गन्ने के साथ मसूर बोओ: कुशीनगर में 107 क्विंटल बीज मुफ्त, ₹55,000 तक का फायदा

कुशीनगर के गन्ना किसानों के लिए आज अच्छी खबर आई है। जिले के कृषि विभाग ने मसूर का 107 क्विंटल बीज पूरी तरह निःशुल्क बांटने की व्यवस्था की है, ताकि किसान शरदकालीन गन्ने के साथ मसूर की सहफसली खेती अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकें। गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र गोरखपुर के पूर्व सहायक निदेशक और गन्ना विकास सलाहकार ओम प्रकाश गुप्ता का कहना है कि इस तरह एक एकड़ खेत से करीब 6 क्विंटल मसूर मिल सकता है और 50 से 55 हजार रुपये तक का अतिरिक्त मुनाफा संभव है।
नवंबर से फरवरी: गन्ना सुस्त, बीच की जमीन काम की
सहफसली खेती की सलाह सिर्फ मुफ्त बीज की वजह से नहीं आ रही। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार बताते हैं कि नवंबर से फरवरी तक का समय गन्ने की सुस्तावस्था का होता है। इन महीनों में गन्ना बहुत धीमी गति से बढ़ता है, इसलिए खेत के बीच की खाली पट्टी बेकार पड़ी रहती है। ट्रेंच विधि से गन्ना लगाने पर करीब 120 सेंटीमीटर का गैप रहता है, जिसका उपयोग किसान सहफसली खेती के लिए कर सकते हैं।
इस साल कुशीनगर में असमय हुई भारी वर्षा और बाढ़ ने कई किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में एक ही खेत में दो फसल लेना जोखिम बंटाने का भी तरीका है। अगर एक फसल कमजोर हो जाए, तो दूसरी से लागत की भरपाई हो जाती है। मसूर जैसी दलहनी फसल उर्वराशक्ति बढ़ाती है, यानी जमीन को भी फायदा और जेब को भी।
कितना बीज, कौन सी किस्म, कैसे बुवाई
ओम प्रकाश गुप्ता के अनुसार गन्ने की दो कतारों के बीच मसूर की दो कतारों की बुवाई करनी चाहिए। एक एकड़ के लिए करीब 10 किलोग्राम मसूर का बीज काफी होता है। बीज को सीधे खेत में डालने से पहले 10 किलोग्राम बीज को 200 ग्राम राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना जरूरी है। यह उपचार जड़ों में नाइट्रोजन जमाने वाली गांठों को बढ़ाता है, जिससे पौधे को ज्यादा ताकत मिलती है।
मसूर की प्रमुख प्रजातियों में के-75, पंत मसूर-4, नरेंद्र मसूर-1, डीपीएल-62 और शेखर-3 शामिल हैं। कृषि विभाग इस बार कोटा-4 किस्म का बीज बांट रहा है, जो 130 से 135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। गुप्ता ने दलहनी फसलों की तकनीकी जानकारी के लिए भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कल्याणपुर-कानपुर जाकर वैज्ञानिकों से जानकारी ली है और किसानों से वैज्ञानिक तरीके से बुवाई, सही दूरी और समय पर काम करने की अपील की है।
उनके अनुमान के मुताबिक सहफसली के तौर पर एक एकड़ में करीब 6 क्विंटल मसूर की उपज 130 से 135 दिनों में मिल सकती है। अकेले मसूर बोने पर एक एकड़ से 7 से 8 क्विंटल तक उत्पादन होता है। खाली खेत की अलग से तैयारी नहीं करनी पड़ती, इसलिए लागत भी सीमित रहती है।
पोषण का फायदा भी, किसानों की जेब का भी
मसूर की डिमांड बाजार में हमेशा बनी रहती है और यह पोषण का बड़ा स्रोत है। ओम प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि 100 ग्राम अंडे में करीब 12 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि 100 ग्राम मसूर की दाल में करीब 24 से 25 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसलिए मसूर का उत्पादन बढ़ाना किसानों की सेहत और आय, दोनों के लिए अच्छा है। गन्ने का बीज गन्ना विभाग और मसूर का बीज कृषि विभाग उपलब्ध करा रहा है, यानी दोनों व्यवस्थाएं विभागों की ओर से अलग-अलग संभाली जा रही हैं।
मुफ्त बीज कैसे मिलेगा
जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार सिंह के अनुसार जिले में 107 क्विंटल मसूर का बीज सभी राजकीय कृषि बीज गोदामों पर उपलब्ध है। किसान कृषि विभाग के पोर्टल से टोकन प्राप्त कर अपने विकासखंड के राजकीय कृषि बीज गोदाम से बीज निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। टोकन लेने के बाद अपने ब्लॉक के गोदाम जाकर बीज लेना होगा।
इसके अलावा सरकार दो तरह से बीज उपलब्ध करा रही है। कृषि विभाग 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज दे रहा है और फ्री मिनी किट भी बांट रहा है। सरसों, तोरिया, मसूर और मटर की मिनी किट प्रदेश भर के राजकीय कृषि बीज भंडारों पर उपलब्ध हैं। कुशीनगर में रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं, चना, मटर, मसूर, जौ, सरसों और अलसी के बीजों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी और मिनी किट की व्यवस्था की गई है। किसान राज्य सरकार के agridarshan.up.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं, जहां बीज का आवंटन ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा।
मुख्य बातें
- कुशीनगर में कृषि विभाग मसूर का 107 क्विंटल बीज मुफ्त दे रहा है, पोर्टल से टोकन लेकर अपने विकासखंड के गोदाम से लें
- गन्ने की दो कतारों के बीच मसूर की दो कतारें बोएं, 10 किलो बीज को 200 ग्राम राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें
- एक एकड़ से करीब 6 क्विंटल मसूर और 50 से 55 हजार रुपये तक अतिरिक्त मुनाफे का अनुमान, कोटा-4 किस्म 130-135 दिन में तैयार
स्रोत: News Track (18 अक्टूबर 2026, कुशीनगर), ETV Bharat (अक्टूबर 2026, सहफसली खेती रिपोर्ट), कृषक जगत (20 सितंबर 2026, कुशीनगर बीज अनुदान)
