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लखनऊ में आज किसानों की महापंचायत: गन्ने का भाव ₹600 और 36 मांगों का ज्ञापन

✍️ Aamir Raza · 🗓 04 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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लखनऊ में आज किसानों की महापंचायत: गन्ने का भाव ₹600 और 36 मांगों का ज्ञापन

मुज़फ़्फ़रनगर से नौचंदी एक्सप्रेस 3 नवंबर की शाम को जब लखनऊ के लिए रवाना हुई, तो उसमें सिर्फ यात्री नहीं बैठे थे। उसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन गन्ना किसानों की उम्मीदें भी सवार थीं, जो पेराई सत्र शुरू होने के बाद भी अपने भाव का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (तोमर) की अगुवाई में किसान 4 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत कर रहे हैं, और इसमें गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने समेत 36 मांगों का ज्ञापन शासन-प्रशासन के सामने रखा जाएगा।

महापंचायत का स्थल लखनऊ के 17 महाराणा प्रताप मार्ग स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक का कार्यालय तय किया गया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव तोमर ने साफ कहा है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, पंचायत जारी रहेगी।

लखनऊ कूच की तैयारी गांव-गांव से हुई

इस महापंचायत की तैयारी अचानक नहीं हुई। अमर उजाला की 30 अक्टूबर की खबर के मुताबिक मुज़फ़्फ़रनगर के छपार क्षेत्र के गांव सिमरथी में जिला सचिव भीम सिंह के आवास पर बैठक हुई थी, जिसमें लखनऊ पंचायत को सफल बनाने की रणनीति बनी। उसी बैठक में संजीव तोमर ने कहा था कि 4 नवंबर को किसानों पर फर्जी मुकदमों के विरोध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक के कार्यालय पर पंचायत की जाएगी।

किथौड़ा गांव में भी किसानों से भागीदारी की अपील की गई, और देहरादून से 3 नवंबर को युवा प्रदेश अध्यक्ष अंकित चौहान के नेतृत्व में एक जत्था लखनऊ के लिए रवाना हुआ।

एक बात साफ रखनी जरूरी है। खबर लिखे जाने तक महापंचायत के नतीजे और प्रशासन की प्रतिक्रिया का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो सका है। इसलिए इसे पंचायत के एलान और उसकी मांगों की खबर के तौर पर पढ़ें, किसी समझौते या सरकारी फैसले के तौर पर नहीं।

36 मांगों में सबसे ऊपर गन्ने का भाव

ज्ञापन की 36 मांगों में गन्ने का मूल्य सबसे ऊपर है। संगठन चाहता है कि गन्ने का भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। दूसरी बड़ी मांग चीनी मिलों पर लंबित बकाया भुगतान को ब्याज सहित दिलाने की है, जो पिछले सत्र का भुगतान अटके होने के कारण किसानों की जेब से सीधे जुड़ी है।

इसके अलावा किसानों का संपूर्ण कृषि कर्ज माफ करने, कृषि नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली देने, कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी और खाद व डीजल पर 50 प्रतिशत सब्सिडी की मांग भी ज्ञापन में है। ट्रैक्टरों की आयु सीमा 30 वर्ष करने, किसान आयोग के गठन, युवाओं के लिए रोजगार, मेरठ में हाईकोर्ट बेंच और मुज़फ़्फ़रनगर में एम्स की स्थापना जैसी मांगें भी इसमें शामिल बताई गई हैं।

पूरे ज्ञापन की प्रमाणित प्रति अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

फर्जी मुकदमों का मुद्दा भी पंचायत के केंद्र में

गन्ने के भाव के साथ इस पंचायत का दूसरा बड़ा मुद्दा किसानों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमों का है। संगठन का आरोप है कि वन विभाग की ओर से किसानों पर ऐसे मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनकी समीक्षा होनी चाहिए। यही वजह है कि पंचायत का स्थल भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक का कार्यालय रखा गया है।

यहां भी संतुलन रखना जरूरी है। मुकदमों की संख्या और वन विभाग के आधिकारिक पक्ष की पुष्टि प्रकाशित रिपोर्टों में नहीं मिली है, इसलिए इसे संगठन के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

किसान के लिए इस पंचायत का असली मतलब क्या है

सवाल यह है कि लखनऊ की एक पंचायत से खेत में खड़े किसान को क्या मिलेगा। पहला असर भाव पर पड़ेगा। पेराई सत्र 2025-26 में अगेती गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य 400 रुपये और सामान्य का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। पेराई सत्र 2026-27 का नया भाव अभी घोषित नहीं हुआ है। अगर सरकार 600 रुपये की मांग मान ले, तो प्रति क्विंटल 200 रुपये से ज्यादा का फर्क पड़ेगा।

लेकिन यहां एक चेतावनी भी है। 600 रुपये संगठन की मांग है, सरकार का घोषित भाव नहीं। पर्ची पर जो भाव मिलेगा, वही असली होगा।

दूसरा असर भुगतान की रफ्तार पर हो सकता है। ब्याज सहित बकाया भुगतान की मांग अगर प्रशासन तक मजबूती से पहुंचती है, तो उन मिलों पर दबाव बढ़ेगा जिनका पिछला भुगतान अटका है। ऐसे में किसान अपनी पर्ची और तौल पर्ची संभालकर रखें, क्योंकि ब्याज का दावा तभी मजबूत होगा जब कागज पूरे होंगे।

तीसरा असर यह है कि पेराई सत्र के बीच में यह पंचायत सरकार को यह संदेश दे रही है कि भाव की घोषणा में देरी अब किसान को मंजूर नहीं। गन्ना विकास विभाग के मुताबिक प्रदेश की 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है।

आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजर

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अधिकारी किसानों के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हैं या नहीं। अगर ज्ञापन लिया जाता है और बातचीत शुरू होती है, तो भाव और भुगतान पर कोई ठोस संकेत मिल सकता है। अगर बातचीत टलती है, तो संगठन ने आंदोलन जारी रखने का संकेत पहले ही दे दिया है।

मुख्य बातें

  • भाकियू (तोमर) की अगुवाई में किसान 4 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत कर रहे हैं, जिसमें 36 मांगों का ज्ञापन रखा जाएगा।
  • सबसे बड़ी मांग गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करना है, जो अभी संगठन की मांग है, सरकार का घोषित भाव नहीं।
  • बकाया भुगतान ब्याज सहित दिलाने, कर्ज माफी, मुफ्त ट्यूबवेल बिजली और कथित फर्जी मुकदमों की समीक्षा भी ज्ञापन में शामिल है।

स्रोत: अमर उजाला (30 अक्टूबर 2026), शाह टाइम्स (4 नवंबर 2026), गूंज केसरी (1 नवंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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