गन्ना ₹4500 प्रति टन की मांग पर 2 दिन में बड़ी बैठक, यूपी किसानों को क्या मिलेगा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक किसान ने इस हफ्ते अपनी पर्ची देखते हुए वही सवाल पूछा जो आज महाराष्ट्र के हर गन्ना गांव में गूंज रहा है। गन्ने का सही दाम कब तय होगा, और मिल पैसा समय पर दे पाएगी या नहीं। कोल्हापुर में हुई बैठक ने इस सवाल को अब एक तारीख से जोड़ दिया है। दो दिन के भीतर गन्ना दाम पर हाई-लेवल बैठक होगी।
इस बैठक की सबसे बड़ी मांग गन्ने की पहली किस्त के तौर पर ₹4500 प्रति टन है। पहली किस्त का मतलब पेराई शुरू होने पर मिलने वाली शुरुआती रकम है। किसान संगठनों का कहना है कि खेती की लागत बढ़ गई है, इसलिए शुरुआती भुगतान भी उसी हिसाब से बढ़ना चाहिए। मिलों का कहना है कि जब तक चीनी की बिक्री कीमत नहीं बढ़ेगी, तब तक ज्यादा दाम देना मुश्किल होगा।
कोल्हापुर में क्या तय हुआ
कोल्हापुर के सरकारी विश्राम गृह में किसान प्रतिनिधियों और मिल प्रबंधनों के बीच बैठक हुई। इसमें स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के नेता राजू शेट्टी मौजूद थे। मिलों की ओर से शरद सहकारी चीनी मिल के अध्यक्ष राजेंद्र पाटिल यड्रावकर और पूर्व सांसद संजय मांडलिक ने पक्ष रखा। बैठक के बाद कोल्हापुर के संरक्षक मंत्री प्रकाश आबिटकर ने दो दिन बाद हाई-लेवल बैठक का ऐलान किया। आबिटकर ने कहा कि सूखे और गन्ने के रकबे को देखते हुए मिलों को जल्द पेराई शुरू करनी होगी, क्योंकि देर होने पर गन्ना सूखता है और वजन घटने का नुकसान किसान को उठाना पड़ता है।
₹4500 की मांग के पीछे किसान का तर्क
शेट्टी ने बैठक में एक वित्तीय विश्लेषण भी रखा, जो आने वाले सत्र में चीनी की अनुमानित कीमतों और पिछले साल की औसत बिक्री पर आधारित था। उनका जोर तीन बातों पर था। लागत बढ़ी है, रिकवरी घटी है और दर्ज वजन कम आ रहा है।
इस मांग को पुरानी ₹5000 प्रति टन की मांग से अलग समझें। वह मांग मिलों से बिना देर किए खरीद मूल्य घोषित करने की थी। कोल्हापुर में सामने आया आंकड़ा ₹4500 प्रति टन की पहली किस्त का है।
चीनी ₹50 किलो: वह कड़ी जो यूपी से भी जुड़ती है
बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य रहा। किसान संगठनों की मांग है कि चीनी का एमएसपी ₹31 से बढ़ाकर ₹50 प्रति किलो किया जाए। फरवरी 2019 के बाद इसमें बदलाव नहीं हुआ है। मिलों का कहना है कि बिक्री की न्यूनतम कीमत सालों पुरानी होने से वे ज्यादा दाम नहीं दे सकतीं। किसान संगठनों का जवाब है कि एमएसपी बढ़ने से मिलों की कमाई और उधारी की क्षमता सुधरेगी।
यही बिंदु महाराष्ट्र की खबर को उत्तर प्रदेश के किसान से जोड़ता है। चीनी का एमएसपी केंद्र सरकार तय करती है, इसलिए इसमें बदलाव का असर देश भर की मिलों की भुगतान क्षमता पर पड़ेगा।
पानी का विवाद भी बैठक की पृष्ठभूमि में
गन्ना दाम के साथ पानी का मुद्दा भी जुड़ गया है। प्रशासन ने कोल्हापुर और सांगली में कृषि पंपों से पानी उठाने पर रोक लगा दी है और बांधों से नदियों में पानी छोड़ना भी बंद कर दिया है। शनिवार सुबह संगठन के कार्यकर्ताओं ने सांगली में कृष्णा नदी के सूखे किनारे पर प्रदर्शन किया। शेट्टी का आरोप है कि कोयना बांध में करीब 90 प्रतिशत पानी होने के बावजूद पानी रोका गया है।
कर्नाटक और केंद्र में भी हलचल तेज
कर्नाटक में भी गन्ना दाम पर बड़ी बैठक होने जा रही है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 26 अक्टूबर को बेलगावी में किसानों और मिल प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है। यानी 2026-27 पेराई सत्र से पहले दाम का मुद्दा राष्ट्रीय बहस बन चुका है।
केंद्र स्तर पर केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भरोसा दिया है कि गन्ना मुद्दों की जांच समिति चीनी के एमएसपी में संशोधन पर 20 नवंबर से पहले फैसला लेगी। इससे पहले केंद्र ने पूर्व नीति आयोग सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी, जो रिकवरी की जांच, तौल की व्यवस्था और मिलों की वित्तीय स्थिति पर विचार कर रही है।
यूपी के किसान के लिए इसका सीधा मतलब
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, यहां 122 चीनी मिलें हैं। पश्चिमी यूपी में पेराई की तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में महाराष्ट्र और कर्नाटक में दाम पर जो भी फैसला होगा, वह यूपी की बहस में भी गूंजेगा।
सबसे जरूरी बात यह है कि 2026-27 सत्र के लिए यूपी के गन्ना मूल्य यानी एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) और सामान्य किस्म के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था। यह दर पिछले सत्र की है। इसे इस सत्र की दर समझने की भूल न करें।
इस बीच अपना गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड जांच लें। रकबा और किस्म का ब्योरा सही होना चाहिए, वरना पर्ची और भुगतान में दिक्कत आ सकती है। बैंक खाता सक्रिय और पहचान दस्तावेजों से जुड़ा रखें।
आगे क्या देखना होगा
अब सबकी नजर दो दिन बाद होने वाली हाई-लेवल बैठक पर है। पहली किस्त कितनी होगी, चीनी के एमएसपी पर केंद्र का रुख क्या होगा, और पेराई की व्यवस्था क्या बनेगी, यही तीन सवाल हैं। अगर बीच का रास्ता निकला तो पेराई सत्र बिना बड़े टकराव के आगे बढ़ सकता है। अगर गतिरोध बना रहा तो किसान संगठनों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रखी है।
मुख्य बातें
- दो दिन में गन्ना दाम पर हाई-लेवल बैठक होगी, ₹4500 प्रति टन की पहली किस्त पर बात होगी।
- चीनी एमएसपी ₹31 से ₹50 प्रति किलो करने की मांग है, समिति 20 नवंबर से पहले फैसला लेने का भरोसा दे चुकी है।
- यूपी के लिए 2026-27 एसएपी अभी बाकी है, 2025-26 की ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) दर को इस सत्र का भाव न समझें।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (24 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी, बिजनेस स्टैंडर्ड
