आज सुप्रीम कोर्ट में गन्ना ब्याज की सुनवाई, नारा: 'ब्याज नहीं तो वोट नहीं'

आज का दिन उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए अहम है। सुप्रीम कोर्ट में विलंबित गन्ना भुगतान पर ब्याज के मामले की सुनवाई तय है। इससे ठीक दो दिन पहले मुरादाबाद में हुई एक किसान युवा संसद ने सियासी पार्टियों को सीधी चेतावनी दे दी है। नारा गूंजा है: ब्याज नहीं तो वोट नहीं।
मुरादाबाद में क्या हुआ
4 अक्टूबर को मुरादाबाद के भगतपुर रामबती इंटर कॉलेज में किसान युवा संसद का आयोजन हुआ। मेजबान रहे भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी। सभा में तीन दशक पुराने लंबित ब्याज और गन्ना मूल्य वृद्धि का सवाल उठा।
सभा का रुख सत्ता और विपक्ष, दोनों के प्रति तीखा था। नरेश चौधरी ने कहा कि किसानों का वैधानिक अधिकार कोर्ट में है, लेकिन सत्ता और विपक्ष दोनों का मौन चिंताजनक है। सभा में आरोप लगा कि चुनाव में हितैषी बनने वाले दल अब खामोश हैं। ‘आप’ सांसद संजय सिंह के अलावा किसी नेता ने इस मुद्दे को प्रमुखता से नहीं उठाया, यह भी कहा गया।
ब्याज की लड़ाई: 30 साल पुरानी
ब्याज का सवाल नया नहीं है। कानून साफ है: गन्ने की आपूर्ति के 14 दिन के भीतर मिल को भुगतान करना होगा। देरी हुई तो 15 फीसदी सालाना ब्याज किसान को मिलेगा। इसके बावजूद दशकों से ब्याज का हिसाब अटका पड़ा है।
गोला गोकर्णनाथ के राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष अंजनी दीक्षित के अनुसार इस लड़ाई को सरदार वीएम सिंह करीब 30 साल से लड़ रहे हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश किसानों के पक्ष में आए, लेकिन अमल धीमा रहा।
₹1,936 करोड़ की वसूली: अदालत सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाल के महीनों में इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। 16 जुलाई को कोर्ट ने 1996-97 के पेराई सत्र से अब तक के विलंबित भुगतान पर 15 फीसदी ब्याज के हिसाब का आदेश दिया। 31 अगस्त की सुनवाई में सभी जिला अधिकारियों को वसूली कर किसानों को दिलाने के निर्देश मिले। वर्तमान समेत पूर्व के चार गन्ना आयुक्तों को नोटिस भी जारी हुआ।
गन्ना आयुक्त के चार्ट के मुताबिक 2025-26 के मूल बकाये के करीब 1,087 करोड़ रुपये अभी बाकी हैं। इस पर 15 फीसदी की दर से देय ब्याज करीब 849.52 करोड़ बैठता है। कुल मिलाकर करीब 1,936 करोड़ रुपये की वसूली लंबित है, और पुराने वर्षों का ब्याज इससे अलग, कई हजार करोड़ तक हो सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी है।
₹500 भाव की मांग: कोल्हू से तुलना
युवा संसद में दूसरी बड़ी मांग गन्ने के भाव को लेकर थी। 2026-27 के पेराई सत्र के लिए कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल भाव की मांग पुरजोर उठाई गई। तर्क सीधा था: अभी कोल्हू-क्रेशर पर गन्ना 490 से 500 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रहा है, जबकि 2025-26 का एसएपी अगेती के लिए 400 और सामान्य प्रजाति के लिए 390 रुपये रहा। किसान पूछ रहे हैं कि जब कोल्हू 500 दे सकता है, तो मिलें क्यों नहीं।
यहां एक बात साफ रखनी जरूरी है: 2026-27 के पेराई सत्र के लिए सरकार ने अभी तक एसएपी की घोषणा नहीं की है। भाव की घोषणा बाकी है, और उसी घोषणा का इंतजार है।
2027 चुनाव से पहले सियासी गर्माहट
सभा का सबसे तीखा हिस्सा राजनीतिक था। युवा संसद ने फैसला लिया कि जो भी नेता वोट मांगने आएगा, उससे ब्याज और गन्ना मूल्य का हिसाब लिया जाएगा। किसान यह भी दर्ज करेंगे कि किस दल ने ब्याज और भाव के सवाल पर किसानों के पक्ष में स्टैंड लिया और किसने खिलाफ।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा किसान सियासत का बड़ा केंद्र बनता दिख रहा है। सभा ने ब्याज की किसानवार गणना का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, समय पर भुगतान, एमएसपी, सिंचाई और बीज-खाद जैसे मुद्दों पर गांव-गांव अभियान चलाने का फैसला भी लिया।
आगे क्या
आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजर है। सुनवाई के बाद आंदोलन की अगली रणनीति का ऐलान होगा। हाईकोर्ट में 15 अक्टूबर की सुनवाई भी इसी लड़ाई की अगली कड़ी है। किसान के लिए मतलब सीधा है: अगर ब्याज का पैसा मिला तो सालों से अटकी रकम हाथ आएगी, और भाव की घोषणा ने पेराई सत्र की पूरी गणित बदलनी है।
मुख्य बातें
- 4 अक्टूबर को मुरादाबाद में किसान युवा संसद हुई; मांगें: लंबित ब्याज का भुगतान और गन्ना भाव ₹500 प्रति क्विंटल।
- आज 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में ब्याज मामले की सुनवाई; हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को।
- किसान नेताओं ने नारा दिया “ब्याज नहीं तो वोट नहीं”, 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
स्रोत: वेबवार्ता (4 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (हिंदुस्तान), किसान इंडिया
