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महाराष्ट्र में चीनी 12 लाख टन घटी, यूपी के गन्ना दाम पर क्या असर होगा?

✍️ Aamir Raza · 🗓 14 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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महाराष्ट्र में चीनी 12 लाख टन घटी, यूपी के गन्ना दाम पर क्या असर होगा?

पेराई शुरू होने में अब दिन ही बचे हैं और यूपी के गन्ना किसान के सामने सबसे बड़ा सवाल वही पुराना है, दाम क्या मिलेगा। इसी बीच पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से आई एक खबर ने इस सवाल को और तेज कर दिया है। वहां के चीनी आयुक्तालय ने 2026-27 सीजन के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटा दिया है। सितंबर में लगाया गया 102.5 लाख टन का अनुमान अब 90.18 लाख टन रह गया है। यानी एक महीने के अंदर ही करीब 12 लाख टन की कटौती।

यह गिरावट सिर्फ कागज पर नहीं है। पिछले सीजन में महाराष्ट्र ने 99 लाख टन से ज्यादा चीनी बनाई थी और देश में पहले नंबर पर था। नए अनुमान में इस बार उत्पादन पिछले साल से भी करीब 9 लाख टन कम रहेगा। वजह कम बारिश और गन्ने की कमजोर हालत बताई जा रही है।

सरकारी अनुमान और मिल वालों का अनुमान, दोनों एक ही तरफ

आयुक्तालय का संशोधित अनुमान अगस्त तक के गन्ने के आंकड़ों पर बना है। चीनी आयुक्त संजय कोलते ने उत्पादन घटने की वजह कृषि और जलवायु की स्थितियां बताई हैं।

गन्ने के आंकड़े वजह साफ कर देते हैं। नए अनुमान में करीब 1,127 लाख टन गन्ना, 15.43 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा, 74 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार और 9.5 फीसदी रिकवरी आंकी गई है। पिछले सीजन में 1,316 लाख टन गन्ना, 16 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा और 95 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार थी। खेत में गन्ना तो दिख रहा है, पर उसका वजन घट गया है।

मिलों का संगठन इससे भी ज्यादा चिंतित है। वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी. बी. थोंबरे के मुताबिक उत्पादन करीब 20 फीसदी घटकर 80 लाख टन के आसपास रह सकता है, क्योंकि प्रति एकड़ गन्ने का वजन 30 से 40 फीसदी तक घट रहा है। मराठवाड़ा, विदर्भ, सोलापुर और अहिल्यानगर में करीब 45 दिन से ठीक से बारिश नहीं हुई है। संगठन ने 15 अक्टूबर से पेराई जल्दी शुरू करने के फैसले का समर्थन किया है।

दोनों अनुमानों में फर्क है, पर दिशा एक ही है। गिरावट 9 लाख टन की हो या 19 लाख टन की, महाराष्ट्र इस बार पिछले साल जितनी चीनी नहीं बनाएगा।

यूपी के किसान के लिए इसका मतलब क्या है

देश की चीनी सप्लाई घटेगी तो चीनी के दाम मजबूत बने रहेंगे और गन्ने के दाम पर दबाव बढ़ेगा। पर एक भ्रम से बचना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं कि यूपी के किसान को कल से ज्यादा दाम मिलने लगेगा। यूपी में गन्ने का दाम एसएपी से तय होता है और 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय की है, जो पिछले सीजन के 355 रुपये से सिर्फ 10 रुपये ज्यादा है। पिछले सीजन में यूपी का एसएपी अगेती के लिए 400, सामान्य के लिए 390 और अनुपयुक्त प्रजाति के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल था। 7 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना आयुक्त कार्यालय में हुई बैठक में गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग पर चर्चा हुई। मांग पर चर्चा होना और दाम घोषित होना दो अलग बातें हैं।

द हिंदू बिज़नेसलाइन के एक निजी आकलन में देश का उत्पादन करीब 270 लाख टन आंका गया है, जो पिछले साल से करीब 15 फीसदी कम है। इसी आकलन में यूपी का उत्पादन करीब 96 लाख टन पर मोटे तौर पर स्थिर रहने का अनुमान है। यह सरकारी अनुमान नहीं है। यूपी में नहर और ट्यूबवेल का जाल बारिश पर निर्भरता कम करता है, जबकि महाराष्ट्र के कई इलाकों में गन्ना बारिश पर ही टिका है। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं।

दाम की घोषणा का इंतजार करते हुए किसान क्या करे

महाराष्ट्र की खबर से यूपी के किसान की जेब में तुरंत कुछ नहीं आएगा। फायदा तब होगा जब एसएपी बढ़े और भुगतान समय पर हो। तब तक तीन काम किसान के हाथ में हैं।

सबसे पहले अपना सर्वे और पर्ची का रिकॉर्ड दुरुस्त रखें। सर्वे में रकबा या किस्म की गड़बड़ी निकली तो सुधार में हफ्ते निकल जाते हैं। पर्ची मिलते ही उसकी फोटो संभालकर रखें, ताकि तौल और भुगतान का हिसाब मिलाते समय सबूत हाथ में हो।

दूसरा, पेराई की तैयारी में देर न करें। गन्ना खेत में ज्यादा दिन खड़ा रहा तो वजन घटता है और चीनी की मात्रा भी। महाराष्ट्र के किसानों को यही नुकसान हो रहा है। कटी फसल को मिल तक पहुंचाने में देर करना किसी भी किसान के हित में नहीं है।

तीसरा, भुगतान में देरी दिखे तो शिकायत दर्ज कराने से न हिचकें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज हो सकती है। शिकायत में पर्ची का नंबर और तारीख साथ रखें।

महाराष्ट्र की सूखी फसल ने एक बात फिर साफ कर दी है। गन्ने की खेती में दाम जितना मायने रखता है, उतना ही पानी और समय पर पेराई भी। यूपी के किसान के पास इस बार पानी का साथ है। अब नजर एसएपी की घोषणा और भुगतान की रफ्तार पर है।

मुख्य बातें

  • महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन अनुमान 102.5 लाख टन से घटकर 90.18 लाख टन हुआ, करीब 12 लाख टन की कटौती।
  • उद्योग संगठन का अनुमान और भी नीचे है, करीब 80 लाख टन, क्योंकि प्रति एकड़ गन्ने का वजन 30 से 40 फीसदी घटा है।
  • यूपी में 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स, बिज़नेस स्टैंडर्ड हिंदी, द हिंदू बिज़नेसलाइन, चीनीमंडी

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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