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2166 मशीनों पर सब्सिडी के बीच लखीमपुर में गन्ना पत्ती के लिए मल्चर की सलाह

✍️ Aamir Raza · 🗓 25 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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2166 मशीनों पर सब्सिडी के बीच लखीमपुर में गन्ना पत्ती के लिए मल्चर की सलाह

लखीमपुर खीरी के गन्ना किसानों को इस बार कटाई के बाद एक सीधी सलाह मिली है। खेत में बची सूखी पत्ती को आग मत लगाओ। कृषि विभाग का कहना है कि पत्ती को मल्चर से काटकर खेत में ही बिछा दो, ताकि वह सड़कर मिट्टी की ताकत बन जाए। 22 अक्टूबर को आई रिपोर्ट के मुताबिक जिले में किसानों को यही तरीका अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

बात छोटी लगती है, पर इसका असर सीधा किसान की जेब और खेत दोनों पर पड़ता है। पेराई का सीजन चल रहा है और कटाई के बाद खेत खाली करने की जल्दी हर किसान को रहती है। उसी जल्दी में कई बार पत्ती में आग लगा दी जाती है। विभाग का तर्क है कि यह जल्दी महंगी पड़ती है।

पत्ती जलाने से क्या बिगड़ता है

सूखी पत्ती जलने पर धुआं हवा में फैलता है। इससे भी बड़ा नुकसान जमीन के अंदर होता है। मिट्टी की ऊपरी परत में रहने वाले लाभदायक जीव आग की चपेट में आ जाते हैं। पत्ती में मौजूद पोषक तत्व भी खत्म हो जाते हैं, जबकि वही तत्व सड़ने पर मिट्टी को वापस मिल सकते थे।

मल्चर करता क्या है

मल्चर एक ऐसी मशीन है जो सूखी पत्ती को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में ही फैला देती है। नमी मिलने पर ये टुकड़े धीरे-धीरे सड़ते हैं और मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाते हैं। इससे मिट्टी की बनावट सुधरती है और लंबे समय में खेत की सेहत बनी रहती है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके विश्वकर्मा का कहना है कि किसान अक्सर खेत जल्दी खाली करने के चक्कर में अवशेष जला देते हैं, जबकि आधुनिक मशीनों से अवशेषों को खेत में ही संभाला जा सकता है। उनकी सलाह है कि पत्ती को कचरा समझने के बजाय मिट्टी सुधारने वाले संसाधन की तरह देखा जाए।

कटाई की मशीन का दूसरा मोर्चा

पत्ती की समस्या के साथ-साथ कटाई की मजदूरी भी किसानों की बड़ी चिंता है। मजदूर कम मिलते हैं, लागत बढ़ती है और पेराई के दिनों में देर होने का डर रहता है। इसीलिए हार्वेस्टर मशीनों की चर्चा भी तेज हुई है। महाराष्ट्र में 2026-27 सीजन के लिए करीब 2720 हार्वेस्टर उपलब्ध बताए गए हैं।

उत्तर प्रदेश में भी मशीनीकरण की रफ्तार बढ़ी है। जून 2025 में राज्य सरकार ने 62 जिलों में कुल 450 कंबाइन हार्वेस्टर वितरित किए थे। इसमें लखीमपुर खीरी को 15 मशीनें मिली थीं।

हार्वेस्टर के साथ एक सावधानी भी जुड़ी है। महाराष्ट्र के अनुभव से पता चला है कि मशीनी कटाई में गन्ने के साथ कचरा मिलने से वजन की माप में 6 से 7 प्रतिशत तक कमी की शिकायतें आई हैं।

सब्सिडी वाली खिड़की में क्या था

अक्टूबर के पहले हफ्ते में प्रदेश के कृषि विभाग ने मशीनों पर सब्सिडी के लिए बुकिंग खोली थी। सरकारी बयान के मुताबिक 7 से 20 अक्टूबर तक किसान agriculture.up.gov.in पोर्टल पर आवेदन कर सकते थे। किसान कॉर्नर में यंत्र बुकिंग शुरू करें वाले विकल्प से बुकिंग की जाती थी।

आंकड़े देखें तो सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के तहत 2166 मशीनों पर सब्सिडी की बात कही गई थी। फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत 1755 मशीनों का जिक्र था। कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक के लिए 10-10 लाख रुपये तक की मदद बताई गई थी, जबकि अवशेष प्रबंधन के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 30 लाख रुपये तक का प्रावधान था।

मल्चर इसी अवशेष प्रबंधन वाली श्रेणी में आता है। इस योजना की स्वीकृत मशीनों की सूची में पैडी स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर और मल्चर शामिल हैं। सामान्य नियमों के तहत व्यक्तिगत किसानों को 50 प्रतिशत तक और कस्टम हायरिंग सेंटर को 80 प्रतिशत तक की मदद का प्रावधान है। जिलों में लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आने पर लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी से होता है।

जिस किसान ने बुकिंग नहीं की, वह क्या करे

20 अक्टूबर वाली खिड़की अब बंद हो चुकी है। जिस किसान ने आवेदन नहीं किया, उसे निराश होने की जरूरत नहीं है। पहला काम यह है कि पोर्टल पर ताजा स्थिति खुद जांच लें, क्योंकि अगली खिड़की या नई सूचना वहीं आएगी। दूसरा, अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क करके यह पूछें कि मल्चर या हार्वेस्टर के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की सुविधा कहां उपलब्ध है।

जो किसान मशीन खरीद नहीं सकता, उसके लिए किराए का रास्ता सबसे व्यावहारिक है। कस्टम हायरिंग सेंटर से मल्चर किराए पर लेकर पत्ती का काम निपटाया जा सकता है। गांव के कई किसान मिलकर एक साथ बुकिंग करें तो मशीन का चक्कर भी सस्ता पड़ता है। मशीन खरीदने से पहले विक्रेता के दावे पर नहीं, विभाग की सूची और सब्सिडी की शर्तों पर भरोसा करें।

मुख्य बातें

  • लखीमपुर खीरी में किसानों से गन्ने की सूखी पत्ती जलाने के बजाय मल्चर इस्तेमाल करने को कहा गया है।
  • मल्चर पत्ती को काटकर खेत में बिछा देता है, जिससे जैविक पदार्थ बढ़ता है और मिट्टी की सेहत सुधरती है।
  • अक्टूबर में 2166 मशीनों वाली सब्सिडी बुकिंग खिड़की खुली थी, जिसमें अवशेष प्रबंधन की 1755 मशीनें भी शामिल थीं।

स्रोत: चिनीमंडी (22 अक्टूबर 2026), पीटीआई (6 अक्टूबर 2026), कृषि जागरण (फसल अवशेष प्रबंधन योजना)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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