खेती गाइड

मिल में गन्ना रिजेक्ट हुआ तो पैसा डूबेगा: कटौती से बचने के 7 पक्के काम

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 25 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

Google पर हमें फ़ॉलो करें
मिल में गन्ना रिजेक्ट हुआ तो पैसा डूबेगा: कटौती से बचने के 7 पक्के काम

ट्रॉली केंद्र पर लग चुकी थी। मजदूरों ने गन्ना काटा था, सुबह लादकर भेजा था, और तौल के वक्त केंद्र के आदमी ने हाथ उठाकर रोक दिया। गन्ने में सूखी पत्ती ज्यादा थी, कुछ गन्ने टूटे हुए थे और ऊपर मिट्टी लगी हुई थी। ट्रॉली वापस तो नहीं हुई, पर तौल में कटौती लग गई। उसी गाँव के दूसरे किसान की साफ ट्रॉली बिना झंझट तुल गई। फर्क किस्मत का नहीं, खेत से शुरू होने वाली तैयारी का था।

पेराई सीजन 2026-27 में यूपी की 122 चीनी मिलें गन्ना लेंगी। हर केंद्र पर एक ही उसूल है। मिल को साफ और ताजा गन्ना चाहिए। जो गन्ना इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, उस पर कटौती लगती है या उसे वापस भी किया जा सकता है। ये सारी गलतियाँ खेत पर ही सुधारी जा सकती हैं।

सूखी पत्ती और अगोला खेत पर ही अलग करें

सबसे आम वजह सूखी पत्ती है। कटा हुआ गन्ना जब पत्ती समेत लादा जाता है, तो तौल में पत्ती का वजन भी आ जाता है। केंद्र पर इसे अलग किया जाता है या इसका वजन काटा जाता है। इसलिए कटाई के वक्त ही मजदूरों को साफ कह दें कि सूखी पत्ती और अगोला गन्ने के साथ नहीं बँधेगा।

अगोला यानी गन्ने का ऊपर का हरा नरम हिस्सा भी मिल के काम का नहीं होता। उसे अलग करके पशुओं के चारे में इस्तेमाल कर लें। ट्रॉली लादने से पहले एक बार खुद देख लें। पत्ती दिखे तो वहीं उतरवाकर साफ करवाएँ।

टूटा, सड़ा और रोग वाला गन्ना अलग बाँधें

कटाई में कुछ गन्ने टूट जाते हैं, कुछ में सड़न या रोग के धब्बे होते हैं। इन्हें अच्छे गन्ने के साथ मिलाकर भेजना सबसे बड़ी गलती है। एक खराब बंडल पूरी ट्रॉली की छवि खराब कर देता है और केंद्र वाले को कटौती का मौका दे देता है।

नियम सीधा रखें। टूटा हुआ ताजा गन्ना अलग बंडल में बाँधें। सड़ा या रोग से खराब गन्ना मिल के गन्ने में बिल्कुल न मिलाएँ। मजदूरों को पहले से बता दें कि खराब गन्ना छिपाना नहीं, अलग करना है। छिपाया हुआ खराब गन्ना पकड़े जाने पर हर ट्रॉली की जाँच सख्त हो जाती है।

कटा गन्ना खेत में मत सड़ने दें

कटा हुआ गन्ना धूप और हवा में सूखता है। वजन घटता है और रस की गुणवत्ता भी गिरती है। इसलिए कटाई और ढुलाई के बीच का अंतर जितना कम हो, उतना अच्छा। जिस दिन कटाई हो, उसी दिन ट्रॉली लगाने की कोशिश करें। ट्रॉली अगले दिन लग रही हो तो कटे गन्ने को छाँव में बंडल बनाकर रखें। बिखरा गन्ना ज्यादा सूखता है, बंडल में नमी कुछ देर टिकती है और लदाई भी तेज होती है।

ट्रॉली में मिट्टी, पत्थर और कचरा न जाने दें

खेत से ट्रॉली तक का रास्ता भी गन्ने की किस्मत तय करता है। कीचड़ भरे रास्ते से लदा गन्ना अक्सर मिट्टी के साथ केंद्र पहुँचता है। लदाई के वक्त नीचे बिछी मिट्टी और पत्थर भी ट्रॉली में आ जाते हैं। केंद्र पर ये सब चीजें वजन से अलग की जाती हैं।

लदाई से पहले ट्रॉली का तला साफ करवा लें। मिट्टी वाला हिस्सा झाड़कर ही ऊपर रखें। किनारों से बाहर लटके गन्ने को ठीक से बाँधें, ताकि रास्ते में गन्ना गिरे नहीं। ड्राइवर को धीमी और संभलकर चलने के लिए पहले से कह दें।

तौल के वक्त खुद मौजूद रहें

तौल का सबसे पक्का बचाव आपकी अपनी मौजूदगी है। खाली ट्रॉली का वजन, भरी ट्रॉली का वजन और पर्ची पर छपा वजन, तीनों आँकड़े अपनी आँखों से देखें। पर्ची मिलने के बाद तुरंत जाँचें कि नाम, ट्रॉली, वजन और तारीख ठीक हैं या नहीं। गलती उसी वक्त पकड़ी जाए तो सुधरती है।

तौल से पहले और बाद में ट्रॉली की फोटो खींच लें। फोटो में गन्ने की हालत और ट्रॉली का नंबर दिखना चाहिए। यह आपका रिकॉर्ड है। वजन को लेकर सवाल उठे तो आपके पास उसी दिन का सबूत होगा।

पर्ची, सट्टा और समिति का मिलान पहले कर लें

कई बार गड़बड़ गन्ने में नहीं, कागज में होती है। पर्ची किसी और के नाम की हो या सट्टा किसी और खेत का हो, तो तौल के वक्त रुकावट आती है। कटाई से पहले अपनी पर्ची, सट्टे और समिति के रिकॉर्ड का मिलान कर लें। नाम, गाँव और खेत का ब्योरा ठीक होना चाहिए।

पर्ची में गलती दिखे तो कटाई से पहले ही समिति से ठीक करवाएँ। पर्ची की फोटो अपने फोन में भी रख लें। कागज खोने पर फोटो ही काम आती है।

कटौती लगे तो उसी दिन, सबूत के साथ बात करें

अगर किसी ट्रॉली पर कटौती लग जाए या गन्ना वापस हो जाए, तो चुपचाप मानकर घर न लौटें। उसी दिन केंद्र प्रभारी से पूछें कि वजह क्या दर्ज की गई है। वजह पर्ची या रजिस्टर में लिखी होनी चाहिए। लिखित वजह मिलने पर ही आगे की शिकायत बनती है।

शिकायत का रास्ता भी जान लें। पहले केंद्र प्रभारी, फिर अपनी गन्ना समिति, और जरूरत पड़े तो गन्ना विभाग की हेल्पलाइन। यूपी गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और 1800-180-5129 हैं, और एसएमएस के लिए 51969 नंबर है। शिकायत करते वक्त पर्ची और ट्रॉली की फोटो साथ रखें। बिना सबूत की शिकायत धीमी चलती है।

एक बात और साफ रखें। 2026-27 सीजन के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए पिछले सीजन का भाव इस सीजन का भाव मानकर हिसाब न लगाएँ। भुगतान उसी भाव से होगा जो सीजन के लिए घोषित होगा। साफ गन्ना, सही तौल और पक्की पर्ची, यही तीन चीजें हर सीजन में किसान के पैसे की हिफाजत करती हैं।

मुख्य बातें

  • सूखी पत्ती, अगोला, मिट्टी और खराब गन्ना खेत पर ही अलग करें, केंद्र पर कटौती की सबसे बड़ी वजह यही होती है।
  • कटा गन्ना जल्दी भेजें, तौल के वक्त खुद मौजूद रहें और पर्ची के तीनों आँकड़े अपनी आँखों से मिलाएँ।
  • कटौती लगे तो उसी दिन लिखित वजह लें और पर्ची व ट्रॉली की फोटो के साथ केंद्र प्रभारी या समिति से बात करें।

स्रोत: यूपी गन्ना विभाग (cane.up.gov.in) की सार्वजनिक जानकारियाँ; टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर विभाग के आधिकारिक प्रचार से।

#गन्ना #गन्ना तौल #चीनी मिल #गन्ना कटौती #पेराई सीजन #किसान गाइड

Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

और पढ़ें

गन्ने की पर्ची से पेमेंट तक: 1 डायरी में पूरा हिसाब, बकाया कभी नहीं छूटेगा खेती गाइड गन्ने की पर्ची से पेमेंट तक: 1 डायरी में पूरा हिसाब, बकाया कभी नहीं छूटेगा परची गुम, तौल का शक, पेमेंट का हिसाब नहीं। गन्ना किसान की सबसे बड़ी दिक्कत खेत में नहीं, कागज में होती है। एक साधारण डायरी में सट्टा, पर्ची, तौल, खर्च और पेमेंट का रिकॉर्ड रखने का पूरा तरीका इस गाइड में। सूखे पत्ते में एक चिंगारी काफी है: खड़ी गन्ना फसल को आग से बचाने के 7 काम खेती गाइड सूखे पत्ते में एक चिंगारी काफी है: खड़ी गन्ना फसल को आग से बचाने के 7 काम पका गन्ना और सूखे पत्ते आग को मिनटों में फैला देते हैं। खेत के चारों ओर फायर लाइन, मशीन की सफाई, पानी का इंतजाम और आग लगने पर पहले 10 मिनट की सही कार्रवाई की पूरी गाइड। गन्ने के बीच मेंथा: 90 दिन में दूसरी कमाई, 1 एकड़ से 125-200 किलो तेल खेती गाइड गन्ने के बीच मेंथा: 90 दिन में दूसरी कमाई, 1 एकड़ से 125-200 किलो तेल बसंतकालीन गन्ने की पंक्तियों के बीच मेंथा लगाने से उसी खेत से दूसरी कमाई होती है। मार्च में रोपाई, जून में कटाई, और भाप आसवन से तेल। कोसी और सीम-क्रांति किस्म, पानी का हिसाब और बेचने का सही तरीका इस गाइड में।