लखनऊ गेट नंबर 1 पर 3 घंटे धरना: टिकैत बोले, पंचायत रोकी तो हर जिले में धरना होगा

शुक्रवार की किसान पंचायत से एक शाम पहले लखनऊ के गन्ना संस्थान का माहौल बिगड़ गया। 23 अक्टूबर की पंचायत की तैयारियों के लिए गुरुवार शाम पहुंचे किसान नेताओं को संस्थान का गेट बंद मिला। बैठक का सामान अंदर नहीं जाने दिया गया। बस इतनी सी बात पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत गेट नंबर 1 के सामने ही बैठ गए, और उनके साथ दर्जनों किसान नेता भी धरने पर उतर आए। यह धरना करीब 3 घंटे चला।
गेट खुला तो उसके बाद। लेकिन किसान नेताओं का तेवर कह रहा था कि मामला सिर्फ गेट खुलने से नहीं सुलझा। धरने के दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई, और टिकैत ने साफ चेतावनी दे दी: अगर शुक्रवार की पंचायत अंदर नहीं होने दी गई, तो किसान पंचायत गेट के बाहर ही होगी, और उसे रोकने की कोशिश हुई तो प्रदेश के हर जिला मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।
क्यों भड़के टिकैत: पंचायत की अनुमति ही नहीं मिली
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक गन्ना खरीद के बकाए का भुगतान, समर्थन मूल्य बढ़ाने समेत कई मुद्दों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को भाकियू की किसान पंचायत बुलाई गई थी। लेकिन इस पंचायत के आयोजन की अनुमति ही नहीं दी गई। प्रदेश भर से किसान गुरुवार शाम को ही गन्ना संस्थान पहुंचने लगे थे। जब अनुमति न मिलने पर गुरुवार शाम गेट बंद कर दिया गया, तो नाराज टिकैत मौके पर पहुंचे और धरना शुरू कर दिया।
टिकैत ने कहा, “किसान यूनियन अनुमति नहीं लेती है, किसान तो सूचना देते हैं। हमने संबंधित विभागों को सूचना भेज दी है।” उनका कहना था कि अगर कार्यक्रम करने से रोका गया तो शुक्रवार को किसान सभी जिलों में धरना देंगे। किसान नेता हरिनाम वर्मा के मुताबिक पंचायत शुक्रवार को तय स्थान गन्ना संस्थान पर ही होगी।
पीटीआई (भाषा) की रिपोर्ट में भी यही तस्वीर उभरी। टिकैत ने कहा कि अगर किसानों को परिसर के अंदर बैठक करने की इजाजत नहीं दी गई तो वे गेट के बाहर ही बैठक करेंगे। धरने के दौरान किसानों ने चेतावनी दी थी कि गेट नहीं खुला तो वे रातभर वहीं डटे रहेंगे।
ये 4 मांगें हैं धरने के केंद्र में
धरने और शुक्रवार की पंचायत, दोनों के केंद्र में किसानों की चार बड़ी मांगें हैं:
1. गन्ने का भाव बढ़ाओ: किसान लंबे समय से गन्ने के भाव में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। 21 अक्टूबर को बिजनौर की महापंचायत में टिकैत ने गन्ने का भाव कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी थी। अभी 2025-26 पेराई सत्र का SAP अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल है। 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा अभी बाकी है, और यही देरी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
2. बकाया भुगतान निकालो: गन्ना किसानों का भुगतान कई जगह अभी भी बकाया है, जिसमें पिछले सत्र की भी राशि शामिल है। पेराई सत्र सिर पर है, ऐसे में पुराना बकाया अटका रहना किसानों के लिए दोहरी मार है।
3. धान खरीद केंद्र चलाओ: टिकैत का गंभीर आरोप है कि धान किसानों को अपेक्षित कीमत से करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम मिल रहे हैं। मांग है कि धान खरीद केंद्र खोले जाएं और खरीद सही तरीके से हो, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके।
4. भूमि अधिग्रहण का सही मुआवजा: टिकैत ने आपत्ति जताई कि जमीन का अधिग्रहण वर्तमान समय में हो रहा है, लेकिन मुआवजे की गणना 2013 के सर्किल रेट पर की जा रही है। पुराने सर्किल रेट और मौजूदा बाजार दर में भारी अंतर है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है। टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों के बजाय उद्योगपतियों और बड़े कारोबारी समूहों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
यह धरना सिर्फ गेट खुलवाने की लड़ाई नहीं थी। पेराई सत्र अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है, और अभी तक इस सत्र का SAP घोषित नहीं हुआ। यानी गन्ना तौलने की घड़ी नजदीक है, लेकिन भाव का पता नहीं।
यह धरना बिजनौर महापंचायत के ठीक दो दिन बाद हुआ है, जहां 600 रुपये भाव की मांग प्रमुखता से उठी थी। यानी पश्चिमी यूपी से लेकर लखनऊ तक किसान संगठनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पर्ची मिलने से पहले भाव तय हो, यही हर गन्ना किसान की मांग है।
अब आगे क्या
फिलहाल स्थिति यह है कि गेट खुल गया है और किसान नेता पंचायत शुक्रवार को गन्ना संस्थान पर ही होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन अनुमति न मिलने की बात भी साफ है। अगर पंचायत रोकने की नौबत आई तो जिला मुख्यालयों पर घेराव की चेतावनी पहले से दी जा चुकी है। किसान भाइयों को सलाह है कि अपनी समिति से पर्ची और सट्टे की स्थिति की जानकारी लेकर रखें।
मुख्य बातें
- गन्ना संस्थान लखनऊ का गेट बंद मिलने पर टिकैत समेत किसानों ने गेट नंबर 1 पर करीब 3 घंटे धरना दिया, बाद में गेट खोला गया।
- किसान पंचायत की अनुमति न मिलने पर टिकैत की चेतावनी: पंचायत रोकी गई तो हर जिला मुख्यालय का घेराव होगा।
- चार मांगें: गन्ना भाव में बढ़ोतरी, बकाया भुगतान, धान खरीद केंद्रों का सुचारू संचालन और भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा।
- 2025-26 का SAP अगेती के लिए 400 और सामान्य के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल; 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी।
स्रोत: द प्रिंट हिंदी (पीटीआई/भाषा), दैनिक जागरण (स्वयं संवाददाता, लखनऊ), गांव जंक्शन
