3 नवंबर को मेरठ में गन्ना महापंचायत, 600 से कम भाव मंजूर नहीं

सरधना के गांवों में पिछले कुछ दिन से एक ही आवाज गूंज रही है। झिटकरी, महादेव, कालंद और छबड़िया गांव में किसान संगठन के लोग घर-घर जाकर कह रहे हैं कि 3 नवंबर को मेरठ पहुंचना है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने उस दिन मेरठ में गन्ना महापंचायत का आह्वान किया है, और उसकी सबसे बड़ी मांग है गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी। संगठन के जिला संगठन मंत्री अमित छाबड़िया ने किसानों से ट्रैक्टरों के साथ मेरठ पहुंचने की अपील की है।
यह महापंचायत ऐसे वक्त हो रही है, जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) अभी तक घोषित नहीं हुआ है। किसान बिना भाव जाने ही अपनी फसल मिलों को दे रहे हैं। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा खल रही है।
18 मंडलों में एक साथ प्रदर्शन की तैयारी
3 नवंबर का कार्यक्रम सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं है। भाकियू (अराजनैतिक) ने उसी दिन प्रदेश के सभी 18 मंडलों में प्रदर्शन की घोषणा की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हरनाम सिंह वर्मा ने कहा है कि पेराई शुरू होने से पहले सरकार गन्ने का मूल्य कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करे।
मुरादाबाद मंडल में भी 3 नवंबर को मंडल मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और पंचायत होगी, जिसके बाद मंडलायुक्त को ज्ञापन दिया जाएगा। संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह रंधावा ने कांठ तहसील के गांवों में नुक्कड़ सभाएं करके किसानों को इस प्रदर्शन के लिए तैयार किया है। उन्होंने साफ कहा है कि किसी भी कीमत पर 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम गन्ना मूल्य मंजूर नहीं होगा।
पिछले सत्र का भाव और इस बार की लागत
पिछले पेराई सत्र, यानी 2025-26 में उत्तर प्रदेश सरकार ने SAP में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद अगेती किस्म का भाव 400 रुपये, सामान्य किस्म का 390 रुपये और अनुपयुक्त किस्म का 355 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ था। किसान संगठनों का कहना है कि यह भाव अब लागत के हिसाब से काफी पीछे छूट गया है।
खाद, बीज, जुताई और मजदूरी महंगी होने से प्रति हेक्टेयर गन्ने की लागत में करीब 10 हजार रुपये का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ, मिलों से बिकने वाली चीनी का दाम भी ऊपर गया है। पिछले सत्र में चीनी का भाव शुरुआती दौर में करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल था, जो बाद में करीब 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। किसानों का तर्क सीधा है। जब चीनी महंगी बिक रही है, तो गन्ने का भाव भी बढ़ना चाहिए।
पेराई शुरू, पर भाव का इंतजार बरकरार
इस बीच पेराई का पहिया घूमने लगा है। बागपत की मलकपुर चीनी मिल में पेराई शुरू हो चुकी है, 31 अक्टूबर को मोदीनगर मिल चली और 1 नवंबर को बुलंदशहर, साबितगढ़ और मोरना की गंगा किसान सहकारी चीनी मिल में पेराई शुरू करने की तैयारी थी। 2 नवंबर को मवाना, दौराला, नंगला मल, रमाला, अनामिका और धामपुर मिलों में पेराई शुरू होनी है।
मतलब यह है कि 3 नवंबर की महापंचायत के दिन तक पश्चिमी यूपी की ज्यादातर मिलें चल रही होंगी। किसान अपना गन्ना तौल करा चुके होंगे या करा रहे होंगे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होगा कि उनके गन्ने की सरकारी कीमत क्या तय होगी। यही अनिश्चितता महापंचायत की सबसे बड़ी वजह है।
कर्ज, भुगतान और पर्ची के सवाल भी साथ
भाव के साथ-साथ भुगतान का मुद्दा भी महापंचायत में उठने की उम्मीद है। किसान संगठनों ने पहले भी 14 दिन के भीतर गन्ना भुगतान की मांग उठाई है। देर से भुगतान पर ब्याज का सवाल भी बार-बार सामने आता है। मेरठ मंडल में ही किनौनी और मोहिउद्दीनपुर सहित करीब एक दर्जन मिलों पर किसानों का बड़ा बकाया होने की बात पहले ज्ञापनों में आ चुकी है।
गांव के किसान के लिए इसका मतलब सीधा है। पर्ची मिली, तौल हुई, गन्ना मिल गया, लेकिन पैसा कब और किस भाव से मिलेगा, यह अभी साफ नहीं है। घर के खर्च, बच्चों की फीस और अगली फसल की तैयारी सब इसी भुगतान पर टिकी है।
किसान के लिए इसका मतलब
अगर सरकार महापंचायत से पहले या उसके तुरंत बाद SAP घोषित करती है, तो किसानों को अपने गन्ने की कीमत पहले से पता रहेगी और वे पर्ची-तौल के फैसले सोच-समझकर ले सकेंगे। अगर घोषणा टलती है, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना है, क्योंकि संगठन ने साफ कर दिया है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।
मेरठ के किसानों के लिए 3 नवंबर इसलिए अहम है, क्योंकि यह सिर्फ एक पंचायत नहीं है। यह पूरे प्रदेश में एक साथ उठ रही मांग का हिस्सा है, जिसमें हर मंडल में किसान एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि पेराई शुरू हो गई, तो भाव कब घोषित होगा।
मुख्य बातें
- भाकियू (अराजनैतिक) ने 3 नवंबर को मेरठ में गन्ना महापंचायत का आह्वान किया है, किसानों से ट्रैक्टरों के साथ पहुंचने की अपील की गई है।
- संगठन की मांग है कि 2026-27 सत्र के लिए SAP पेराई से पहले घोषित हो; 2025-26 में अगेती का भाव 400 रुपये और सामान्य का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
- उसी दिन प्रदेश के सभी 18 मंडलों में प्रदर्शन होगा; मुरादाबाद में संगठन ने 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम भाव मंजूर न करने की बात कही है।
स्रोत: अमर उजाला (31 अक्टूबर 2026, मेरठ; 30 अक्टूबर 2026, मुरादाबाद), नवभारत टाइम्स (पेराई सत्र 2026-27), इंडिया टुडे हिंदी (27 अक्टूबर 2026)।
