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मवाना: 172 गांवों का 30 साल का ब्याज हिसाब अटका, 30 अक्टूबर को नया आश्वासन

✍️ Aamir Raza · 🗓 28 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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मवाना: 172 गांवों का 30 साल का ब्याज हिसाब अटका, 30 अक्टूबर को नया आश्वासन

मंगलवार की दोपहर मवाना की सहकारी गन्ना विकास समिति के परिसर का नजारा आम दिनों से अलग था। किसान धरने पर बैठे थे और उनके बीच में समिति के सचिव भी बैठे थे। मांग कोई नई नहीं थी। किसान सिर्फ यह जानना चाहते थे कि देर से हुए गन्ना भुगतान पर उनका ब्याज साल दर साल कितना बनता है। जवाब में उन्हें एक बार फिर एक तारीख मिली है, 30 अक्टूबर।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले किसानों ने 27 अक्टूबर को समिति परिसर में धरना दिया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक किसान उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार विलंबित गन्ना मूल्य भुगतान पर ब्याज का वर्षवार विवरण मांग रहे थे। यह हिसाब 1996-97 से 2025-26 तक के पेराई सत्रों का है।

27 अक्टूबर को समिति परिसर में क्या हुआ

किसानों का कहना था कि 14 दिन से ज्यादा देर से हुए भुगतान पर उन्हें ब्याज नहीं दिया गया। नियम सीधा है। गन्ना देने के बाद तय समय के भीतर भुगतान होना चाहिए और देरी पर ब्याज बनता है। किसानों की शिकायत यह है कि ब्याज का मामला सालों से लटका है, पर उसका साफ सालवार हिसाब उन्हें आज तक नहीं मिला।

अमर उजाला के अनुसार पहले 7 अक्टूबर को समिति सचिव ने लिखित आश्वासन दिया था कि 27 अक्टूबर 2026 तक 172 गांवों के किसानों को ब्याज का विवरण दे दिया जाएगा। 27 अक्टूबर को जब किसान समिति पहुंचे तो सचिव विक्रम बहादुर सिंह ने वेबसाइट बंद होने की बात कही। किसानों ने दो ही बातें रखीं। या तो लिखित में जानकारी दी जाए, या वर्षवार विवरण दिया जाए। बात नहीं बनी तो समिति परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया। दोपहर से ही किसानों ने सचिव को अपने बीच बैठाए रखा।

शाम को किसानों ने विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन भी सौंपा और चेतावनी दी कि मांगें पूरी न हुईं तो वह फिर धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। शाम साढ़े पांच बजे सचिव ने वेबसाइट के संबंध में 30 अक्टूबर को जानकारी देने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।

अक्टूबर में तीसरी बार यही मांग, तीसरी बार एक तारीख

मवाना में यह कहानी अक्टूबर में तीसरी बार दोहराई गई है। मवाना टाइम्स की 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को भी इसी मांग को लेकर धरना हुआ था। तब मंडल अध्यक्ष चौधरी रामवीर सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों किसान समिति परिसर में बैठे थे। उस धरने में डिप्टी भूपेंद्र राय ने आश्वासन दिया कि 7 अक्टूबर को समिति सचिव के आने पर बकाया गन्ना ब्याज का सालवार विवरण लिखित रूप में दे दिया जाएगा। संगठन के जिला अध्यक्ष दिनेश प्रधान ने तभी चेतावनी दी थी कि 7 अक्टूबर को पूरा विवरण न मिला तो संगठन दोबारा धरना देने को मजबूर होगा।

अब 27 अक्टूबर को वही चेतावनी सच साबित हुई। किसान फिर समिति पहुंचे, फिर आश्वासन की तारीख आगे बढ़ी। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सचिव खुद धरने पर किसानों के बीच बैठे और 30 अक्टूबर की तारीख देकर धरना खत्म कराया।

30 साल का हिसाब और नई पेराई का दबाव

1996-97 से 2025-26 तक का दायरा ही इस मांग को मुश्किल बनाता है। हर साल का भुगतान अलग, हर साल की देरी अलग, और हर साल का ब्याज अलग। मवाना टाइम्स के अनुसार किसानों ने उच्च न्यायालय के 11 जुलाई 2026 के आदेश का हवाला दिया है, जिसके तहत विलंबित भुगतान पर ब्याज का ब्यौरा दिया जाना जरूरी बताया गया है।

इस खबर का समय भी अहम है। मेरठ जिले की छह चीनी मिलें 1 से 4 नवंबर के बीच पेराई सत्र 2026-27 शुरू करने जा रही हैं। दैनिक जागरण की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक किनौनी मिल 1 नवंबर को चलेगी, मवाना, नंगलामल और दौराला 2 नवंबर को, और मोहिउद्दीनपुर व सकौती 4 नवंबर को। यानी मवाना क्षेत्र का किसान जब नई पेराई की पर्ची का इंतजार कर रहा है, उसी समय उसका पुराना ब्याज का हिसाब अधूरा पड़ा है।

30 अक्टूबर तक किसान क्या करें

30 अक्टूबर को समिति जाने से पहले किसान अपने कागज दुरुस्त कर लें। जिन वर्षों के भुगतान में देरी हुई, उनकी पर्चियों और भुगतान की तारीखों का अपना हिसाब अलग से नोट करके रखें। समिति से मिलने वाला कोई भी आश्वासन लिखित में लें, मौखिक बात पर भरोसा करके लौटना इस मामले में पहले भी महंगा पड़ा है। अगर 30 अक्टूबर को भी सिर्फ अगली तारीख मिले तो उसे भी लिखित में दर्ज कराएं।

शिकायत के रास्ते भी खुले हैं। जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय और गन्ना समिति में लिखित शिकायत दी जा सकती है। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी मदद मिलती है, और एसएमएस के लिए 51969 नंबर है। मवाना के किसानों ने 27 अक्टूबर को धरना खत्म करके प्रशासन को एक और मौका दिया है। अब 30 अक्टूबर को वेबसाइट की जानकारी के साथ सालवार ब्याज विवरण की ठोस तारीख सामने आनी चाहिए।

मुख्य बातें

  • मवाना में 27 अक्टूबर को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के किसानों ने 1996-97 से 2025-26 तक के गन्ना ब्याज का सालवार विवरण मांगते हुए धरना दिया।
  • 7 अक्टूबर के आश्वासन के अनुसार 27 अक्टूबर तक 172 गांवों के किसानों को विवरण मिलना था, पर सचिव ने वेबसाइट बंद होने की बात कही।
  • शाम 5:30 बजे सचिव ने वेबसाइट के बारे में 30 अक्टूबर को जानकारी देने का आश्वासन दिया, तब धरना समाप्त हुआ।

स्रोत: अमर उजाला (27 अक्टूबर 2026), मवाना टाइम्स (6 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (27 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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