मोदीनगर मोदी मिल में 4 नवंबर से पेराई, 95 लाख क्विंटल का लक्ष्य

गाजियाबाद जिले के मोदीनगर क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए इंतजार खत्म होने वाला है। मोदी चीनी मिल में पेराई सत्र 2026-27 का औपचारिक शुभारंभ 4 नवंबर से होगा। मिल प्रबंधन ने इस सत्र के लिए 95 लाख क्विंटल गन्ना पेरने का लक्ष्य रखा है। हवन-पूजन के साथ सत्र की शुरुआत पहले ही हो चुकी है, अब गन्ने की नियमित आवक और तौल का दौर शुरू होगा।
यह खबर उन हजारों किसानों के लिए सीधी राहत है जो पर्ची और केंद्र खुलने का इंतजार कर रहे थे। पेराई शुरू होते ही खेत खाली होंगे और गेहूं की बुवाई का रास्ता साफ होगा।
हवन-पूजन से हुई सत्र की शुरुआत
नए सत्र की शुरुआत शनिवार को हवन-पूजन के साथ हुई। इस मौके पर उपजिलाधिकारी कोमल पंवार, सहकारी गन्ना समिति के चेयरमैन राजन चौधरी, ब्लॉक प्रमुख सुचेता सिंह, उमेश मोदी ग्रुप के सीईओ एनपी बंसल और मिल के उपाध्यक्ष वेदपाल मलिक मौजूद रहे। क्षेत्र के किसानों के साथ केन कैरियर में गन्ना डालकर सत्र का शुभारंभ किया गया।
शुरुआती दिन की एक छोटी सी परंपरा भी किसानों के बीच चर्चा में रही। जलालाबाद गांव के किसान श्योराज सिंह को पहली ट्रैक्टर-ट्रॉली से गन्ना आपूर्ति करने पर प्रथम पुरस्कार दिया गया। सीकरी कलां गांव के किसान सुरेंद्र को दूसरा पुरस्कार मिला। उपजिलाधिकारी ने इस मौके पर बीते पेराई सत्र 2025-26 का संपूर्ण भुगतान करने के लिए मिल प्रबंधन की प्रशंसा की। ## 28,500 किसान, 75 केंद्र, 21,000 हेक्टेयर रकबा
इस बार मोदी मिल से जुड़े किसानों की संख्या बढ़कर 28,500 हो गई है। पहले यह संख्या 28,000 थी, यानी 500 नए किसान इस सत्र में जुड़े हैं। दूसरी तरफ गन्ने के कुल रकबे में 500 हेक्टेयर की कमी आई है और अब क्षेत्र में कुल रकबा करीब 21,000 हेक्टेयर रह गया है।
केंद्रों की संख्या भी बढ़ी है। पहले मोदी मिल के 70 केंद्र संचालित थे, अब इसमें पांच केंद्र और जुड़ गए हैं। भिक्कनपुर, भनेड़ा, रावली, फजलगढ़ और नूरपुर गांव के केंद्र अब इसी मिल से जुड़े हैं। इन गांवों के किसानों को अब अपनी पर्ची और तौल की व्यवस्था मोदी मिल के जरिए मिलेगी।
रकबा घटने की एक वजह पिछले एक महीने से क्षेत्र में चल रहे क्रेशर भी बताए जा रहे हैं। क्रेशर पर गन्ना जाने से मिल के लिए उपलब्ध गन्ना कम होता है। यही वजह है कि 95 लाख क्विंटल का लक्ष्य पूरा करने के लिए मिल को शुरुआत से ही नियमित आवक बनाए रखनी होगी। किसानों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि पर्ची मिलने पर गन्ना रोककर रखने के बजाय तय समय पर केंद्र पहुंचाना फायदेमंद रहेगा।
भाव का सवाल अभी खुला है
पेराई शुरू हो रही है, मगर गन्ने का नया भाव अभी घोषित नहीं हुआ है। 2026-27 के लिए राज्य सरकार की ओर से SAP की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती प्रजाति का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल और पछेती का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है।
यहां एक बात साफ रखनी जरूरी है। जब तक नया भाव घोषित नहीं होता, तब तक पिछले सत्र का भाव ही संदर्भ के तौर पर रहेगा, नया भाव नहीं माना जाएगा। इसलिए पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखना इस सत्र में भी उतना ही जरूरी है।
पश्चिमी यूपी में पेराई का माहौल
मोदीनगर अकेला नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 अक्टूबर के आखिर से ही रफ्तार पकड़ रहा है। मलकपुर मिल से शुरुआत के बाद नवंबर के पहले सप्ताह में ज्यादातर मिलों के चालू होने की उम्मीद जताई गई है। प्रदेश स्तर पर 4 नवंबर तक 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है।
इस माहौल में मोदीनगर के किसानों को फायदा यह है कि मिल का पिछला भुगतान साफ है। अब असली परीक्षा शुरुआती हफ्तों में तौल की पारदर्शिता और पर्ची के समय पर मिलने से होगी।
किसान के लिए इस हफ्ते के काम
पर्ची मिली है तो पहले उसका केंद्र, तारीख और समय ध्यान से देख लें। ट्रॉली भरने से पहले गन्ना साफ-सुथरा रखें, सूखी पत्ती और मिट्टी कम से कम हो। तौल के समय तौल पर्ची हाथ में ही लें और उस पर दर्ज वजन को मौके पर ही मिलान कर लें। कोई गड़बड़ लगे तो उसी समय केंद्र प्रभारी से बात करें, बाद में शिकायत करना मुश्किल होता है।
भिक्कनपुर, भनेड़ा, रावली, फजलगढ़ और नूरपुर के किसान अपनी नई पर्ची की जानकारी पहले से पक्की कर लें, गलत केंद्र पर ट्रॉली पहुंचने से समय और किराया दोनों का नुकसान होता है।
मोदी मिल का 95 लाख क्विंटल का लक्ष्य बड़ा है, मगर यह तभी पूरा होगा जब किसान और मिल दोनों अपने-अपने हिस्से का काम समय पर करेंगे। 4 नवंबर से शुरू हो रही पेराई मोदीनगर के किसानों के लिए नए सत्र की असली शुरुआत है।
मुख्य बातें
- मोदीनगर मोदी चीनी मिल में पेराई सत्र 2026-27 का औपचारिक शुभारंभ 4 नवंबर से होगा, लक्ष्य 95 लाख क्विंटल है।
- मिल से 28,500 किसान जुड़े हैं और केंद्रों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है, जबकि रकबा करीब 21,000 हेक्टेयर है।
- बीते सत्र 2025-26 का भुगतान पूरा हो चुका है, लेकिन 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है।
स्रोत: अमर उजाला, 1 नवंबर 2026; अमर उजाला, 27-28 अक्टूबर 2026; नवभारत टाइम्स, 30 अक्टूबर 2026।
