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मुरादाबाद के किसान का हिसाब: 1 बीघे में ₹18,870 खर्च, बचत सिर्फ ₹5,130

✍️ Aamir Raza · 🗓 22 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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मुरादाबाद के किसान का हिसाब: 1 बीघे में ₹18,870 खर्च, बचत सिर्फ ₹5,130

₹5,130. ये एक साल की मेहनत का शुद्ध नतीजा है, अगर आप मुरादाबाद में एक बीघा गन्ना लगाते हैं।

जुताई, बुवाई, खाद, दवा, सिंचाई, बांधाई, छिलाई और ढुलाई समेत हर खर्च जोड़ने के बाद ये आंकड़ा मुरादाबाद के छजलैट ब्लाक के संदलीपुर गांव के प्रगतिशील किसान गौरव कुमार ने सामने रखा है। उनके पास करीब 150 बीघा जमीन है और गन्ने की खेती का उनका ये गणित उन तमाम किसानों की हालत बताता है, जो बढ़ती लागत और ठहरी पैदावार के बीच फंसे हैं।

कहां खर्च हो रहे हैं ₹18,870

गौरव कुमार ने एक बीघा खेत का खर्च मदवार गिनाया है। चार बार जुताई पर ₹1,000, पलेवा पर ₹170 और गोबर की खाद पर ₹3,000 लगते हैं। चार क्विंटल बीज ₹1,600 का पड़ता है। एनपीके खाद और दवा पर ₹700, बुवाई पर ₹500 और कोराजन पर ₹300 खर्च होते हैं।

चार बार निराई-गुड़ाई में ₹2,000 और नौ बार सिंचाई में ₹1,500 निकल जाते हैं। दो बार गन्ना बांधने पर ₹900 और यूरिया पर ₹300 लगते हैं। फसल तैयार होने के बाद 60 क्विंटल गन्ने की छिलाई पर ₹3,300 और ढुलाई पर ₹3,000 देने पड़ते हैं।

इन सबको जोड़ें तो कुल लागत ₹18,870 बैठती है।

60 क्विंटल पैदावार के बाद भी बचे ₹5,130

गणित सीधा है। अच्छी पैदावार मान लें, तो एक बीघे में करीब 60 क्विंटल गन्ना निकलता है। ₹400 प्रति क्विंटल के भाव पर ये बिके तो कुल ₹24,000 हाथ आते हैं।

₹24,000 में से ₹18,870 का खर्च निकालें, तो शुद्ध बचत रह जाती है ₹5,130। ये ₹400 प्रति क्विंटल का भाव किसान के अपने हिसाब का आधार है। भाव की वास्तविक स्थिति नीचे दी गई है।

यानी सालभर खेत में पसीना बहाने के बाद एक बीघे से किसान के हिस्से पांच हजार से कुछ ज्यादा बचता है। और ये तब, जब मौसम साथ दे, पैदावार पूरी हो और भुगतान समय पर मिले।

पैदावार क्यों घट रही है

गौरव कुमार बताते हैं कि कभी 0238 प्रजाति के गन्ने से बढ़िया पैदावार होती थी, लेकिन लाल सड़न रोग ने इस किस्म को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया। अब किसान दूसरी किस्मों की ओर मुड़ रहे हैं, पर उनसे अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल रहा।

बीज भी लगातार महंगा हो रहा है। कुचावली के किसान राहुल कुमार का कहना है कि खाद, बीज, दवा, सिंचाई और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है, इसलिए गन्ने का मूल्य तय करते समय पुरानी लागत को आधार बनाना किसानों के हित में नहीं है।

लदावली के नेत्रपाल सिंह कहते हैं कि गन्ने की खेती में सालभर मेहनत लगती है और फसल तैयार होने के बाद छिलाई-ढुलाई का खर्च भी कम नहीं। शाहपुर मुबारिकपुर के उमेश कुमार के मुताबिक नई किस्मों से उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप न मिलने से बचत प्रभावित हो रही है।

गन्ने के भाव की ताजा स्थिति

केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सीजन (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए गन्ने का एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। ये 10.25 प्रतिशत की मूल रिकवरी दर पर आधारित है और सरकार ने उत्पादन लागत ₹182 प्रति क्विंटल आंकी है।

उत्तर प्रदेश की ओर से इस सीजन के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। किसान संगठन इसे लेकर दबाव बनाए हुए हैं। किसान स्वाभिमान संगठन ने अगस्त में ही ज्ञापन भेजकर गन्ने का लाभकारी मूल्य ₹550 प्रति क्विंटल करने की मांग की थी। संगठन के मुताबिक एक बीघा गन्ने की खेती में करीब ₹18 से ₹20 हजार तक लागत आ रही है, जो मुरादाबाद के किसान के ₹18,870 के हिसाब से मेल खाती है।

अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई बैठक में किसानों ने रिकवरी, तौल और वजन में कटौती के मुद्दे भी उठाए थे। सरकार ने एक हफ्ते में हाईलेवल कमेटी बनाने का भरोसा दिया था। कर्नाटक शुगरकेन ग्रोअर्स एसोसिएशन भी समर्थन मूल्य कम से कम ₹550 प्रति क्विंटल की मांग कर रहा है।

किसान के लिए इसका मतलब क्या है

पहली बात तो ये कि भाव तय करते समय अपनी लागत का हिसाब कागज पर रखें। मुरादाबाद के इस ब्रेकअप से अंदाजा लग जाता है कि छिलाई और ढुलाई अकेले ₹6,300 का खर्च है। जो किसान पेड़ी की फसल रखते हैं, उनकी बुवाई की लागत बचती है, पर पेड़ी की पैदावार भी कम होती है।

दूसरी बात, बीज की किस्म का चुनाव अब सबसे अहम फैसला है। लाल सड़न से प्रभावित 0238 जैसी किस्मों की जगह रोग-प्रतिरोधी किस्में ही लंबी दूरी में फायदा देंगी, भले ही बीज शुरू में महंगा लगे।

तीसरी बात, गन्ना मूल्य से जुड़ी हर घोषणा पर नजर रखें। इस सीजन का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है और भाव की अंतिम स्थिति उसी से तय होगी। मिल से पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान की रसीद संभालकर रखें। भुगतान में देरी हो तो यही कागज काम आएंगे।

मुख्य बातें

  • मुरादाबाद के किसान के हिसाब से 1 बीघा गन्ने की कुल लागत ₹18,870 बैठती है।
  • 60 क्विंटल पैदावार ₹400 के भाव से बिके तो शुद्ध बचत सिर्फ ₹5,130 रहती है।
  • केंद्र ने 2026-27 के लिए FRP ₹365/क्विंटल तय किया है; यूपी के SAP की घोषणा अभी बाकी है।

स्रोत: दैनिक जागरण (मुरादाबाद, 21 अक्टूबर 2026), किसान तक (13 अक्टूबर 2026), राजसत्ता पोस्ट (30 अगस्त 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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