₹700 नहीं तो 2027 में वोट नहीं: मुजफ्फरनगर से उठी गन्ना किसानों की सबसे बड़ी चेतावनी

मुजफ्फरनगर के महावीर चौक स्थित जिला कार्यालय में हुई किसानों की बैठक में जो बात कही गई, वह अब पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गूंज रही है। भारतीय किसान यूनियन वर्मा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने साफ कहा कि गन्ने का लाभकारी मूल्य ₹700 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए। और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देंगे।
बैठक में वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी से मांगों पर तुरंत फैसला लेने की अपील की और कहा कि मांगें पूरी न हुईं तो पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन होगा। पेराई सत्र शुरू हो चुका है, मिलों में गन्ना जा रहा है, लेकिन भाव की घोषणा अब तक नहीं हुई है।
700 रुपये की मांग अब अकेली आवाज़ नहीं रही
मुजफ्फरनगर की यह चेतावनी अचानक नहीं आई है। पिछले तीन हफ्तों में ₹700 की मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से उठ चुकी है। 15 अक्टूबर को सहारनपुर के देवबंद में ग्राम जहीरपुर की बैठक में वर्मा ने यही मांग रखी थी और यही चेतावनी दी थी। 18 अक्टूबर को बागपत के कान्हड़ गांव में हुई बैठक में भी किसानों ने ₹700 से कम भाव स्वीकार न करने का एलान किया था।
31 अक्टूबर को बुलंदशहर में भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति ने गन्ना रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन सौंपा, गन्ना ₹700 और गेहूं ₹5,000 प्रति क्विंटल की मांग के साथ। 4 नवंबर को मेरठ के हस्तिनापुर में तीन किसान पेराई से पहले ₹700 भाव घोषित करने की मांग को लेकर गांव की पुरानी पानी की टंकी पर चढ़ गए थे।
अलग-अलग संगठन और जिले, लेकिन मांग एक ही। राकेश टिकैत ने भी 23 अक्टूबर को लखनऊ में कहा था कि गन्ने का भाव ₹600 से ऊपर होना चाहिए। ₹700 की मांग अब सिर्फ एक संगठन की नहीं, पूरे गन्ना बेल्ट की आवाज़ बनती जा रही है।
400 और 700 के बीच का हिसाब क्या है
मौजूदा भाव से इसकी वजह समझ आती है। पेराई सत्र 2025-26 में अगेती गन्ने का एसएपी ₹400 और सामान्य का ₹390 प्रति क्विंटल था। केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर लागू होता है।
वर्मा का कहना है कि डीजल, खाद, मजदूरी और सिंचाई के बढ़ते खर्च से गन्ने की उत्पादन लागत अब ₹550 प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गई है। यानी ₹400 के भाव पर किसान को लागत से कम मिल रहा है, जबकि मिलें गन्ने से चीनी, एथनॉल और बिजली बनाकर कमा रही हैं।
2026-27 के एसएपी पर सरकार का अंतिम फैसला अभी बाकी है। खबरों के मुताबिक ₹10 से ₹20 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार चल रहा है, जबकि किसान संगठनों ने बैठक में ₹450 से ₹500 का भाव मांगा है। वर्मा गुट ₹700 पर अड़ा है। ₹400 से ₹700 के बीच ₹300 का फासला ही इस टकराव की असली वजह है।
पेराई शुरू हो गई, भाव अब तक तय नहीं
किसान की मुश्किल सिर्फ भाव नहीं, समय भी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र शुरू हो चुका है। बागपत की मलकपुर मिल से शुरुआत हुई और नवंबर के पहले हफ्ते में ज्यादातर मिलें चालू हो रही हैं। गन्ना खेत से मिलों तक पहुंच रहा है, परची कट रही है, तौल हो रही है, लेकिन किसान को यह नहीं पता कि उसके गन्ने का भाव क्या मिलेगा।
वर्मा ने भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि देरी के कारण किसानों का करीब 19 हजार करोड़ रुपये ब्याज बकाया है। यह ब्याज समय पर मिलता तो अगली फसल की तैयारी आसान होती। पर्ची और भुगतान की अनिश्चितता हर साल पेराई के समय सामने आती है, इस बार भाव के टकराव ने इसे और बड़ा कर दिया है।
प्रदेश में करीब 50 लाख गन्ना किसान हैं, जिनमें ज्यादातर छोटे और मझोले किसान हैं। उनकी साल भर की कमाई का बड़ा हिस्सा गन्ने पर टिका है। भाव में ₹10-20 की बढ़ोतरी से लागत पूरी नहीं होती, यही वजह है कि मांग सीधे ₹700 तक पहुंच गई है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नज़र सरकार के अगले कदम पर है। एसएपी की घोषणा कब होगी, यह सवाल हर किसान पूछ रहा है। चुनावी साल में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गन्ना किसान प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा वोट बैंक माने जाते हैं। इसलिए ₹700 की मांग सिर्फ भाव का नहीं, चुनावी मुद्दा भी बन गई है।
वर्मा और महाशक्ति, दोनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। सरकार जल्द एसएपी घोषित करती है तो टकराव थम सकता है, लेकिन घोषणा टलती रही तो पेराई सत्र के बीच में ही किसान आंदोलन तेज़ हो सकता है।
किसान को इस समय सिर्फ एक चीज़ चाहिए, पेराई से पहले साफ भाव और समय पर भुगतान। सरकार कितनी बढ़ोतरी देती है और संगठन क्या रुख अपनाते हैं, यह अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।
मुख्य बातें
- मुजफ्फरनगर में भाकियू वर्मा की बैठक में गन्ने का लाभकारी मूल्य ₹700 प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग उठी, साथ ही 2027 में भाजपा को वोट न देने की चेतावनी दी गई।
- ₹700 की मांग अब कई जिलों से उठ रही है: देवबंद, बागपत, बुलंदशहर और मेरठ में किसान संगठन इसी भाव की मांग कर चुके हैं।
- 2025-26 का एसएपी अगेती ₹400 और सामान्य ₹390 प्रति क्विंटल था; 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, सरकार ₹10-20 की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है।
स्रोत: रॉयल बुलेटिन (5 नवंबर 2026), अमर उजाला (18 अक्टूबर और 4 नवंबर 2026), बिज़नेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026)
