महाराष्ट्र में 75 मिलें चालू, 26 लाख टन गन्ना पिसा — UP के किसानों पर पड़ेगा ये असर

महाराष्ट्र के पेराई सीजन ने आखिरकार रफ्तार पकड़ ली है। चीनी आयुक्तालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 23 अक्टूबर तक राज्य की 75 चीनी मिलों में गन्ना पेराई शुरू हो चुकी है। इन मिलों ने अब तक 26 लाख मीट्रिक टन गन्ना पीस लिया है, जिससे औसत 6.40 प्रतिशत रिकवरी पर 16 लाख 70 हजार क्विंटल चीनी बन चुकी है।
यह रफ्तार एक हफ्ते पहले की तस्वीर से बिल्कुल अलग है। 15 अक्टूबर के आसपास जब सीजन की शुरुआत हुई थी, तब सिर्फ 19 मिलें ही चल पाई थीं। किसान आंदोलन और मिल गेटों पर धरने-प्रदर्शन के चलते दर्जनों मिलें पूजा करके भी पूरी तरह चालू नहीं हो पाई थीं। फिर 22 अक्टूबर तक चलने वाली मिलों की संख्या 65 पहुंची और अगले ही दिन यह आंकड़ा 75 हो गया।
163 मिलों को लाइसेंस, आधी से कम चालू
इस सीजन के लिए 212 मिलों ने पेराई लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जिनमें 104 सहकारी और 108 निजी मिलें थीं। जांच के बाद 23 अक्टूबर तक चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते ने 80 सहकारी और 83 निजी, यानी कुल 163 मिलों को ऑनलाइन लाइसेंस जारी कर दिए। लेकिन 23 अक्टूबर तक 33 सहकारी और 42 निजी मिलों ने ही पेराई शुरू की थी।
पश्चिमी महाराष्ट्र में अब भी ब्रेक
सबसे ज्यादा अटकाव पश्चिमी महाराष्ट्र में है। कोल्हापुर विभाग में अब तक सिर्फ तीन निजी मिलों में पेराई शुरू हुई है। यहां स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के आंदोलन का असर सबसे ज्यादा दिख रहा है। संगठन की मांग है कि गन्ने का पहला भुगतान 5,000 रुपये प्रति टन किया जाए और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो किया जाए।
कोल्हापुर के पालकमंत्री प्रकाश आबिटकर ने दो दिन के भीतर जिलाधिकारी कार्यालय में मिल मालिकों और किसान संगठनों की संयुक्त बैठक कराने की घोषणा की है। पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने चेतावनी दी है कि अगर 15 नवंबर से पहले पेराई हुई तो कांटा बंद आंदोलन किया जाएगा, यानी गन्ने की तौल ही रुकवा दी जाएगी। उनका तर्क है कि कच्चा गन्ना पेरने से रिकवरी घटती है और किसान को प्रति एकड़ नुकसान होता है।
उत्पादन अनुमान में 15 लाख टन का अंतर
इस सीजन महाराष्ट्र में कितनी चीनी बनेगी, इस पर भी अनुमान बंटे हुए हैं। चीनी आयुक्तालय का अनुमान 90.18 लाख टन का है। वहीं वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी. बी. ठोंबरे का कहना है कि उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है और आंकड़ा 80 लाख टन के आसपास रह सकता है। एग्रीमंडी लाइव का अनुमान तो और नीचे है, करीब 75 लाख टन।
FRP 365 रुपये, मांग 5,000 रुपये प्रति टन की
केंद्र सरकार ने चीनी सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी दर के आधार पर है। केंद्र ने मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी थी।
लेकिन किसान संगठन इस FRP से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांगों में गन्ने का पहला भुगतान 5,000 रुपये प्रति टन, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये किलो और इथेनॉल का भाव 70 रुपये प्रति लीटर शामिल है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि पेराई देर से शुरू हुई तो कर्नाटक की मिलें महाराष्ट्र से गन्ना खरीद सकती हैं, जिससे राज्य की मिलों के लिए पेराई की अवधि और घट जाएगी।
UP के किसान के लिए इसका मतलब क्या है
महाराष्ट्र देश का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है, इसलिए वहां की हर हलचल का असर पूरे देश के चीनी बाजार पर पड़ता है। जब महाराष्ट्र की मिलें देर से चलती हैं तो बाजार में चीनी की उपलब्धता घटती है और भाव मजबूत रहते हैं। जुलाई में चीनी का औसत भाव 48.18 रुपये किलो था, जो अगस्त में बढ़कर 55.70 रुपये किलो हो गया था।
UP में भी पेराई सीजन इसी हफ्ते रफ्तार पकड़ रहा है। मुजफ्फरनगर जिले की आठ मिलों की पेराई तिथियां 24 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच घोषित हो चुकी हैं। UP के 122 मिलों वाले तंत्र में किसान के लिए सबसे अहम बात यही है कि पर्ची, तौल और भुगतान की निगरानी खुद करे। पर्ची मिलने पर मोबाइल पर आए SMS को संभालकर रखें, तौल पर्ची पर वजन की जानकारी जांचें, और भुगतान में देरी हो तो पहले अपनी समिति से संपर्क करें।
एक बात और साफ रखनी चाहिए। UP में 2026-27 सीजन के SAP की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सीजन के भाव को इस सीजन का भाव समझकर कोई सौदा या उधारी का फैसला न करें। महाराष्ट्र में चल रही भाव बढ़ोतरी की मांग आने वाले हफ्तों में पूरे देश के गन्ना भाव की बहस को दिशा देगी, और इस पर नजर रखने से अपनी फसल बेचने का सही समय चुनने में आसानी होगी।
मुख्य बातें
- महाराष्ट्र में 23 अक्टूबर तक 75 मिलों में पेराई शुरू, 26 लाख टन गन्ना पिसा, औसत रिकवरी 6.40 प्रतिशत।
- 163 मिलों को लाइसेंस जारी, लेकिन पश्चिमी महाराष्ट्र में आंदोलन के चलते कोल्हापुर में सिर्फ 3 निजी मिलें चालू।
- FRP 2026-27: 365 रुपये प्रति क्विंटल; किसान मांग: 5,000 रुपये प्रति टन पहला भुगतान, चीनी MSP 50 रुपये किलो, इथेनॉल 70 रुपये लीटर।
स्रोत: चीनीमंडी (24 अक्टूबर 2026), डेक्कन हेराल्ड (15 अक्टूबर 2026), गांव जंक्शन (अक्टूबर 2026)।
