मेड़ पर पॉपलर से 4 साल में लाखों? गन्ना किसानों के लिए 5 पेड़ों की अतिरिक्त कमाई गाइड

पेराई का मौसम दरवाज़े पर है। पश्चिमी यूपी के गन्ना बेल्ट में किसान भाव की बहस में उलझे हैं। कोई 500 की मांग कर रहा है, कोई बकाया गिन रहा है। इसी बीच एक सवाल खुद से पूछिए: खेत की मेड़ पर क्या है? ज्यादातर किसानों की मेड़ पर खालीपन, खरपतवार और कहीं-कहीं कांटे होते हैं। यही खाली मेड़ चार-पांच साल में लकड़ी की तिजोरी बन सकती है। गांव जंक्शन की एक रिपोर्ट कहती है कि पॉपलर का पेड़ करीब चार साल में चार हज़ार रुपये के आसपास का हो जाता है। शामली के किसान शराफ़त खान ने अपनी 19 बीघा ज़मीन पर गन्ने के साथ-साथ करीब 800 पॉपलर के पौधे लगाए हैं। वे कहते हैं कि गन्ना तीन साल चलेगा, पॉपलर पांच साल में तैयार हो जाएगा। फसल और लकड़ी, दोनों की आमदनी एक ही खेत से।
लेकिन एक ईमानदार बात पहले ही साफ कर दूं। पेड़ लगाना कोई जादू नहीं है। इसमें धैर्य चाहिए, सही किस्म का चुनाव चाहिए और सबसे ज़रूरी बात, लकड़ी खरीदने का बाज़ार आस-पास चाहिए। प्लाईवुड और कागज़ उद्योग जिन इलाकों में हैं, वहीं पॉपलर का भाव अच्छा मिलता है। इस गाइड में पांच पेड़, रोपण का सही तरीका और सरकारी मदद की जानकारी है।
1. पॉपलर: गन्ने का सबसे तेज़ दोस्त
पॉपलर सीधा बढ़ता है, इसलिए गन्ने को छाया कम देता है। गन्ने के खेत की मेड़ पर यह सबसे आज़माया हुआ विकल्प है। शामली के चौसाना क्षेत्र में शराफ़त खान ने गन्ने के साथ पॉपलर की 10.09 किस्म के पौधे लगाए। पौधे करनाल (हरियाणा) की नर्सरी से मंगवाए गए थे और प्रति पौधा कीमत 31 रुपये बताई गई। किसान का कहना है कि पॉपलर का पौधा लगभग पांच साल में पूरी तरह तैयार हो जाता है।
रामपुर के किसान भिखारी लाल ने दो एकड़ में पांच हज़ार पॉपलर लगाए। पौधा लाने और लगाने तक करीब 100 रुपये खर्च आया। उनका कहना है कि पांच साल बाद एक पेड़ करीब छह क्विंटल का हो सकता है और लकड़ी का भाव करीब 1200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।
पॉपलर की लकड़ी प्लाईवुड, कागज़ की लुगदी और माचिस में जाती है। यही औद्योगिक मांग भाव तय करती है। सहारनपुर और यमुनानगर बेल्ट के किसानों के लिए यह सबसे आसान विकल्प है, क्योंकि खरीद का बाज़ार यहीं है।
2. शीशम, सागौन और सफेदा: धीमी पर मज़बूत पूंजी
शीशम, सागौन और सफेदा लंबी अवधि की पूंजी के लिए हैं। शीशम की लकड़ी फर्नीचर और दरवाज़ों में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है, इसलिए बाज़ार में उसकी मांग हमेशा बनी रहती है।
रोपण का सही समय जून-जुलाई है, जब बारिश शुरू होती है। दस-दस फीट की दूरी पर दो-दो फीट के गड्ढे खोदें। गड्ढे में गोबर की खाद और मिट्टी मिलाकर भरें। जलभराव वाली जगह से बचें। पौधे भरोसेमंद नर्सरी से ही लें, एक साल पुराने स्वस्थ पौधे चुनें।
लगाने के बाद पहले दो साल गर्मी में दस-पंद्रह दिन पर पानी देना ज़रूरी है। इसके बाद पेड़ खुद पानी ढूंढ लेता है। हर साल दो बार निराई-गुड़ाई करें और खरपतवार साफ रखें। शुरुआत में पेड़ों के बीच अरहर या उड़द जैसी फसल भी ले सकते हैं, ताकि ज़मीन खाली न रहे।
शीशम दस से बारह साल में कटाई लायक होता है। आज के भाव से एक तैयार पेड़ आठ से दस हज़ार रुपये में बिकता है। यह गन्ने के मुनाफे को पेड़ की बचत में बदलने जैसा है।
3. अमरूद: दो साल में फल, हर साल कमाई
जो किसान पेड़ के लिए पांच साल नहीं रुक सकते, उनके लिए अमरूद अच्छा विकल्प है। यह करीब दो साल में फल देना शुरू कर देता है और हर साल फल से कमाई होती है।
उत्तर प्रदेश बागवानी विभाग की एक योजना में पंजीकरण पर बाग रोपण के पौधे मुफ्त मिलते हैं। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, फोटो और खतौनी की कॉपी चाहिए। योजना के तहत तीन साल तक रखरखाव के लिए अनुदान भी मिलता है।
मेड़ के किनारे अमरूद की पंक्ति लगाते समय एक सावधानी ज़रूर बरतें। पंक्ति गन्ने की आखिरी कतार से थोड़ी दूरी पर रखें, ताकि बढ़े हुए पेड़ की छाया गन्ने पर न पड़े। फलदार पेड़ों में हल्की छंटाई हर साल कराएं, इससे फल भी ज़्यादा लगता है और पेड़ गन्ने की तरफ नहीं फैलता।
4. गन्ने को छाया न पड़े: सबसे ज़रूरी नियम
मेड़ पर पेड़ लगाने की एक ही शर्त है। गन्ने की उपज नहीं घटनी चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार की कृषि-वानिकी नीति भी सीधे बढ़ने वाली प्रजातियों की सलाह देती है, ताकि फसल पर असर न पड़े। मेड़ पर लगे पेड़ों से किसानों को कार्बन क्रेडिट के ज़रिए अतिरिक्त आमदनी का रास्ता भी खोला गया है।
व्यावहारिक नियम सीधा है। पेड़ हमेशा मेड़ की बाहरी रेखा पर लगाएं, खेत की ओर वाली तरफ नहीं। इससे छाया गन्ने पर नहीं पड़ती।
5. शुरुआत आज से: पहला कदम क्या हो
इस बार पेराई से पहले एक दिन मेड़ों के लिए निकालिए। पैमाइश कीजिए कि कितनी मेड़ खाली है। दस फीट की दूरी के हिसाब से पौधों की गिनती बन जाएगी। फिर वन विभाग या बागवानी विभाग की नर्सरी से संपर्क कीजिए।
रामपुर के भिखारी लाल की तरह एकमुश्त बड़े निवेश की ज़रूरत नहीं है। मेड़ पर पचास-सौ पौधों से भी शुरुआत हो सकती है। धीरे-धीरे, जैसे-जैसे अनुभव बढ़े, विस्तार करते जाइए। गन्ना सालाना आमदनी देता है, पेड़ भविष्य की पूंजी बनाते हैं। दोनों को एक साथ चलाने वाला किसान ही सबसे मज़बूत रहता है।
मुख्य बातें
- पॉपलर चार-पांच साल में तैयार होता है और गन्ने के साथ चलता है। शामली के शराफ़त खान और रामपुर के भिखारी लाल इस मॉडल को अपना रहे हैं।
- शीशम-सागौन लंबी अवधि की पूंजी है, अमरूद दो साल में फल देना शुरू करता है और हर साल कमाई देता है।
- बागवानी विभाग की योजना में पंजीकरण पर मुफ्त पौधे और तीन साल तक रखरखाव का अनुदान मिल सकता है। पेड़ हमेशा मेड़ की बाहरी रेखा पर लगाएं ताकि गन्ने पर छाया न पड़े।
स्रोत: दैनिक जागरण, गांव जंक्शन, न्यूज़18, न्यूज़18 फोटोगैलरी, द डेली जागरण, न्यूज़18 बागवानी योजना
