मुजफ्फरनगर में 'किसान बचाओ' महापंचायत आज: 600 रुपये गन्ना भाव की मांग, 22 मांगों का ज्ञापन

600 रुपये।
यही वो संख्या है जो आज मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में सबसे ज्यादा गूंजी। पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से चंद दिन पहले भारतीय किसान यूनियन (तोमर) की ‘किसान बचाओ, देश बचाओ’ महापंचायत में किसानों ने इसी आंकड़े को लेकर सरकार पर दबाव बनाया — गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए। इसी मांग के साथ कुल 22 मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम अधिकारियों को सौंपने की योजना बनाई गई।
जीआईसी मैदान में आज क्या हुआ
महापंचायत शहर के राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) के मैदान में हुई, जिसकी कमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव तोमर खुद संभाले हुए थे। 6 अक्टूबर को उन्होंने मैदान पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया था — मंच, पानी, भोजन और पार्किंग की व्यवस्था कराई गई। संगठन का दावा है कि 6 जिलों से करीब 15 हजार किसान पहुंचे; प्रशासन की ओर से भीड़ का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं आया है।
तोमर ने पहले ही किसानों से शांतिपूर्ण भागीदारी की अपील की थी। मेरठ से भी बड़ी संख्या में किसान पहुंचे; संगठन के राष्ट्रीय सलाहकार इंद्रजीत सिंह सांगवान ने मेरठ में बैठक कर पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी थीं।
गन्ना किसान के लिए कौन सी मांगें अहम हैं
22 सूत्रीय मांगपत्र में किसान और गन्ना उत्पादक से जुड़ी मांगें सबसे ऊपर रहीं:
- गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल: यह मांगपत्र की सबसे बड़ी मांग है — पेराई सत्र 2026-27 के लिए भाव कम से कम 600 रुपये तय हो।
- बकाया गन्ना भुगतान और 14 दिन का नियम: नियम के मुताबिक मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, लेकिन कई मिलों में देरी आम शिकायत है। इसका समाधान भी मांगपत्र में है।
- संपूर्ण कर्जमाफी: किसानों के आर्थिक संकट को देखते हुए पूरी कर्जमाफी की मांग दोहराई गई।
- स्मार्ट मीटर पर रोक: बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग रखी गई, जिसे किसान उत्पीड़न से जोड़कर देखा जा रहा है।
- 60 साल के बाद 10 हजार रुपये पेंशन: 60 वर्ष की उम्र के बाद किसानों को मासिक 10 हजार रुपये पेंशन देने की मांग भी मांगपत्र का हिस्सा है।
- पेपर मिलों का प्रदूषण: मुजफ्फरनगर क्षेत्र की पेपर मिलों से बढ़ रहे प्रदूषण पर रोक और प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के इलाज की व्यवस्था की मांग रखी गई।
- एम्स और हाईकोर्ट बेंच: मुजफ्फरनगर में एम्स अस्पताल की स्थापना और पश्चिमी यूपी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच मेरठ में स्थापित करने की मांग भी इसमें शामिल है।
एक स्थानीय मुद्दा भी प्रमुखता से उठा — मीरापुर के गांव केलापुर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर कट और अंडरपास की मांग, जिसके लिए ग्रामीण सात महीनों से धरना दे रहे हैं। गांव के बीचों-बीच चौराहे से हादसों का खतरा है, लेकिन एनएचएआई और प्रशासन ने अब तक समाधान नहीं निकाला।
भाव की सच्चाई: मांग 600, घोषित 365
अब गणित पर आइए, क्योंकि यही वो हिस्सा है जिससे हर गन्ना किसान का सीधा सरोकार है।
केंद्र ने चीनी सीजन 2026-27 (1 अक्टूबर 2026 से) के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है — पिछले सत्र के 355 रुपये से 10 रुपये ज्यादा। लेकिन यूपी की मिलें भुगतान एफआरपी पर नहीं, राज्य सलाहकारी मूल्य (एसएपी) पर करती हैं, जो हमेशा ऊपर रहता है। 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है; 2025-26 में यह अगेती के लिए 400 और सामान्य प्रजाति के लिए 390 रुपये था। पेराई से पहले 600 रुपये की मांग इसी खाली जगह में दबाव बनाने की रणनीति है।
किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा
समय यहां सबसे बड़ा कारक है। पश्चिमी यूपी की कई मिलों को 15 से 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने के निर्देश हैं। एसएपी की घोषणा भी आमतौर पर पेराई शुरू होने के आसपास होती है। ऐसे में पेराई से ठीक पहले की महापंचायतें सरकार पर भाव बढ़ाने का सबसे असरदार दबाव-तंत्र मानी जाती हैं।
ऊपर से 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हैं, और गन्ना मूल्य पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। चुनावी साल में भाव की मांग को दबाना किसी सरकार के लिए आसान नहीं होता — किसान संगठन यह गणित अच्छी तरह समझते हैं।
एक व्यावहारिक तारीख भी नोट कर लीजिए: पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना समिति की सदस्यता और उपज बढ़ोतरी के आवेदन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर है। जिन्होंने पहली बार या लंबे अंतराल के बाद गन्ना बोया है, उनके लिए समिति की सदस्यता जरूरी है — तभी वे सरकारी भाव पर मिलों को गन्ना बेच पाएंगे।
मुख्य बातें
- मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में भाकियू (तोमर) की ‘किसान बचाओ, देश बचाओ’ महापंचायत हुई; संगठन का दावा है कि 6 जिलों से करीब 15 हजार किसान पहुंचे।
- गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग सबसे ऊपर; बकाया भुगतान, कर्जमाफी, स्मार्ट मीटर पर रोक, 60 साल के बाद 10 हजार पेंशन समेत 22 मांगों का ज्ञापन तैयार।
- केंद्र का एफआरपी 2026-27 के लिए 365 रुपये तय है, लेकिन यूपी का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ — पेराई (15-20 अक्टूबर) से पहले यह दबाव तय करने वाली भूमिका निभा सकता है।
स्रोत: डायनामाइट न्यूज (6 अक्टूबर 2026) — महापंचायत की तैयारियां, 15 हजार किसानों का दावा, 22 मांगें; रॉयल बुलेटिन — ‘किसान बचाओ, देश बचाओ’ महापंचायत का ऐलान, केलापुर अंडरपास मुद्दा, एम्स व हाईकोर्ट बेंच की मांग; लाइव हिंदुस्तान — किथौड़ा पंचायत में संजीव तोमर की 7 अक्टूबर महापंचायत की घोषणा, गन्ना भाव 600 रुपये की मांग।
