मोरना चीनी मिल की क्षमता दोगुनी होगी: 2500 से 5000 TCD, किसानों को क्या मिलेगा

मुजफ्फरनगर के मोरना इलाके के किसान हर पेराई सत्र में एक ही शिकायत करते रहे हैं। मिल छोटी पड़ जाती है, गन्ना ज्यादा होता है और तौल केंद्र पर ट्रॉली की लाइन लंबी खिंच जाती है। इस परेशानी का स्थायी हल अब कागज पर तय हो चुका है। गंगा किसान सहकारी चीनी मिल, मोरना की पेराई क्षमता 2500 टीसीडी से बढ़ाकर 5000 टीसीडी की जाएगी। सीधे शब्दों में कहें तो मिल रोज दोगुना गन्ना पेर सकेगी।
इस फैसले पर उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इस साल जनवरी में मुहर लगाई थी। मोरना मिल के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए 261.91 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। काम दो चरणों में होगा। पहले चरण में क्षमता 2500 टीसीडी से बढ़कर 3500 टीसीडी होगी। दूसरे चरण में इसे 5000 टीसीडी तक ले जाया जाएगा। पुरानी मशीनों और जर्जर प्लांट की वजह से किसान अब तक इस मिल से उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं उठा पा रहे थे। नई आधुनिक मशीनें लगने के बाद उत्पादन भी बढ़ेगा और मिल का कामकाज भी सुधरेगा।
क्षमता दोगुनी होने का मतलब किसान के लिए क्या है
टीसीडी का मतलब है टन केन पर डे, यानी मिल एक दिन में कितने टन गन्ना पेर सकती है। 2500 टीसीडी वाली मिल रोज 2500 टन गन्ना पेरती है। 5000 टीसीडी होने पर यही आंकड़ा रोज 5000 टन हो जाएगा। किसान के लिए इसका सबसे पहला फायदा इंतजार कम होना है। पेराई तेज होगी तो तौल केंद्र पर ट्रॉली कम देर खड़ी रहेगी और खेत जल्दी खाली होगा। खेत जल्दी खाली होने का मतलब है गेहूं की बुवाई के लिए ज्यादा समय मिलना।
दूसरा फायदा भुगतान से जुड़ा है। मिल की कमाई और कामकाज सुधरने पर समय पर भुगतान की उम्मीद बढ़ती है। सरकार का कहना है कि क्षमता बढ़ने से किसानों की आय बढ़ेगी और भुगतान समय पर होगा। तीसरा फायदा रोजगार का है। नई मशीनों वाली बड़ी मिल में स्थानीय स्तर पर काम के मौके बढ़ेंगे। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस फैसले पर आभार जताया था। उन्होंने इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम बताया था।
सिर्फ मोरना नहीं, पांच मिलों का 1967 करोड़ का पैकेज
मोरना का विस्तार अकेला फैसला नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार सहकारी चीनी मिलों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए कुल 1967 करोड़ रुपये की योजना पर काम कर रही है। इसमें गजरौला और बागपत की मिलों की क्षमता 2500 टीसीडी से बढ़ाकर 4900 टीसीडी की जा रही है। इन दोनों पर क्रमशः 545.52 करोड़ और 570 करोड़ रुपये का प्रावधान है। सेमिकेरा सहकारी चीनी मिल की क्षमता 2750 से बढ़कर 3500 टीसीडी होगी। रुद्रा बिलासपुर मिल का 75 करोड़ रुपये से तकनीकी उन्नयन किया जा रहा है।
इस पैकेज में मशीनों के साथ कामकाज का तरीका भी बदला जा रहा है। इन्वेंट्री प्रबंधन और खरीद की डिजिटलीकरण, शीरे की बिक्री के लिए ऑनलाइन व्यवस्था और गन्ना ढुलाई वाले वाहनों पर जीपीएस निगरानी की बात कही गई है। किसान के लिए इसका मतलब है ज्यादा पारदर्शिता। गन्ना कहां से चला, कहां पहुंचा, इसका हिसाब सिस्टम में दर्ज रहेगा।
2026-27 पेराई सत्र में मोरना के किसान क्या करें
यह खबर इसलिए भी काम की है क्योंकि 2026-27 का पेराई सत्र शुरू हो चुका है। उद्योग संगठन इस्मा ने 26 अक्टूबर को बताया था कि देश में 107 मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश में तब दो मिलें चालू हो चुकी थीं और पश्चिमी यूपी में कुछ ही दिन में पेराई शुरू होने की बात कही गई थी। मुजफ्फरनगर के किसान इस सत्र में अपनी पर्ची, सट्टा और तौल रसीद संभालकर रखें। तौल के समय प्रिंटेड रसीद पर वाहन संख्या और वजन मिला लेना हर बार जरूरी है।
एक बात साफ रखनी चाहिए। इस सत्र के लिए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (SAP) की घोषणा का इंतजार अब भी जारी है। अक्टूबर की शुरुआत में लखनऊ में हुई उप-समिति की बैठक में किसानों की ओर से 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठी थी। जब तक नई घोषणा नहीं होती, पिछले सत्र का भाव इस सत्र का भाव नहीं माना जा सकता। भुगतान या पर्ची में कोई दिक्कत आए तो गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
मोरना मिल का विस्तार रातोंरात नहीं होगा। पहले चरण में 3500 टीसीडी और फिर 5000 टीसीडी तक पहुंचने में समय लगेगा। लेकिन दिशा तय है। जिस मिल की क्षमता दोगुनी होगी, वहां किसान का गन्ना कम अटकेगा, खेत जल्दी खाली होगा और भुगतान का भरोसा बढ़ेगा। पश्चिमी यूपी के सहकारी मिल तंत्र के लिए यह एक मजबूत संकेत है।
मुख्य बातें
- मोरना की गंगा किसान सहकारी चीनी मिल की क्षमता 2500 से बढ़कर 5000 टीसीडी होगी, पहले चरण में 3500 टीसीडी।
- विस्तार के लिए 261.91 करोड़ रुपये मंजूर, जो 1967 करोड़ रुपये के पांच मिलों वाले पैकेज का हिस्सा है।
- 2026-27 पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन इस सत्र के SAP की घोषणा का इंतजार अब भी जारी है।
स्रोत: Free Press Journal (29 जनवरी 2026), ChiniMandi, द इकोनॉमिक टाइम्स / इस्मा (26 अक्टूबर 2026)
