25 अक्टूबर को गन्ना लेकर पहुंचेंगे किसान: मोरना मिल में धरना, तैयारियां पूरी करो

मंगलवार दोपहर दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल, मोरना का प्रांगण अचानक नारों से गूंज उठा। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में वहां जुटे और धरने पर बैठ गए। वजह एक ही थी। किसानों की मांग है कि पेराई सत्र 25 अक्टूबर से शुरू हो, जैसा कि पहले तय हुआ था। मिल प्रशासन ने शेड्यूल में इस मिल की तारीख 30-31 अक्टूबर रखी है, और इसी पांच दिन के अंतर पर अब टकराव खड़ा हो गया है।
धरने के दौरान भाकियू ने खुला ऐलान किया। अगर मिल प्रशासन ने समय पर तैयारियां पूरी नहीं कीं, तो भी किसान 25 अक्टूबर को अपना गन्ना लेकर मिल पहुंचेंगे। इसके बाद मिल प्रबंधन पर तैयारियां पूरी रखने की चेतावनी भी दर्ज कराई गई।
25 अक्टूबर की मांग कहां से आई
धरने को संबोधित करते हुए भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष अनुज राठी ने याद दिलाया कि यह तारीख किसानों ने हवा में नहीं तय की है। मिल समिति की वार्षिक निकाय बैठक में एडीएम प्रशासन की मौजूदगी में 25 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का निर्णय लिया गया था। उनकी दलील सीधी है। बैठक में फैसला हुआ, अफसर मौजूद थे, अब प्रबंधन उससे पीछे क्यों हट रहा है।
इस सवाल का जवाब फिलहाल मिल प्रशासन के पास तैयार नहीं था। धरने के दौरान मिल के प्रधान प्रबंधक वीपी पांडेय खुद किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिलाधिकारी से मिलकर पेराई सत्र की तारीख तय कराने का प्रयास करेंगे। मतलब यह कि अब अंतिम फैसला जिलाधिकारी स्तर की वार्ता में होगा।
चारा और बरसीम: किसानों का दोहरा नुकसान
किसान नेताओं ने पेराई में देरी के नुकसान को गिनाकर अपनी बात रखी। खेतों में खड़ा गन्ना जब तक मिल नहीं पहुंचेगा, खेत खाली नहीं होंगे। और खाली खेत के बिना बरसीम की बुवाई संभव नहीं है। यह वह मौसम है जब पशुओं के चारे की किल्लत पहले से चल रही है। पेराई अटकी तो दोहरा झटका तय है। एक तरफ गन्ने की कटाई रुकेगी, दूसरी तरफ पशुओं के चारे का संकट और गहराएगा।
यह दलील इलाके के किसान की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़ी है। मोरना के आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में किसान पशुपालन पर भी निर्भर हैं। खेत से गन्ना उठना उनके लिए सिर्फ मिल को आपूर्ति का सवाल नहीं, बल्कि घर के पशुओं के चारे का सवाल भी है।
धरने में उठी तीन और मांगें
पेराई की तारीख के अलावा धरने में तीन और मुद्दे जोर से उठे। भाकियू के जिला उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र प्रधान ने गन्ना मूल्य भुगतान में देरी पर मिलने वाले ब्याज का मामला रखा। उनका कहना था कि न्यायालय के आदेशों के मुताबिक देरी से किए गए भुगतान पर किसानों को ब्याज मिलना चाहिए, लेकिन यह राशि किसानों तक नहीं पहुंच रही।
उनकी दूसरी मांग कीटनाशक और यूरिया पर मिलने वाली सब्सिडी को लेकर थी। प्रधान ने कहा कि मिल की ओर से इस सब्सिडी का पारदर्शी ब्योरा सार्वजनिक किया जाए ताकि किसानों को पता चल सके कि इसका वास्तविक लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं।
संगठन मंत्री मघिन्द्र बालियान ने मिल परिसर की अव्यवस्थाओं की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि कैन यार्ड में किसानों के लिए स्वच्छ पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। पेराई सत्र शुरू होने से पहले मिल प्रशासन को पीने के पानी और पूरे परिसर में साफ-सफाई का पुख्ता इंतजाम करना चाहिए, क्योंकि सीजन में किसान घंटों तक यार्ड में इंतजार करते हैं।
आधिकारिक शेड्यूल में 30-31 अक्टूबर: टकराव का कारण
टकराव की जड़ अब साफ नजर आ रही है। जिला गन्ना अधिकारी और मिल प्रबंधकों की सहमति से जारी शेड्यूल के मुताबिक मोरना मिल की प्रस्तावित तारीख 30-31 अक्टूबर है। दूसरी ओर किसान बैठक के 25 अक्टूबर के फैसले पर डटे हैं।
जिले की बाकी मिलों का घोषित क्रम इस तरह है: धामपुर बायो ऑर्गेनिक मंसूरपुर 24-26 अक्टूबर, बजाज हिंदुस्तान बुढ़ाना 25-26 अक्टूबर, उत्तम शुगर मिल्स खैखेड़ी 27-28 अक्टूबर, टिकौला शुगर मिल्स टिकौला 28-29 अक्टूबर, इंडियन पोटाश लिमिटेड रोहाना कलां 29-30 अक्टूबर, इंडियन पोटाश लिमिटेड तितावी 30-31 अक्टूबर और त्रिवेणी इंजीनियरिंग खतौली 1-2 नवंबर।
एक और अहम बात यह है कि पेराई से पहले ही जिला पंचायत प्रशासक डॉ. वीरपाल निर्वाल मोरना मिल का निरीक्षण कर चुके हैं। निरीक्षण के दौरान 26 अक्टूबर तक मिल चालू करने की तैयारी पर जोर दिया गया था और किसानों को स्वच्छ पेयजल समेत जरूरी सुविधाएं देने के निर्देश दिए गए थे। यानी प्रशासनिक स्तर पर भी मिल को 26 अक्टूबर तक तैयार रखने का दबाव पहले से मौजूद है।
किसान अब क्या करें
पेराई सत्र शुरू होने से ठीक पहले किसानों के लिए सबसे जरूरी काम अपनी इंडेंट और पर्ची की जानकारी दुरुस्त करना है। अपनी मिल के गन्ना केंद्र या समिति से कैलेंडर जांच लें और कटाई की योजना घोषित तारीख के हिसाब से बनाएं। खेत समय पर खाली हो तो बरसीम की बुवाई भी समय पर होगी।
धरने की अध्यक्षता प्रकाश राठी ने की और संचालन युवा प्रकोष्ठ के ब्लॉक अध्यक्ष राजा देशवाल ने किया। भाकियू के भोकरहेड़ी नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, मोंटी राठी, भूरा चौधरी, श्यामवीर सिंह, अनिल, राहुल त्यागी, शिव कुमार और देवीलाल समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर मौजूद रहे।
पर्ची, तौल या भुगतान की दिक्कत हो तो गन्ना किसान हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 के साथ एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध है। शिकायत में अपनी पर्ची संख्या और मिल का नाम जरूर लिखें।
मुख्य बातें
- मोरना मिल में भाकियू (टिकैत) का धरना: 25 अक्टूबर से पेराई की मांग, तय तारीख को गन्ना लेकर पहुंचने का ऐलान।
- टकराव की जड़: बैठक में 25 अक्टूबर का फैसला बनाम आधिकारिक शेड्यूल की 30-31 अक्टूबर तारीख। अब जिलाधिकारी स्तर की वार्ता से होगा फैसला।
- किसानों ने भुगतान पर ब्याज, सब्सिडी का ब्योरा और कैन यार्ड में पेयजल-सफाई की भी मांग उठाई।
स्रोत: रॉयल बुलेटिन (21 अक्टूबर 2026), सच कहूँ हिंदी (21 अक्टूबर 2026)
