3 घंटे धरना, आज लखनऊ में महापंचायत: गन्ने के भाव 600 रुपये समेत 4 मांगें

“गन्ने का भाव इस सत्र में कितना मिलेगा?” उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के मन में यह सवाल अब सबसे बड़ा हो गया है। जवाब की तलाश आज लखनऊ के गन्ना संस्थान में होगी, जहां किसान-मजदूर महापंचायत बुलाई गई है। लेकिन महापंचायत से ठीक एक दिन पहले की शाम ही माहौल तनावपूर्ण हो गया था। बैठक की तैयारियों के लिए पहुंचे किसान नेताओं को संस्थान के गेट बंद मिले, और भाकियू नेता राकेश टिकैत समेत किसान नेता गेट नंबर 1 पर ही करीब 3 घंटे तक धरने पर बैठ गए।
कल शाम गेट पर क्या हुआ था
22 अक्टूबर की शाम राकेश टिकैत और अन्य किसान नेता लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान पहुंचे थे। 23 अक्टूबर को होने वाली बैठक की तैयारी के लिए उनका सामान संस्थान परिसर के अंदर जाना था, लेकिन उसे अंदर नहीं जाने दिया गया। समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि गेट बंद कर दिया गया है।
इसी के विरोध में किसान नेता गेट नंबर 1 के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी हुई और चेतावनी दी गई कि गेट नहीं खोला गया तो वे रातभर वहीं बैठे रहेंगे। टिकैत ने पीटीआई-वीडियो से कहा कि किसानों की बैठक 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है और अगर परिसर के अंदर बैठक की अनुमति नहीं मिली तो किसान गेट के बाहर ही बैठक करेंगे। करीब 3 घंटे चले धरने के बाद संस्थान का गेट खोल दिया गया।
आज की महापंचायत: क्या एजेंडा है
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय कार्यालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार आज गन्ना संस्थान में किसान-मजदूर महापंचायत हो रही है। किसान इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक महापंचायत में गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी, गन्ना मूल्य भुगतान, बकाया गन्ना मूल्य और अन्य ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रदेश के सभी गन्ना उत्पादक जिलों और राजधानी क्षेत्र के किसानों के इसमें हिस्सा लेने की बात कही गई है।
इसी आंदोलन की पृष्ठभूमि में 18 अक्टूबर को भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने बागपत के दोघट में कहा था कि गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं होना चाहिए, वरना यह घाटे का सौदा साबित होगा। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि चीनी के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन किसान के गन्ने का भाव नहीं बढ़ाया जा रहा है।
600 रुपये की मांग: लागत का सवाल
किसान नेताओं का मुख्य तर्क लागत से जुड़ा है। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और पुराने भाव पर गन्ना उगाना घाटे में जा रहा है। भाकियू का कहना है कि गन्ना मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम कतई नहीं होना चाहिए।
वर्तमान स्थिति यह है कि 2025-26 पेराई सत्र के लिए राज्य परामर्शी मूल्य (SAP) अगेती किस्म का 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा अभी बाकी है। पेराई सत्र अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की तैयारी है, इसलिए भाव की घोषणा का इंतजार किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।
4 मांगें और किसान पर इनका असर
महापंचायत के केंद्र में चार मांगें हैं:
गन्ने के भाव में बढ़ोतरी। 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग इस बार सबसे मुखर है। भाव बढ़ने पर ही बढ़ती लागत के बीच गन्ना किसानों के लिए लाभकारी रहेगा।
बकाया भुगतान की निकासी। किसानों का आरोप है कि पिछले सत्र की बकाया राशि अभी भी कई जगहों पर नहीं मिली है। प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं और भुगतान में देरी की शिकायतें लगातार आती रही हैं।
धान खरीद केंद्रों का संचालन। टिकैत का दावा है कि धान किसानों को अपेक्षित दर से करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर धान बेचना पड़ रहा है। मांग है कि खरीद केंद्र खोले जाएं और खरीद सही तरीके से हो।
भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा। टिकैत ने आपत्ति जताई कि जमीन का अधिग्रहण मौजूदा समय में हो रहा है, लेकिन मुआवजे की गणना 2013 के सर्किल रेट पर की जा रही है। उनका कहना है कि इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है और सरकार उद्योगपतियों को प्राथमिकता दे रही है।
सरकार की ओर से अगला कदम क्या
अब सबकी नजर इस बात पर है कि महापंचायत से सरकार को क्या ज्ञापन सौंपा जाता है और 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा कब होती है। पेराई शुरू होने से पहले भाव तय न हुआ तो यह किसानों और मिलों दोनों के लिए अनिश्चितता पैदा करेगा।
मुख्य बातें
- लखनऊ के गन्ना संस्थान के गेट पर कल शाम राकेश टिकैत समेत किसान नेताओं ने करीब 3 घंटे धरना दिया, जिसके बाद गेट खोल दिया गया।
- आज 23 अक्टूबर को संस्थान में किसान-मजदूर महापंचायत हो रही है, जिसमें गन्ना भाव 600 रुपये समेत 4 मांगें उठ रही हैं।
- 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा अभी बाकी है; 2025-26 का SAP अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल था।
स्रोत: ThePrint Hindi (पीटीआई/भाषा), Times Now Hindi, Lokmat News (भाषा), Kisan India, Dainik Jagran — 18 से 23 अक्टूबर 2026
