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कुशीनगर के 3000 किसानों को बड़ी राहत: रेता के सभी केंद्र अब खड्डा मिल को मिले

✍️ Aamir Raza · 🗓 25 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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कुशीनगर के 3000 किसानों को बड़ी राहत: रेता के सभी केंद्र अब खड्डा मिल को मिले

गंडक नदी के पार बसे रेता क्षेत्र के किसानों की एक पुरानी मांग इस पेराई सत्र में पूरी हो गई है। चालू पेराई सत्र 2026-27 के लिए क्षेत्र के सभी गन्ना क्रय केंद्र आईपीएल खड्डा चीनी मिल को आवंटित कर दिए गए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि रेता के करीब तीन हजार किसानों को अपना गन्ना तौल कराने के लिए अब महराजगंज जिले की गड़ौरा चीनी मिल का रुख नहीं करना पड़ेगा। गन्ना अब अपने ही जिले की खड्डा मिल को जाएगा।

अमर उजाला की 23 अक्टूबर की खबर के मुताबिक जारी आवंटन आदेश में बालगोविंद छपरा, सोहगीबरवा, शिवपुर और हरिहरपुर क्रय केंद्र खड्डा मिल के लिए सुरक्षित किए गए हैं। इन केंद्रों से जुड़े किसानों को अपनी उपज की तौल के लिए अब दूर नहीं जाना पड़ेगा। हिंदुस्तान की खबर में गांवों का दायरा और साफ बताया गया है। शिवपुर, मरिचहवा, बसंतपुर, नारायणपुर, हरिहरपुर और भैंसहा के बालगोविंद छपरा में करीब तीन हजार किसान गन्ने की खेती करते हैं। इन्हीं किसानों का गन्ना अब तक गड़ौरा मिल को आवंटित था।

किसान क्यों चाहते थे केंद्र बदलना

रेता के किसानों की शिकायत पुरानी थी। उनका कहना था कि गड़ौरा मिल से जुड़े रहने पर गन्ने की तौल समय पर नहीं होती थी और भुगतान में भी देरी होती थी। खेत से दूर मिल तक गन्ना पहुंचाना अपने आप में एक खर्च और झंझट था। ऊपर से तौल में देरी का मतलब था पर्ची में देरी, और पर्ची में देरी का मतलब था भुगतान में देरी। यही चक्र हर सत्र किसानों को परेशान करता था।

हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक गड़ौरा चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र का भुगतान भी बकाया है। यही वजह थी कि रेता के किसान वहां गन्ना देने के इच्छुक नहीं थे। जब पिछले सत्र का पैसा ही अटका हो, तो नए सत्र में उसी मिल को गन्ना देना किसी किसान के लिए आसान फैसला नहीं होता। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र बदलने की मांग जोर पकड़ती गई।

किसके प्रयास से हुआ फैसला

यह बदलाव एक दिन में नहीं हुआ। किसानों ने सांसद विजय कुमार दुबे, विधायक विवेकानंद पांडेय और गन्ना समिति अध्यक्ष सुप्रियमय मालवीय से खड्डा चीनी मिल को गन्ना आवंटित कराने की मांग की थी। मांग उठाने वालों में रमेश शुक्ला, इजहार अंसारी, सुचिन्द्र सिंह, ब्रह्मा यादव, नर्वदेश्वर सिंह, लालू भगत, नरसिंह पासवान, बेचन अंसारी, कंचन गोंड, हीरामन और नथुनी जैसे किसान शामिल थे।

इन जनप्रतिनिधियों और समिति के प्रयासों से चालू पेराई सत्र में क्षेत्र के सभी केंद्र खड्डा मिल को आवंटित कर दिए गए। गन्ना समिति के अध्यक्ष सुप्रियमय मालवीय ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे किसान संघर्ष की जीत बताया और कहा कि रेता क्षेत्र के किसानों को इससे बड़ी सहूलियत होगी। किसानों ने भी फैसले पर सांसद, विधायक और केन यूनियन चेयरमैन के प्रति आभार जताया है।

गड़ौरा मिल का क्या हुआ

रेता के केंद्रों का खड्डा मिल को जाना अकेली घटना नहीं है। इस सत्र में गड़ौरा चीनी मिल को गन्ने का आवंटन ही नहीं मिला है। जागरण की खबर के मुताबिक गन्ना आयुक्त ने मिल के पक्ष में आवंटन के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी। इसके बाद गड़ौरा क्षेत्र के किसानों का गन्ना कुशीनगर की हाटा और रामकोला, गोरखपुर की पिपराइच तथा महराजगंज की सिसवा बाजार चीनी मिलों को आवंटित किया गया था।

जागरण के मुताबिक गड़ौरा मिल पर किसानों का करीब 7.72 करोड़ रुपये बकाया है और मिल से करीब 9,038 किसान जुड़े हैं। मिल की पेराई क्षमता 24 घंटे में 50 हजार क्विंटल बताई जाती है। क्षमता होने के बावजूद आवंटन न मिलने से मिल के संचालन पर संकट गहरा गया है। रेता के किसानों के लिए इसका मतलब यह है कि गड़ौरा मिल से जुड़ी अनिश्चितता अब उनके सत्र पर असर नहीं डालेगी।

किसान के लिए इसका व्यावहारिक मतलब क्या है

पहली और सबसे बड़ी बात दूरी की है। केंद्र अपने इलाके में होने से गन्ना ढुलाई का खर्च घटेगा और ट्रैक्टर-ट्रॉली के चक्कर कम लगेंगे। तौल समय पर होने की उम्मीद बढ़ेगी, क्योंकि केंद्र पास होगा तो किसान खुद जाकर अपनी पर्ची और तौल की स्थिति पर नजर रख सकेगा।

दूसरी बात भुगतान की है। खड्डा मिल को गन्ना देने का मतलब है कि भुगतान की जिम्मेदारी अब एक ऐसी मिल की होगी जो इस सत्र में पेराई कर रही है। फिर भी किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए। अपनी पर्ची संभालकर रखें, तौल की पर्ची पर वजन और तारीख जरूर जांचें, और गड़बड़ी दिखे तो तुरंत केंद्र प्रभारी या गन्ना समिति के सचिव को बताएं।

तीसरी बात यह है कि केंद्र बदलने से पहले यह जरूर पुष्टि कर लें कि आपका गांव किस केंद्र से जुड़ा है। आवंटन आदेश में बालगोविंद छपरा, सोहगीबरवा, शिवपुर और हरिहरपुर जैसे केंद्रों का नाम है, लेकिन अपने गांव का केंद्र समिति से एक बार जरूर पूछ लें, ताकि पेराई शुरू होने पर कोई भ्रम न रहे।

आगे क्या देखना होगा

केंद्र आवंटन हो जाना आधी जीत है। असली परीक्षा तब होगी जब पेराई शुरू होगी और तौल व भुगतान का क्रम चलेगा। रेता के किसानों को इस सत्र में यह देखना होगा कि खड्डा मिल के केंद्रों पर तौल सच में समय पर होती है या नहीं, और भुगतान कितने दिन में खाते में पहुंचता है। अगर व्यवस्था सुधरती है, तो यह फैसला आने वाले सत्रों के लिए भी एक मिसाल बनेगा।

मुख्य बातें

  • कुशीनगर के रेता क्षेत्र के करीब 3000 किसानों का गन्ना अब आईपीएल खड्डा चीनी मिल को जाएगा।
  • बालगोविंद छपरा, सोहगीबरवा, शिवपुर और हरिहरपुर समेत सभी क्रय केंद्र खड्डा मिल को आवंटित हुए हैं।
  • पहले ये केंद्र गड़ौरा मिल से जुड़े थे, जहां तौल में देरी और पिछले सत्र के भुगतान बकाया की शिकायत थी।
  • सांसद विजय कुमार दुबे, विधायक विवेकानंद पांडेय और गन्ना समिति अध्यक्ष सुप्रियमय मालवीय के प्रयासों से यह फैसला हुआ।

स्रोत: अमर उजाला (23 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान (23 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (गड़ौरा मिल आवंटन खबर)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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