110.52 लाख क्विंटल गन्ना 7 मिलों को मिला, 76 क्रय केंद्र तय — किसानों पर क्या असर

मुरादाबाद मंडल के गन्ना किसान इस बार पेराई सत्र से पहले एक ही बात को लेकर चिंतित थे — खेत में गन्ना तो खड़ा है, लेकिन मिल तक पहुंचेगा या नहीं? मंडल में इस बार गन्ने के रकबे में कमी आई है, और मिलें अपनी पेराई क्षमता के हिसाब से गन्ना नहीं जुटा पा रही थीं। इसी चिंता का जवाब शासन ने एक बड़े आदेश से दिया है। मेरठ और बरेली मंडल की चीनी मिलों के क्षेत्र से काटकर मुरादाबाद मंडल की सात चीनी मिलों को कुल 110.52 लाख क्विंटल अतिरिक्त गन्ना आवंटित किया गया है। यह आवंटन गन्ना सुरक्षण आदेश के तहत हुआ है, और गन्ना खरीद के लिए 76 क्रय केंद्र भी तय कर दिए गए हैं।
आदेश की बड़ी बातें
उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह के अनुसार, मेरठ मंडल की सिम्भावली चीनी मिल के क्षेत्र से छह मिलों को गन्ना दिया गया है, जबकि सातवीं मिल को बरेली मंडल के क्षेत्र से गन्ना मिलेगा। किस मिल को कितना गन्ना और कितने केंद्र मिले, यह सूची इस तरह है:
मेरठ मंडल (सिम्भावली चीनी मिल के क्षेत्र से):
- चांगीपुर चीनी मिल, बिजनौर — 30.38 लाख क्विंटल गन्ना, 23 क्रय केंद्र
- रजपुरा चीनी मिल, संभल — 14.82 लाख क्विंटल गन्ना, 12 क्रय केंद्र
- अगवानपुर चीनी मिल, मुरादाबाद — 14.62 लाख क्विंटल गन्ना, 10 क्रय केंद्र
- असमोली चीनी मिल — 12.94 लाख क्विंटल गन्ना, 7 क्रय केंद्र
- मझावली चीनी मिल — 12.44 लाख क्विंटल गन्ना, 10 क्रय केंद्र
- चंदनपुर चीनी मिल, अमरोहा — 9.30 लाख क्विंटल गन्ना, 5 क्रय केंद्र
बरेली मंडल से:
- मिलक नरायनपुर चीनी मिल, रामपुर — बहेड़ी चीनी मिल के क्षेत्र से 17.48 लाख क्विंटल गन्ना, 9 क्रय केंद्र
अमर उजाला की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, सातों मिलों के लिए कुल 110.52 लाख क्विंटल गन्ना और 76 क्रय केंद्र आरक्षित किए गए हैं। शासन की कोशिश है कि अक्टूबर के अंत तक मिलों का संचालन शुरू हो जाए।
यह फैसला क्यों जरूरी हुआ
इस फैसले के पीछे तीन वजहें हैं। पहली, मुरादाबाद मंडल में गन्ने का रकबा घटा है, जिससे मिलों की पेराई क्षमता के अनुरूप गन्ना जुटाना मुश्किल हो रहा था। दूसरी, चीनी के बढ़ते दामों पर अंकुश के लिए शासन चाहता है कि पेराई समय से शुरू हो, ताकि बाजार में नई चीनी की आपूर्ति बनी रहे। तीसरी वजह किसानों को गन्ना मूल्य का समय से भुगतान दिलाना है — पेराई जितनी देर से शुरू होगी, भुगतान की कतार उतनी लंबी होगी।
14 अक्टूबर को उप गन्ना आयुक्त ने बताया था कि परिक्षेत्र की चीनी मिलों में उस दिन 12.91 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक उपलब्ध था, जो त्योहारी सीजन की मांग के हिसाब से पर्याप्त है। मिलें सरकार से आवंटित कोटे के हिसाब से 4,500 से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चीनी बेच रही थीं। यानी स्टॉक तो था, लेकिन नई पेराई शुरू होना जरूरी था, वरना आगे बाजार में किल्लत दिख सकती थी।
मेरठ-बरेली के किसानों पर क्या असर पड़ेगा
जिन क्षेत्रों को काटकर यह गन्ना दिया गया है, वहां के किसानों का गन्ना अब नई मिलों को जाएगा — पर्ची नई मिल से आएगी और तौल नए क्रय केंद्रों पर होगा। सिम्भावली और बहेड़ी चीनी मिल के क्षेत्र के किसान अपनी गन्ना समिति से नई जानकारी जरूर लें।
यहां एक अहम बात जागरण की रिपोर्ट से सामने आई है — जिन मिलों का क्षेत्र काटा गया, उनकी भुगतान स्थिति पहले से खराब रही है; बरेली की बहेड़ी चीनी मिल तो बंद होने के कगार पर है। ऐसे में उन क्षेत्रों के किसानों को अब चालू मिलों से जुड़ने का मौका मिलेगा। बदलाव हित में होगा, बशर्ते सट्टा परिवर्तन और पर्ची वितरण में देरी न हो।
किसान अभी क्या करें
- अपना नया क्रय केंद्र पता करें — 76 केंद्रों की सूची जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय और अपनी गन्ना समिति से मिलेगी। जान लें कि आपका गन्ना अब किस मिल और किस केंद्र से जुड़ा है।
- सट्टा और पर्ची की स्थिति जांचें — आवंटन बदलने के बाद सट्टा-परिवर्तन में कुछ दिन लग सकते हैं। पर्ची मिलने से पहले कटाई शुरू न करें।
- बैंक खाता और आधार लिंकेज दुरुस्त रखें — गन्ना मूल्य सीधे खाते में आता है, इसलिए सक्रिय खाता और लिंकेज अभी से जांच लें।
- ताजा गन्ना ही भेजें — कटाई के 24 घंटे के भीतर गन्ना केंद्र पहुंचाएं। देरी से वजन घटता है, नुकसान आपके भुगतान पर पड़ता है।
मुख्य बातें
- शासन ने मेरठ-बरेली के मिल क्षेत्रों से मुरादाबाद मंडल की 7 चीनी मिलों को 110.52 लाख क्विंटल गन्ना और 76 क्रय केंद्र आवंटित किए हैं।
- चांगीपुर (बिजनौर) को सबसे ज्यादा — 30.38 लाख क्विंटल गन्ना और 23 केंद्र; अक्टूबर अंत तक पेराई सत्र 2026-27 शुरू करने की तैयारी है।
- मेरठ-बरेली के जिन क्षेत्रों का गन्ना अब नई मिलों को जाएगा, वहां के किसानों को पर्ची और केंद्र की नई जानकारी लेनी होगी।
स्रोत: दैनिक जागरण (22 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (23 अक्टूबर 2026), वार्ता न्यूज एजेंसी (14 अक्टूबर 2026)।
