कृषि यंत्रों पर 80% तक अनुदान: बुकिंग कल बंद हुई, अब चयन कैसे होगा

जिन किसानों ने कृषि यंत्रों पर सरकारी अनुदान के लिए ऑनलाइन बुकिंग की थी, उनके लिए कल की रात अहम थी। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की दूसरे चरण की बुकिंग 20 अक्टूबर की रात 12 बजे बंद हो गई। यह मौका 7 अक्टूबर से खुला था। अब सवाल यही है कि बुकिंग करने वालों का चयन कैसे होगा, और जो किसान इस बार चूक गए, वे आगे क्या करें।
खेती की लागत हर साल बढ़ रही है। डीजल, मजदूरी और खाद के दाम देखकर गन्ना किसान भी अब मशीनों की तरफ देख रहे हैं। रोटावेटर से खेत की तैयारी हो या ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव, सही यंत्र समय और पैसा दोनों बचाता है। इसलिए अनुदान की यह योजना खास मायने रखती है।
बुकिंग बंद, अब चयन की बारी
कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि यंत्रीकरण की योजनाओं के तहत दूसरी बार बुकिंग का मौका दिया था। इसमें सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन और फसल अवशेष प्रबंधन योजना के यंत्र शामिल थे। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक किसान 7 अक्टूबर दोपहर 12 बजे से 20 अक्टूबर की रात 12 बजे तक विभागीय पोर्टल पर आवेदन कर सकते थे।
अब विभाग बुकिंग के आंकड़ों के आधार पर चयन करेगा। पहले चरण में अपनाई गई व्यवस्था के अनुसार जिन यंत्रों के लिए तय लक्ष्य से ज्यादा बुकिंग आई, वहां लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी से किया गया था। कम बुकिंग वाले यंत्रों पर आवेदन सीधे कन्फर्म कर दिए गए थे। इस बार भी चयन विभाग के तय नियमों के अनुसार होगा। जिन किसानों ने आवेदन किया है, उन्हें अपने आवेदन की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और विभाग से आने वाली सूचना का इंतजार करना चाहिए।
कितना अनुदान मिलता है
योजना के तहत अलग-अलग यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। गाँव कनेक्शन की रिपोर्ट के अनुसार कृषि यंत्र बैंक, कस्टम हायरिंग सेंटर, किसान ड्रोन और फसल अवशेष प्रबंधन के उपकरण इस दायरे में आते हैं।
ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर और पावर टिलर पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है। यानी करीब 10 लाख रुपये का ट्रैक्टर अनुदान के बाद लगभग आधी कीमत पर पड़ सकता है। किसान ड्रोन पर 50 प्रतिशत या अधिकतम 5 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान है। कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक जैसी सामूहिक इकाइयों के लिए 10 से 30 लाख रुपये तक के प्रावधान रखे गए हैं। अनुदान की रकम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे किसान के बैंक खाते में आती है।
गन्ना किसानों के काम के यंत्र
गन्ने की खेती में मजदूरी सबसे बड़ा खर्च है। कटाई, बंधाई और ढुलाई में ही लागत का बड़ा हिस्सा चला जाता है। ऐसे में कुछ यंत्र खास काम के हैं।
रोटावेटर और पावर टिलर से खेत की तैयारी तेज होती है, खासकर पेराई के बाद जल्दी बुवाई करनी हो तो। ड्रोन से कीटनाशक और फफूंदनाशक का छिड़काव कम पानी और कम समय में हो जाता है। गन्ने की पत्ती के प्रबंधन के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र काम आते हैं, ताकि पत्ती जलाने की नौबत न आए। पशु पालने वाले किसानों के लिए चैफ कटर चारे की कटाई आसान करता है, और इस समय पश्चिमी यूपी में चारे की किल्लत को देखते हुए यह और भी जरूरी हो गया है। जिन किसानों के पास अपना यंत्र खरीदने की गुंजाइश नहीं, वे कस्टम हायरिंग सेंटर से किराए पर मशीन ले सकते हैं।
आवेदन कैसे किया जाता है
बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन होती है। किसान agriculture.up.gov.in पर जाकर किसान कॉर्नर में “यंत्र बुकिंग प्रारम्भ” विकल्प चुनते हैं। आवेदन के लिए कृषि विभाग में दर्ज मोबाइल नंबर से टोकन लिया जाता है।
आवेदन से पहले कुछ दस्तावेज तैयार रखें: आधार कार्ड, जमीन की खतौनी, बैंक पासबुक और मोबाइल नंबर। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार 10,001 रुपये से एक लाख रुपये तक अनुदान वाले यंत्रों पर 2,500 रुपये और एक लाख से अधिक अनुदान वाले यंत्रों पर 5,000 रुपये जमानत धनराशि तय है। किसी उलझन पर अपने जिले के उप कृषि निदेशक कार्यालय से जानकारी ली जा सकती है।
इस बार चूक गए तो आगे क्या करें
बुकिंग बंद हो चुकी है, लेकिन तैयारी अभी से शुरू कर दें। agriculture.up.gov.in पर पंजीकरण और मोबाइल नंबर अपडेट रखें, क्योंकि टोकन उसी नंबर पर आता है। आधार, खतौनी और बैंक खाते के कागज संभालकर रखें, और जिले के उप कृषि निदेशक कार्यालय से अगले चरण की जानकारी लेते रहें। विभाग चरणों में बुकिंग खोलता है, इसलिए तैयार किसान अगले मौके पर तुरंत आवेदन कर पाता है।
दो सावधानियां
अनुदान सीधे खाते में आता है, इसलिए कोई भी व्यक्ति या एजेंट अनुदान दिलाने के नाम पर पैसे मांगे तो समझ जाएं कि यह ठगी है। आवेदन खुद पोर्टल पर करें या कृषि विभाग के कार्यालय की मदद लें। दूसरा, यंत्र खरीदने से पहले उसकी जरूरत और कीमत का हिसाब जरूर लगाएं। अनुदान के बाद भी अपनी जेब से रकम लगेगी, इसलिए वही यंत्र चुनें जो आपके खेत और काम के हिसाब से सही हो।
मुख्य बातें
- यूपी में कृषि यंत्रों पर अनुदान की दूसरे चरण की बुकिंग 7 से 20 अक्टूबर तक चली, अब चयन की प्रक्रिया होगी।
- ट्रैक्टर-रोटावेटर पर 40-50%, ड्रोन पर 50% (अधिकतम 5 लाख रुपये) तक अनुदान; कुल दायरा 40 से 80 प्रतिशत।
- आवेदन agriculture.up.gov.in पर ऑनलाइन होता है; अनुदान DBT से सीधे बैंक खाते में आता है।
स्रोत: दैनिक जागरण (10 अक्टूबर 2026), गाँव कनेक्शन (अगस्त 2026), ABP (14 अक्टूबर 2026)
