंतिम तिथि भी आज 30 सितंबर ही है।
मुख्य बातें
- मुजफ्फरनगर में गन्ना इंडेंट (बेसिक कोटा) की आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख आज 30 सितंबर है; डेडलाइन के बाद पोर्टल पर रिकॉर्ड लॉक, कोई संशोधन नहीं।
- आठ मिल क्षेत्रों के सवा दो लाख किसानों को प्राथमिक कैलेंडर बांटे गए हैं; समितियों पर लगे सट्टा प्रदर्शन मेलों में गलती मिलने पर मौके पर सुधार करा सकते हैं।
- नया पेराई सत्र 15 अक्टूबर के बाद शुरू होगा, जो पिछले साल से लगभग 15 दिन पहले है; कैलेंडर-पर्ची का चक्र भी उसी हिसाब से पहले चलेगा।
स्रोत: दैनिक जागरण, मुजफ्फरनगर (20 सितंबर 2026); लाइव हिंदुस्तान, मुजफ्फरनगर (सितंबर 2026)
