आज डेडलाइन डे: मवाना के किसानों को मिलेगा 30 साल के गन्ना ब्याज का लिखित हिसाब

आज 7 अक्टूबर है, और मेरठ के मवाना में गन्ना किसान उस लिखित कागज का इंतजार कर रहे हैं जिसमें उनके करीब तीस साल के ब्याज का साल-दर-साल हिसाब लिखा होगा। सोमवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले सैकड़ों किसान सहकारी गन्ना विकास समिति के परिसर में धरने पर बैठे थे। मवाना टाइम्स की 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान पर ब्याज का सालवार हिसाब लिखित में मांगा, और अधिकारियों ने आज के दिन समिति सचिव के आने पर पूरा विवरण देने का आश्वासन दिया। अब घड़ी का कांटा आगे बढ़ रहा है।
सोमवार का धरना और आज का आश्वासन
धरने का नेतृत्व संगठन के मंडल अध्यक्ष चौधरी रामवीर सिंह ने किया। धरने में जिला उपाध्यक्ष पवन त्यागी, मंडल अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, जिला सचिव नीतू भाटी, तहसील सचिव कंवरपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों की शिकायत सीधी थी। लंबे समय से बकाया भुगतान पर ब्याज का मामला लंबित है, लेकिन उन्हें अब तक इसका स्पष्ट सालवार हिसाब नहीं मिल पाया। धरने के दौरान डिप्टी भूपेंद्र राय ने किसानों से वार्ता की और आश्वासन दिया कि आज समिति सचिव के आने पर बकाया गन्ना ब्याज का सालवार विवरण लिखित रूप में दे दिया जाएगा। इसके बाद किसानों ने दो दिन का समय देकर धरना स्थगित कर दिया। संगठन के जिला अध्यक्ष दिनेश प्रधान ने चेतावनी दी कि यदि आज ब्याज का पूरा विवरण नहीं मिला तो संगठन दोबारा धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
मवाना में ब्याज का यह पहला आंदोलन नहीं है। लेटेस्टली की 9 सितंबर 2026 की मेरठ रिपोर्ट के अनुसार किसान एकता संघर्ष संगठन पहले ही समिति सचिव का घेराव कर तीस साल के बकाए पर 15 प्रतिशत ब्याज मांग चुका है।
1996-97 से 2025-26: तीस साल के हिसाब की मांग
किसान 1996-97 से 2025-26 तक के बकाया गन्ना भुगतान पर देय ब्याज का पूरा सालवार विवरण मांग रहे हैं। मवाना टाइम्स के अनुसार किसानों ने उच्च न्यायालय के 11 जुलाई 2026 के आदेश का हवाला भी दिया, जिसके मुताबिक विलंबित भुगतान पर ब्याज का ब्यौरा दिया जाना जरूरी है।
मांग का आधार कानून में है। गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के अनुसार मिल को गन्ना डिलीवरी के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। 14 दिन से ज्यादा देरी होने पर बकाया राशि पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज देना अनिवार्य है। जिस साल भुगतान में देरी हुई, उस साल का ब्याज बनता है। मांग यही है कि हर साल का हिसाब लिखित में मिले।
सिर्फ मवाना नहीं: पूरे पश्चिम यूपी में ब्याज की लड़ाई
मवाना का धरना अकेला मामला नहीं है। लाइव हिंदुस्तान की पीलीभीत रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने वहां गन्ना भवन पर धरना देकर बकाया विलंब भुगतान पर ब्याज की मांग की। किसानों ने 1996-97 से लेकर अब तक करीब तीस वर्षों के ब्याज के लिए 2232 फार्म जमा किए। रिपोर्ट के मुताबिक उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने किसान नेता वीएम सिंह की याचिका पर डीएम को बकाया विलंब भुगतान पर ब्याज दिलाने के निर्देश दिए थे।
22 सितंबर को बिजनौर कलेक्ट्रेट में हजारों किसान धरने पर बैठे, जहां पुराने बकाए पर ब्याज भी प्रमुख मांगों में शामिल था। बिजनौर और मुरादाबाद समेत कई जिलों में भी किसानों ने ब्याज की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं। मवाना में आज जो कागज मिलेगा या नहीं मिलेगा, उसका असर बाकी जिलों पर भी पड़ेगा।
किसान के काम की 5 बातें: अपना ब्याज का हक कैसे मांगें
कानून आपके पक्ष में है, लेकिन कागज आपके पास होना चाहिए।
- पर्ची और भुगतान की तारीखें संभालें: गन्ना कब दिया और पैसा कब आया, यही 14 दिन के नियम की जांच का सबसे बड़ा सबूत है।
- समिति से लिखित ब्यौरा मांगें: बकाया भुगतान पर देय ब्याज का सालवार हिसाब मौखिक नहीं, लिखित में लें। मवाना के किसानों ने ठीक यही किया।
- eGanna पर पेमेंट स्टेटस जांचें: सट्टा, आपूर्ति और भुगतान का रिकॉर्ड वहीं मिलता है। यह रिकॉर्ड किसी भी मांग की बुनियाद बनता है।
- सामूहिक ज्ञापन दें: वार्ता और ज्ञापन का असर अकेली मांग से ज्यादा होता है, जैसा मवाना में सोमवार को हुआ।
- हर सत्र के बाद जांच करें: हिसाब मांगना एक बार का काम नहीं है। हर पेराई सत्र के बाद यह जांच होनी चाहिए कि भुगतान समय से हुआ या नहीं।
आगे क्या
आज समिति सचिव के आने पर किसानों को लिखित सालवार ब्यौरा मिलने की उम्मीद है। हिसाब मिला तो यह बाकी जिलों के लिए मिसाल बनेगा, नहीं मिला तो संगठन की चेतावनी के अनुसार आंदोलन फिर शुरू हो जाएगा।
मुख्य बातें
- मवाना में सोमवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के सैकड़ों किसानों ने गन्ना ब्याज के सालवार हिसाब की मांग को लेकर धरना दिया था
- अधिकारियों ने 7 अक्टूबर यानी आज समिति सचिव के आने पर ब्याज का लिखित सालवार विवरण देने का आश्वासन दिया
- किसानों ने 1996-97 से 2025-26 तक के बकाया भुगतान पर ब्याज के हिसाब और उच्च न्यायालय के 11 जुलाई 2026 के आदेश का हवाला दिया
- गन्ना (नियंत्रण) आदेश 1966 के मुताबिक 14 दिन से ज्यादा देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज किसानों का हक है
- विवरण न मिला तो संगठन ने दोबारा धरना-आंदोलन की चेतावनी दी; पीलीभीत और बिजनौर में भी ब्याज की लड़ाई जारी है
स्रोत: मवाना टाइम्स (6 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (पीलीभीत ब्याज धरना रिपोर्ट), लेटेस्टली (मेरठ, 9 सितंबर 2026), किसान इंडिया (बिजनौर धरना रिपोर्ट)
