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मोदी मिल में 31 अक्टूबर से पेराई: 28,500 किसानों को पर्चियां मिलनी शुरू

✍️ Aamir Raza · 🗓 29 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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मोदी मिल में 31 अक्टूबर से पेराई: 28,500 किसानों को पर्चियां मिलनी शुरू

मोदीनगर के गन्ना किसानों के लिए तारीख तय हो गई है। मोदी शुगर मिल 31 अक्टूबर से पेराई सत्र 2026-27 का शुभारंभ करने जा रही है। खास बात यह है कि इस बार मिल पिछले साल के मुकाबले एक दिन पहले चल रही है। पिछले साल मिल का संचालन 1 नवंबर से शुरू हुआ था। किसानों को पर्चियां बांटने का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि सत्र के पहले दिन से ही गन्ने की तौल और आवक बिना रुकावट के चल सके।

अमर उजाला की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक मिल प्रबंधन ने मेंटेनेंस और ओवरहालिंग समेत सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं, और 31 अक्टूबर को उद्घाटन व पूजन कार्यक्रम की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। अब किसान के लिए असली सवाल यही है कि उसकी पर्ची, उसका केंद्र और उसकी तारीख सही है या नहीं।

28,500 किसान, 500 नए चेहरे जुड़े

जिला गन्ना अधिकारी के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक इस बार मिल से जुड़े किसानों की कुल संख्या 28,500 हो गई है। पहले यह संख्या 28,000 थी। इस सत्र में 500 नए किसान मिल से जुड़े हैं। यह बढ़ोतरी बताती है कि क्षेत्र में गन्ने की खेती से जुड़ाव कम नहीं हुआ है, बल्कि नए किसान भी इस फसल की ओर आ रहे हैं।

दूसरी ओर गन्ने के कुल रकबे में 500 हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है। अब क्षेत्र में कुल रकबा करीब 21,000 हेक्टेयर रह गया है। किसान संख्या बढ़ना और रकबा घटना एक साथ सामने आए हैं, यानी औसतन हर किसान के हिस्से में गन्ने का रकबा थोड़ा कम हुआ है।

पर्ची मिली तो सबसे पहले ये तीन बातें देखें

पर्ची हाथ में आते ही किसान को तीन चीजें जरूर मिलान कर लेनी चाहिए। पहली, पर्ची पर लिखा क्रय केंद्र वही है जहां वह गन्ना ले जाना चाहता है। दूसरी, पर्ची पर दर्ज तारीख और इंडेंट की तारीख एक है। तीसरी, पर्ची पर किसान का नाम और सट्टा विवरण सही है। अगर इनमें से किसी बात में गड़बड़ लगे तो तुरंत समिति या मिल के संबंधित कर्मचारी से संपर्क करें। सत्र शुरू होने के बाद सुधार कराना मुश्किल हो जाता है।

पर्ची को संभालकर रखना भी उतना ही जरूरी है। पर्ची ही वह कागज है जिससे तौल, भुगतान और बाद में किसी विवाद की स्थिति में किसान का हक तय होता है। पर्ची की एक फोटो मोबाइल में रख लेना समझदारी है, ताकि कागज खराब होने या गुम होने पर भी विवरण हाथ में रहे।

तौल के दिन किसान को अपना गन्ना पर्ची पर दर्ज केंद्र और तारीख के हिसाब से ही पहुंचाना चाहिए। पर्ची के क्रम के हिसाब से गन्ना काटना भी फायदेमंद रहता है, क्योंकि कटा हुआ गन्ना ज्यादा दिन खेत में पड़ा रहे तो वजन घटता है।

क्रेशर पहले से चल रहे हैं, मिल के सामने रहेगी आपूर्ति की चुनौती

मोदी मिल के सामने इस सत्र की एक बड़ी चुनौती गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है। रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र में पिछले एक महीने से गन्ना क्रेशर संचालित हो रहे हैं, जिसके कारण गन्ने का काफी क्षेत्रफल पहले ही कम हो चुका है। क्रेशर पर गन्ना बेचने वाले किसानों को भले ही तुरंत नकद मिल जाता हो, लेकिन मिल की पेराई के लिए गन्ना कम पड़ने का असर पूरे क्षेत्र की व्यवस्था पर पड़ता है।

यह बात किसानों के लिए भी सोचने वाली है। क्रेशर पर गन्ना बेचने से पहले यह जरूर देख लें कि मिल की पर्ची और भुगतान की व्यवस्था क्या दे रही है। मिल से जुड़े रहने पर भुगतान का रिकॉर्ड, सट्टा और अगले सत्र की पर्ची एक सिलसिले में चलती है, जबकि क्रेशर पर एक बार का सौदा इस सिलसिले से बाहर होता है।

पूरे प्रदेश में पेराई का माहौल बन रहा है

मोदी मिल अकेली नहीं है जो अक्टूबर के आखिरी दिनों में चल रही है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के मुताबिक देश में 2026-27 का चीनी सीजन तय समय पर शुरू हो गया है और अब तक 107 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है। इनमें महाराष्ट्र में करीब 87 मिलें हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में अब तक दो मिलें चालू हो चुकी हैं। संगठन के अनुसार 25 अक्टूबर तक चालू सीजन में करीब 4 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक लगभग 60 हजार टन उत्पादन हुआ था। पिछला सीजन खत्म होने पर देश के पास करीब 36 लाख टन चीनी का स्टॉक बचा था।

पास के मेरठ जिले में भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। दैनिक जागरण की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ की छह चीनी मिलों में मरम्मत कार्य पूरा होने के करीब है। किनौनी मिल 1 नवंबर से, मवाना, नंगलामल और दौराला 2 नवंबर से, जबकि मोहिउद्दीनपुर और सकौती 4 नवंबर से पेराई शुरू करेंगी। यानी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान के लिए अगले एक हफ्ते में लगभग हर मिल के गेट खुल जाएंगे।

मोदी मिल के किसानों के लिए 31 अक्टूबर की तारीख इसलिए भी अहम है क्योंकि यह क्षेत्र की सबसे पहले चलने वाली मिलों में से एक है। जल्दी पेराई शुरू होने से पर्ची वाले किसानों का गन्ना जल्दी उठेगा, खेत जल्दी खाली होगा और रबी की तैयारी के लिए समय मिल जाएगा।

मुख्य बातें

  • मोदी शुगर मिल, मोदीनगर में 31 अक्टूबर से पेराई सत्र 2026-27 शुरू होगा, पिछले साल से एक दिन पहले।
  • मिल से जुड़े किसानों की संख्या बढ़कर 28,500 हुई, जबकि गन्ना रकबा घटकर करीब 21,000 हेक्टेयर रह गया।
  • किसानों को पर्चियां बांटी जा रही हैं; पर्ची पर केंद्र, तारीख और सट्टा विवरण पहले ही मिलान कर लें।

स्रोत: अमर उजाला (27 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (27 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस / बिजनेस स्टैंडर्ड (ISMA आंकड़े, अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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