मेरठ के 2.22 लाख किसानों के लिए खुशखबरी: 1 नवंबर से चलेंगी 6 चीनी मिलें

मेरठ के गन्ना किसानों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। जिले की पहली चीनी मिल 1 नवंबर को चलेगी और 4 नवंबर तक सभी छह मिलें पेराई शुरू कर देंगी। इसका मतलब साफ है। अगले हफ्ते से खेत से गन्ना उठना शुरू हो जाएगा और पर्ची का चक्का भी घूमने लगेगा।
जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने मिलों में चल रहे मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया है। दैनिक जागरण की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक मिलों में वार्षिक मरम्मत और अनुरक्षण का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। मिलें तैयार हैं, बस चेन चलने की तारीख का इंतजार था, जो अब सामने आ गया है।
कौन सी मिल कब चलेगी
किनौनी चीनी मिल सबसे पहले, 1 नवंबर को पेराई शुरू करेगी। इसके अगले दिन, 2 नवंबर को तीन मिलें एक साथ चलेंगी। इनमें मवाना, नंगलामल और दौराला शामिल हैं। इसके बाद 4 नवंबर को मोहिउद्दीनपुर और सकौती मिल का संचालन शुरू होगा। नवंबर के पहले हफ्ते में जिले की सभी मिलें अपनी पूरी क्षमता से चलने लगेंगी।
नंगलामल मिल की 2 नवंबर की तारीख की पुष्टि अमर उजाला की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट से भी होती है। उस रिपोर्ट में मिल प्रबंधन ने बताया था कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और किसानों से समय से गन्ना कटाई, छिलाई और आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
मेरठ के किसान अपनी मिल की तारीख अभी से नोट कर लें। जिस मिल से आपका सट्टा जुड़ा है, उसी की तारीख के हिसाब से कटाई का कार्यक्रम बनाएं। जल्दबाजी में गन्ना काटकर खेत में छोड़ देना नुकसान का सौदा होता है। कटा हुआ गन्ना जितना ज्यादा दिन पड़ा रहता है, उसका वजन उतना ही घटता है।
जिले के आंकड़े क्या कहते हैं
मेरठ जिले में गन्ना किसानों की संख्या 2.22 लाख है। गन्ने का रकबा 1,58,827 हेक्टेयर है। जिले की छह मिलों की कुल पेराई क्षमता 48,800 टीसीडी है, यानी रोजाना 48,800 टन गन्ना पेरने की क्षमता। यह आंकड़ा बताता है कि पेराई शुरू होने के बाद गन्ना उठान की रफ्तार तेज रहने की उम्मीद है।
पिछले पेराई सत्र 2025-26 में जिले की मिलों ने कुल 656.86 लाख कुंतल गन्ना खरीदा था। इससे 69.20 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन हुआ और किसानों को 2,580 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया।
पेराई से पहले किसान ये काम निपटा लें
मिल चलने से पहले कुछ काम निपटाना समझदारी है। सबसे पहले गन्ना समिति में अपना सर्वे और सट्टा जांच लें। रकबा, किस्म या सट्टे में कोई गड़बड़ी हो तो मिल चलने से पहले ही ठीक करवा लें। पर्ची रुकने और भुगतान अटकने की शिकायतें अक्सर यहीं से शुरू होती हैं।
दूसरा काम बैंक खाते से जुड़ा है। खाता सक्रिय रखें ताकि भुगतान में कोई रुकावट न आए। तीसरा, तौल केंद्र पर जाने से पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली की जांच कर लें। ओवरलोड से बचें, क्योंकि जुर्माना सीधे किसान की जेब से जाता है।
मिल प्रबंधन ने किसानों से स्वच्छ और ताजा गन्ने की आपूर्ति का आग्रह किया है। सूखी पत्ती और मिट्टी लगा गन्ना मिल को भी परेशान करता है और किसान की तौल पर भी असर डालता है। छिलाई साफ हो तो तौल भी सही बैठती है।
जल्दी पेराई का फायदा गेहूं को भी मिलेगा
मेरठ के किसान गन्ने के बाद गेहूं बोते हैं। पेराई समय पर शुरू होने का सीधा फायदा गेहूं की बुआई को मिलता है। खेत जल्दी खाली होगा तो गेहूं सही समय पर बोया जा सकेगा। गेहूं की बुआई का सही समय निकल जाने पर पैदावार पर असर पड़ता है, यह हर किसान जानता है।
यही वजह है कि मिल की तारीख सिर्फ गन्ने की खबर नहीं है। यह पूरे रबी सत्र की शुरुआत की खबर है। 1 नवंबर से शुरू हो रहा यह सिलसिला अगले कुछ महीनों तक चलेगा और किसान की आमदनी की धुरी इसी पर टिकी रहेगी।
गन्ना भाव को लेकर क्या चल रहा है
पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ना भाव को लेकर भी चर्चा तेज है। राष्ट्रीय लोक दल ने 2026-27 सत्र के लिए राज्य परामर्श मूल्य बढ़ाने की मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि खेती की लागत बढ़ी है, इसलिए गन्ने के दाम में संशोधन जरूरी है। पिछले सत्र में गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई थी।
किसानों को सलाह है कि भाव की घोषणा पर नजर रखें और किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें। आधिकारिक घोषणा होने पर ही भाव को अंतिम मानें।
मेरठ के किसानों के लिए सीधा संदेश
तारीखें तय हैं, मिलें तैयार हैं और जिला प्रशासन ने निरीक्षण भी कर लिया है। अब गेंद किसान के पाले में है। सट्टा जांच लें, कटाई का कार्यक्रम मिल की तारीख से जोड़ लें और साफ गन्ना समय पर केंद्र तक पहुंचाएं।
मुख्य बातें
- मेरठ की किनौनी मिल 1 नवंबर, मवाना, नंगलामल और दौराला 2 नवंबर, मोहिउद्दीनपुर और सकौती 4 नवंबर को पेराई शुरू करेंगी।
- जिले में 2.22 लाख गन्ना किसान, 1,58,827 हेक्टेयर रकबा और 48,800 टीसीडी की कुल पेराई क्षमता है।
- पिछले सत्र में 656.86 लाख कुंतल गन्ना खरीदा गया, 69.20 लाख कुंतल चीनी बनी और 2,580 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।
स्रोत: दैनिक जागरण, मेरठ (27 अक्टूबर 2026); अमर उजाला, मेरठ (23 अक्टूबर 2026, नंगलामल मिल की तारीख की पुष्टि)।
