₹600 गन्ना भाव की मांग पर लखनऊ की बड़ी बैठक, मिलें भी राजी — पर ऐलान कौन करेगा?

पेराई सत्र शुरू होने में अब गिनती के दिन बचे हैं। खेतों में गन्ना तैयार है, और हर किसान के मन में एक ही सवाल है: इस बार भाव क्या मिलेगा? इसका एक बड़ा जवाब बुधवार, 7 अक्टूबर को लखनऊ से आया। गन्ना आयुक्त कार्यालय में पेराई सत्र 2026-27 के मूल्य पर हुई बैठक में ₹600 प्रति क्विंटल की मांग पर चीनी मिलों के प्रतिनिधियों ने भी सहमति जताई।
7 अक्टूबर की बैठक: कौन आया, क्या-क्या हुआ
यह बैठक आगामी पेराई सत्र के गन्ना मूल्य निर्धारण को लेकर बुलाई गई थी। इसमें गन्ना आयुक्त, तीनों अपर गन्ना आयुक्त (प्रशासन, समितियां, क्रय), गन्ना मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, चीनी मिलों के प्रतिनिधि और मिल मालिक मौजूद रहे। सबसे ज्यादा जोर गन्ना मूल्य पर रहा।
सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड, बलरामपुर के अध्यक्ष रणवीर सिंह रन्नू भी बैठक में शामिल हुए। उन्होंने बढ़ती खेती की लागत और महंगाई का हवाला देते हुए गन्ना मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल करने की पुरजोर मांग रखी। रन्नू ने कहा कि किसानों के हित, उनकी आय बढ़ाने और गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए यह मांग मजबूती से उठाना उनका निरंतर प्रयास है।
“₹600 का रेट भी कम है”
बैठक का सबसे चर्चा वाला बयान रन्नू की ओर से आया। उन्होंने कहा कि लागत का सही हिसाब लगाया जाए तो ₹600 का रेट भी किसानों के लिए कम ही पड़ेगा। यानी किसान ₹600 को भी न्यूनतम सम्मानजनक दर मान रहे हैं।
दोनों रिपोर्टों के मुताबिक ₹600 की मांग पर सकारात्मक चर्चा हुई और मिलों के प्रतिनिधियों ने भी सहमति जताई। दाम बढ़ाने की मांग पर मिलों और किसानों के बीच आमतौर पर खींचतान होती है, इस बार मिलों का सुर नरम दिखा।
मिलों की हां के बाद भी फैसला सरकार का
यहां एक बात साफ समझ लीजिए, ताकि कोई भ्रम न रहे। बैठक में बनी सहमति का मतलब यह नहीं कि ₹600 का भाव घोषित हो गया है। गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) उत्तर प्रदेश सरकार कैबिनेट स्तर पर घोषित करती है। बैठक की सहमति सरकार तक सिफारिश के रूप में जाएगी, असली फैसला उसके बाद आएगा। पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
₹600 मिला तो आपकी जेब पर कितना फर्क पड़ेगा
हिसाब सीधा है। मान लीजिए आपके खेत में प्रति हेक्टेयर 800 क्विंटल गन्ना निकलता है। पिछले सत्र के एसएपी ₹400 (अगेती) के हिसाब से यह उपज 3,20,000 रुपये की होती। अगर भाव ₹600 प्रति क्विंटल हो गया, तो वही उपज 4,80,000 रुपये की हो जाएगी। यानी प्रति हेक्टेयर सीधे 1,60,000 रुपये का फायदा।
2 से 3 हेक्टेयर गन्ना बोने वाले किसान के लिए यह बढ़ोतरी 3 से 5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय का मतलब रखती है, इसीलिए ₹600 की मांग को आय बढ़ाने का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
अभी भाव का पूरा हिसाब, ताकि कोई भ्रम न रहे
- पेराई सत्र 2025-26: यूपी का एसएपी अगेती किस्म पर ₹400 प्रति क्विंटल था। इसमें पिछले साल ₹30 की बढ़ोतरी हुई थी।
- एफआरपी 2026-27: केंद्र सरकार ने इस सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। यह दर 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर आधारित है। रिकवरी 9.5 प्रतिशत से नीचे गई तो भी किसान को कम से कम ₹338.30 प्रति क्विंटल मिलेगा।
- एसएपी 2026-27: उत्तर प्रदेश में इस सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। यही वह ऐलान है जिसका किसान इंतजार कर रहे हैं।
- पड़ोसी राज्यों में: पंजाब में ₹416, हरियाणा में ₹415 और उत्तराखंड में ₹405 प्रति क्विंटल का भाव चल रहा है।
सिर्फ लखनऊ की आवाज नहीं, पूरे प्रदेश में यही मांग
लखनऊ की यह बैठक अकेली आवाज नहीं है। मुजफ्फरनगर की महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन (तोमर) ने ₹600 की मांग के साथ 33 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा था। अमरोहा की किसान महापंचायत ने ₹600 एसएपी का अल्टीमेटम दिया, हापुड़ की गन्ना समिति बैठक में ₹500 की मांग उठी, और लखीमपुर खीरी से राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने ₹600 तक दाम की मांग की है।
2027 में विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में किसानों की यह संगठित मांग सरकार के लिए नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
किसान अभी क्या करें
पहला काम: एसएपी घोषणा पर नजर रखें। ऐलान upcane.gov.in और caneup.in पर जारी होता है, समिति सचिव से पुष्टि कर लें।
दूसरा: पेराई से पहले अपनी गन्ना पर्ची, आपूर्ति कैलेंडर और बकाया भुगतान की स्थिति eGanna ऐप पर जरूर देख लें। तौल या पर्ची में गड़बड़ी दिखे तो समिति में पहले ही शिकायत दर्ज करा दें।
तीसरा: अपनी गन्ना समिति की बैठकों में जरूर जाएं। समितियों के प्रस्ताव ही गन्ना आयुक्त तक पहुंचते हैं, और लखनऊ तक आवाज पहुंचाने का रास्ता समिति से ही जाता है।
मुख्य बातें
- 7 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना आयुक्त कार्यालय में हुई बैठक में बलरामपुर समिति अध्यक्ष रणवीर सिंह रन्नू ने गन्ना मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल की मांग रखी, मिलों के प्रतिनिधियों ने भी सहमति जताई।
- बैठक की सहमति अंतिम फैसला नहीं है; पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा यूपी सरकार की ओर से अभी बाकी है।
- ₹600 का भाव मिला तो 800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज वाले किसान को प्रति हेक्टेयर करीब 1,60,000 रुपये का अतिरिक्त फायदा होगा।
स्रोत: कपिलवस्तु पोस्ट (7 अक्टूबर 2026), मीडिया दस्तक (7 अक्टूबर 2026), गाओंजंक्शन (गन्ना भाव विश्लेषण, सितंबर 2026), दैनिक जागरण (एसएपी 2025-26, अक्टूबर 2025), रूरल वॉइस/पीटीआई (एफआरपी 2026-27)।
