बैरियर हटाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान: 'DM से मिलकर ही उठेंगे, 2 दिन क्या 6 दिन बाद आएं'

शनिवार, 10 अक्टूबर को मेरठ में कमिश्नरी चौराहे पर लगा पुलिस बैरियर देखते ही देखते हट गया और उसके पार से सैकड़ों किसानों का काफिला कलेक्ट्रेट परिसर की ओर बढ़ गया। भारतीय किसान यूनियन के झंडे लेकर आए ये किसान नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट में दाखिल हुए और फिर वहीं धरने पर बैठ गए। उनकी एक ही मांग थी: जिलाधिकारी से सीधे मुलाकात करानी होगी। भाकियू के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने वहीं से ऐलान कर दिया कि डीएम से मिलकर ही धरने से उठेंगे, चाहे इसमें दो दिन लगें या छह।
कमिश्नरी चौराहे से कलेक्ट्रेट तक का रास्ता
दरअसल भाकियू के कार्यकर्ता शनिवार को पहले कमिश्नरी चौराहे पर जुटे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ घोषित प्रदर्शन के समर्थन में यहां प्रदर्शन हुआ और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी।
इसके बाद किसानों ने कहा कि वे अपनी समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी से मिलना चाहते हैं। अधिकारियों का जवाब था कि जिलाधिकारी जनपद में नहीं हैं, दो दिन बाद मिलेंगे। यह जवाब सुनते ही किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। नारेबाजी करते हुए किसान कलेक्ट्रेट की ओर कूच कर गए। पुलिस बल ने रोकने की कोशिश की और रास्ते में बैरियर भी लगाए गए, लेकिन किसानों की भीड़ ने बैरियर हटा दिए और कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंच गई। वहां पहुंचकर किसान धरने पर बैठ गए।
एडीएम और एसपी सिटी समेत कई अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। देर तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मनाने में जुटे रहे, मगर धरना जारी रहा।
“बार-बार आते हैं, हर बार यही जवाब मिलता है”
अनुराग चौधरी ने मीडिया से कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर वे बार-बार जिलाधिकारी से मिलने आते हैं, लेकिन हर बार “डीएम जनपद से बाहर हैं” कहकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। उनका कहना था कि किसान अपनी समस्याएं सीधे जिलाधिकारी के सामने रखना चाहते हैं, नीचे के अधिकारियों से बात करके उनकी बात नहीं बन रही।
इस बार भी जब अधिकारियों ने दो दिन बाद मिलने की बात कही तो किसानों ने ठान लिया कि बिना मुलाकात किए वापस नहीं लौटेंगे। चौधरी ने कहा कि जिलाधिकारी जब भी आएं, किसान इंतजार करेंगे, लेकिन धरने से तभी उठेंगे जब डीएम से बात हो जाएगी।
गन्ना किसानों के मुद्दे भी धरने की वजह में
किसान नेताओं के मुताबिक इस धरने के पीछे गन्ना किसानों की समस्याएं और मतदाता सूची से नाम काटे जाने जैसे मुद्दे भी हैं। मेरठ पश्चिम यूपी के गन्ना बेल्ट का बड़ा जिला है और पेराई सत्र की शुरुआत के समय भुगतान, पर्ची और समिति स्तर के विवाद अक्सर तेज हो जाते हैं। किसान संगठनों का तर्क है कि जब तक जिले के सबसे बड़े अधिकारी के सामने बात नहीं रखी जाएगी, निचले स्तर पर फाइलें दबती रहती हैं।
यही वजह है कि धरने पर बैठे कई किसानों ने कहा कि गन्ना भुगतान में देरी और क्रय केंद्रों से जुड़ी शिकायतें लेकर वे पहले भी दफ्तरों के चक्कर लगा चुके हैं। उनकी नजर में डीएम से सीधी बात ही इन मामलों में दबाव बनाती है।
चेतावनी: सुनवाई नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन
धरने के दौरान किसान नेताओं ने साफ कर दिया कि अगर इस बार भी सुनवाई नहीं हुई तो भाकियू अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेगी। अनुराग चौधरी ने यह भी कहा कि अगली बार किसान अधिकारियों को पहले फोन करके आने की सूचना देंगे, और उसके बाद भी मुलाकात नहीं हुई तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। प्रदर्शन के दौरान एडीएम सिटी की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए किसानों ने मेरठ में इस पद को समाप्त करने की मांग भी उठाई।
फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर में धरना और प्रशासन की मनाने की कोशिशें, दोनों जारी हैं। देखना यह होगा कि जिलाधिकारी कब किसानों से मिलते हैं और इस गतिरोध का क्या हल निकलता है।
गन्ना किसान के काम की बात
जो किसान भुगतान, पर्ची या क्रय केंद्र की समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए इस खबर में एक साफ संदेश है। जिला स्तर पर दबाव तभी बनता है जब शिकायत लिखित में और सामूहिक हो। अपनी समस्या का ब्योरा लिखकर गन्ना समिति में दर्ज कराएं, संगठन के ज्ञापन में अपनी बात जुड़वाएं और जरूरत हो तो गन्ना विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें। अकेले दफ्तर के चक्कर काटने से बेहतर है कि कागज और सबूत साथ लेकर जाएं।
मुख्य बातें
- 10 अक्टूबर को मेरठ में भाकियू कार्यकर्ताओं ने बैरियर हटाकर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया; डीएम से सीधी मुलाकात की मांग पर अड़े हैं।
- किसान नेताओं का आरोप है कि बार-बार मिलने आने पर भी “डीएम जनपद से बाहर हैं” कहकर वापस भेज दिया जाता है।
- सुनवाई नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी; गन्ना भुगतान और पर्ची जैसे मुद्दे भी धरने की वजह में शामिल।
स्रोत: दैनिक जागरण (10 अक्टूबर 2026), Lalluram
