मिट्टी जांच कराओ, खाद की आधी बोरी बचेगी: गन्ना किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड गाइड

हर साल बुआई से पहले दुकानदार यूरिया-डीएपी की बोरी गिनकर बता देता है कि इतनी लगेंगी। किसान पैसे चुका देता है, बोरी खेत में छिड़क देता है। सवाल कभी नहीं उठता कि क्या सच में खेत को इतनी ही खाद चाहिए? कुछ खेतों में फास्फोरस पहले से भरा पड़ा है, कुछ में जिंक की कमी है जो उपज खींचे चली जाती है। अंधाधुंध खाद डालना पैसा तो फूंकता ही है, धीरे-धीरे मिट्टी को भी खोखला कर देता है। एक कागज है जो यह पूरा हिसाब साफ कर देता है, मृदा स्वास्थ्य कार्ड। जांच कराओ, जानो कि खेत में असली कमी कहां है, फिर उसी के हिसाब से खाद डालो।
कार्ड बताएगा कि खेत के अंदर क्या चल रहा है
मृदा स्वास्थ्य कार्ड दरअसल आपके खेत की खून की रिपोर्ट है। इसमें मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ जैविक कार्बन की स्थिति लिखी रहती है। द्वितीयक तत्वों में सल्फर और सूक्ष्म पोषक तत्वों में जिंक, तांबा, लोहा, मैंगनीज और बोरॉन की जांच भी इसमें शामिल होती है। यही वे तत्व हैं जो गन्ने की टिलरिंग, मोटाई और चीनी के परते को तय करते हैं। कार्ड में यह भी लिखा रहता है कि किस फसल के लिए कौन सी खाद कितनी मात्रा में डालनी चाहिए। एक बार कार्ड बन गया तो यह तीन साल तक वैध रहता है। तीन साल तक आपको अंदाजे से खाद नहीं डालनी पड़ेगी।
अमेठी के मृदा स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आलोक मौर्य बताते हैं कि कार्ड मिलने के बाद किसान जान जाता है कि खेत को कब, कितनी और कौन सी खाद चाहिए। जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालने की समस्या इसी से खत्म होती है। बात बिल्कुल सीधी है। जो कमी है, वही भरो। जो भरा है, उस पर पैसा मत बर्बाद करो।
नमूना लेने की विधि गलत तो रिपोर्ट बेकार
कार्ड सही बने, इसके लिए नमूना सही तरीके से लेना जरूरी है। यह काम जल्दबाजी में नहीं होता। खेत की अलग-अलग जगहों से 15 से 20 जगह खुदाई करो। मेड़ के किनारे, नाली के पास या गोबर-खाद के गड्ढे के नजदीक से मिट्टी मत लो, वहां की मिट्टी पूरे खेत का हिसाब नहीं देती। हर जगह से 6 से 8 इंच गहराई तक खोदकर मिट्टी निकालो। ऊपरी सतह की मिट्टी हटा दो, नीचे वाली ही लो।
इन सारे नमूनों को एक साथ किसी साफ बोरी या तसले में मिला दो। इसमें से करीब आधा किलो मिट्टी साफ प्लास्टिक की थैली में भर लो। थैली पर कागज की पर्ची लगाकर अपना नाम, गांव, फसल का नाम और खेत की जानकारी लिख दो। यह पर्ची रिपोर्ट को सही किसान तक पहुंचाने का एकमात्र जरिया है, इसे हल्के में मत लो।
एक बात और। जिस खेत में अभी-अभी खाद डाली हो या जिस दिन भारी बारिश हुई हो, उस दिन नमूना मत लो। फसल कटने के बाद और अगली बुआई की तैयारी के बीच का समय नमूना लेने के लिए सबसे ठीक रहता है।
नमूना कहां जमा करें, खर्च कितना आएगा
नमूना अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या उप कृषि निदेशक के कार्यालय में जमा कर दो। जांच में करीब पांच दिन लगते हैं। हाईटेक मशीनों से पूरी जांच करके रिपोर्ट तैयार होती है और कार्ड जारी हो जाता है।
अच्छी खबर यह है कि कई जिलों में यह जांच बिल्कुल निशुल्क हो रही है। हमीरपुर में कृषि विभाग ने इस साल सभी नमूनों की जांच फ्री की है और पिछले साल करीब 7,000 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे गए थे। अगर आपके जिले में निशुल्क अभियान न भी चल रहा हो, तो खुद नमूना देकर नाममात्र शुल्क पर जांच कराई जा सकती है। केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट soilhealth.dac.gov.in पर भी इससे जुड़ी जानकारी मिलती है।
कार्ड आ जाए तो खाद का हिसाब बदल डालो
यह गाइड का सबसे काम का हिस्सा है। कार्ड में आई कमी को देखकर खाद की मात्रा तय करो। अगर फास्फोरस पर्याप्त है तो डीएपी कम लगाओ। जिंक कम है तो जिंक सल्फेट डालो, क्योंकि कई गन्ना खेतों में जिंक की कमी टिलरिंग सीधे घटा देती है।
रायबरेली में भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ और कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर ने संयुक्त प्रशिक्षण में किसानों को यही सीख दी थी। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश दुबे ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता लगातार घट रही है। उन्होंने किसानों को रासायनिक खाद के साथ जैविक खाद का नियमित प्रयोग करने की सलाह दी, जिससे उर्वरकों की उपयोग क्षमता बढ़ती है। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. एस. वी. सिंह ने एनपीके के साथ जिंक, सल्फर, बोरॉन और कैल्शियम जैसे सूक्ष्म तत्वों पर भी जोर दिया। एक खास सलाह याद रखो, जलभराव या तेज बारिश के दौरान यूरिया मत डालो, क्योंकि उसमें नाइट्रोजन का नुकसान होता है। पैसे भी गए, फायदा भी नहीं।
एक बार जांच से तीन साल का हिसाब
कार्ड तीन साल चलता है, पर आंख बंद करके रखा मत रहो। अगर इस दौरान फसल चक्र बदला है, जैसे धान के बाद गन्ना लगाया है, या किसी प्लॉट की उपज लगातार गिर रही है, तो दोबारा जांच करा लो। मिट्टी जिंदा चीज है, हर फसल के बाद उसकी जरूरतें बदलती हैं।
और एक बात, गन्ने की पत्तियों को जलाने से भी मिट्टी की ताकत घटती है। पत्तियों को खेत में ही समाहित करो, इससे पोषक तत्व मिट्टी में वापस लौटते हैं। मिट्टी जांच और अवशेष प्रबंधन साथ चलें तो खाद का खर्च घटेगा और उपज भी बढ़ेगी।
मुख्य बातें
- खेत की 15-20 जगह से 6-8 इंच गहरी मिट्टी लेकर आधा किलो नमूना बनाओ; मेड़, नाली और खाद के गड्ढे के पास से मिट्टी मत लो।
- नजदीकी KVK या उप कृषि निदेशक कार्यालय में नमूना जमा करो; कई जिलों में जांच निशुल्क, 5 दिन में रिपोर्ट और कार्ड 3 साल तक वैध।
- कार्ड के हिसाब से यूरिया-डीएपी-पोटाश संतुलित करो; जिंक-सल्फर-बोरॉन की कमी भी पकड़ में आएगी, और जलभराव में यूरिया डालने से बचो।
स्रोत: News18 हिंदी — अमेठी मृदा स्वास्थ्य कार्ड गाइड (दिसंबर 2025); Kisan India — हमीरपुर निशुल्क मृदा जांच अभियान; ChiniMandi — रायबरेली संतुलित उर्वरक प्रशिक्षण, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ (2026)।
