मुजफ्फरनगर में बारिश ने तोड़ा 5 साल का रिकॉर्ड, गन्ने की रिकवरी 8% पर अटकी

मुजफ्फरनगर के गन्ना किसानों के लिए अक्टूबर का महीना एक रिकॉर्ड के साथ खत्म हो रहा है, और यह रिकॉर्ड किसी के काम का नहीं है। जिले में अक्टूबर में कुल 132.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हो चुकी है। पिछला रिकॉर्ड 2021 का था, जब पूरे अक्टूबर में 103.4 मिलीमीटर पानी बरसा था। इस बार वह आंकड़ा करीब 29 मिलीमीटर से पार हो गया है, और महीना अभी खत्म भी नहीं हुआ है।
सबसे भारी झटका 30 अक्टूबर की रात लगा। एक ही रात में 59.2 मिलीमीटर बारिश हुई। खेतों में पानी भर गया, कटी हुई धान भीग गई और गन्ने की कटाई का काम जहां का तहां रुक गया। शुक्रवार को दिन का तापमान 20.2 डिग्री तक सिमट आया, जो अक्टूबर का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा।
किस दिन कितनी बारिश हुई
अक्टूबर की बारिश एक दिन की कहानी नहीं है। महीने की शुरुआत से ही रुक-रुककर पानी बरसता रहा। 1 अक्टूबर को 28.4 मिलीमीटर, 11 अक्टूबर को 23.0 मिलीमीटर और 12 अक्टूबर को 19.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। 29 अक्टूबर को सिर्फ 1.8 मिलीमीटर पानी बरसा, लेकिन अगले ही दिन 59.2 मिलीमीटर की झड़ी ने सारे समीकरण बदल दिए।
इस बारिश का सीधा असर गन्ने की पेराई पर पड़ रहा है। चीनी मिलों ने इंडेंट जारी करना शुरू कर दिया है, लेकिन बारिश के कारण रिकवरी का संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल गन्ने में रिकवरी करीब 8 प्रतिशत के आसपास चल रही है। कम रिकवरी का मतलब है कि मिलों को उसी गन्ने से कम चीनी मिलेगी। जब रिकवरी कम रहती है तो मिल प्रबंधन पेराई तेज करने से हिचकता है, और इसका खामियाजा किसान को इंडेंट की देरी के रूप में भुगतना पड़ता है। खबरों के मुताबिक दिवाली तक किसानों को मनमाफिक इंडेंट मिलने की संभावना कम है।
पड़ोसी जिले शामली में भी हालात ऐसे ही हैं। वहां जिला गन्ना अधिकारी के हवाले से बताया गया था कि इस बार गन्ने की रिकवरी लगभग 8 प्रतिशत तक आ रही है, और तीनों मिलों का पेराई सत्र करीब एक हफ्ता पिछड़ गया है। यानी यह दिक्कत सिर्फ मुजफ्फरनगर की नहीं, पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की है।
कोल्हू पर भी घटा भाव
मिलों के साथ-साथ कोल्हू और क्रशर पर भी बारिश की मार पड़ी है। खोई और दूसरे ईंधन के गीला हो जाने से कोल्हुओं का संचालन थम गया है, और मंडी में गुड़ की आवक कम हो गई है। मुजफ्फरनगर के किसान संजय चौधरी के मुताबिक, मिलों में पेराई शुरू नहीं हो पाने के कारण कोल्हू पर अब किसानों को गन्ने का दाम 380 से 400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास मिल रहा है, जबकि सीजन की शुरुआत में कोल्हू संचालक 430 से 450 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दे रहे थे। बारिश के चलते अब कोल्हू संचालक भी गन्ना खरीदने की स्थिति में नहीं हैं।
यह बात किसानों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि दिवाली से पहले कई किसान त्योहार के खर्चों के लिए कोल्हू या क्रशर पर गन्ना बेचते हैं। भाव गिरने का मतलब है कि त्योहार के ठीक पहले हाथ में आने वाली रकम घट गई है।
सरसों की बुवाई भी पिछड़ी
बारिश ने सिर्फ गन्ने को ही नहीं, रबी की तैयारी को भी पीछे धकेल दिया है। खेतों में कटी पड़ी धान भीग जाने से नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने सरसों की बुवाई के लिए खेत तैयार कर लिए थे, उन्हें भी झटका लगा है, और अब वे खेत सूखने का इंतजार कर रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के वैज्ञानिक वीरेंद्र सिंह ने किसानों को बारिश और तेज हवाओं से फसलों को बचाने की सलाह दी है। उनके मुताबिक सरसों की बुवाई में देरी हो सकती है, खेतों में पड़ी धान की कटी फसल को भीगने से नुकसान की आशंका है, और गन्ने की बंधाई तुरंत करनी चाहिए।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
इस पूरी स्थिति का किसान पर असर तीन तरह से पड़ रहा है। पहला, पेराई और इंडेंट में देरी से गन्ना खेत में ज्यादा दिन खड़ा रहेगा, जिससे वजन घटने का डर रहता है। दूसरा, कम रिकवरी के दौर में मिलों की चाल धीमी रह सकती है, इसलिए पर्ची मिलने पर गन्ना तौल केंद्र तक पहुंचाने में देर न करें। तीसरा, कोल्हू का भाव गिरा है, इसलिए जल्दबाजी में सस्ते भाव पर गन्ना बेचने से पहले मिल के इंडेंट का इंतजार करना समझदारी होगी।
एक बात और साफ रखनी जरूरी है। पेराई सत्र शुरू होने के बावजूद 2026-27 के गन्ना मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगैती का मूल्य 400 रुपये और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन यह पुराने सत्र का भाव है। नए सत्र का भाव घोषित होने तक उसी को मौजूदा भाव मानकर कोई सौदा न करें।
फिलहाल मौसम का रुख ही तय करेगा कि पेराई कितनी रफ्तार पकड़ती है। खेत सूखे, गन्ने की बंधाई हो और रिकवरी में सुधार आए, तभी मिलें पूरी क्षमता से चल पाएंगी। तब तक सबसे बड़ा काम खेत और फसल को बारिश के बाद के नुकसान से बचाना है।
मुख्य बातें
- मुजफ्फरनगर में अक्टूबर में अब तक 132.2 मिमी बारिश, 2021 के 103.4 मिमी के रिकॉर्ड से ज्यादा।
- गन्ने की रिकवरी करीब 8% पर अटकी, जिससे पेराई और इंडेंट पर असर पड़ रहा है।
- कोल्हू पर गन्ने का भाव घटकर 380-400 रुपये प्रति क्विंटल रह गया, जबकि सीजन की शुरुआत में 430-450 रुपये मिल रहा था।
स्रोत: अमर उजाला (31 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस (31 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (26 अक्टूबर 2026)
