को.0238 से 9.44% ज्यादा उपज वाली नई गन्ना किस्म को मंजूरी, लाल सड़न से सुरक्षित

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान पिछले कई सालों से एक ही दर्द झेल रहे हैं। खेत में खड़ी फसल हरी-भरी दिखती है, पर अंदर से लाल सड़न रोग उसे खोखला कर देता है। को.0238 जैसी कभी भरोसेमंद किस्में भी इस बीमारी के सामने झुक गईं। अब गन्ना विभाग ने इस परेशानी का सीधा जवाब दिया है।
29 सितंबर को गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में ‘उत्तर प्रदेश बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति’ की बैठक हुई, जिसमें गन्ने की चार नई किस्मों को खेती के लिए औपचारिक मंजूरी दे दी गई। सबसे ज्यादा उम्मीद शाहजहांपुर के उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद की अगेती किस्म को.शा. 23232 से जताई जा रही है। इसकी औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज हुई है, जो मानक किस्म को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। विभाग के प्रेस नोट के अनुसार यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी भी है, यानी पश्चिमी यूपी के रोग-प्रभावित इलाकों के लिए यह खासतौर पर मुफीद हो सकती है।
शरदकालीन बुवाई के ठीक पहले आई खबर
अक्टूबर का महीना गन्ना किसानों के लिए बीज चुनने का सबसे अहम महीना है और यह फैसला अगले डेढ़ साल की कमाई तय करता है। पुरानी किस्मों में उपज घिस-पिट गई है, ऐसे में यह फैसला किसानों को एक ठोस विकल्प देता है।
लेकिन यहां एक बात समझ लेनी जरूरी है। मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं कि बाजार में तुरंत स्वस्थ बीज गन्ना मिल जाएगा। अधिकृत स्रोतों — गन्ना शोध परिषद, चीनी मिलों के नर्सरी फार्म और गन्ना समितियों — से ही बीज लेने पर किस्म की असली खासियत मिलेगी। खुले बाजार से मिला बीज अक्सर मिश्रित या रोगग्रस्त होता है।
बैठक में क्या-क्या तय हुआ
बैठक में वैज्ञानिकों ने प्रस्तावित किस्मों की उपज, पोल प्रतिशत और अन्य विशेषताओं के आंकड़े पेश किए। प्रगतिशील किसानों और चीनी मिल प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद चारों किस्मों को खेती के लिए अनुमोदित कर दिया गया। इनमें को.शा. 23232 और को.लख. 21201 अगेती हैं, जबकि को.शा. 19235 और को.शा. 18232 मध्य एवं देर से पकने वाली हैं।
किस्म-दर-किस्म: आंकड़े क्या कहते हैं
को.शा. 23232 इस फैसले की सबसे बड़ी खबर है। पौधा गन्ने की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर — को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक। पेड़ी की औसत उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.0238 से 3.16 प्रतिशत ज्यादा है। चीनी परता की बात करें तो नवंबर, जनवरी और मार्च में इसका पोल प्रतिशत केन क्रमशः 13.10, 13.77 और 14.31 दर्ज हुआ — तीनों महीनों में को.0238 से आगे। विभाग के प्रेस नोट के अनुसार यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है और इसे पूरे प्रदेश में खेती के लिए स्वीकृत किया गया है।
को.लख. 21201 लखनऊ संस्थान की अगेती किस्म है। इसकी औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.0238 के लगभग बराबर है। लेकिन चीनी परता में यह आगे है — इसका पोल इन केन 13.94 प्रतिशत पाया गया, जबकि को.0238 में 13.71 प्रतिशत था। यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता रखती है और इसे भी पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अवमुक्त किया गया है।
को.शा. 19235 और को.शा. 18232 मध्य एवं देर से पकने वाली किस्में हैं। को.शा. 19235 की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर और को.शा. 18232 की 92.38 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज हुई है। ये उन किसानों के लिए विकल्प हैं जो देर से बुवाई करते हैं या जिनके क्षेत्र में पेराई देर से शुरू होती है।
पुरानी बनाम नई: किसान के लिए फैसला कितना आसान
| किस्म | औसत उपज (टन/हेक्टेयर) | को.0238 से अंतर | लाल सड़न से सुरक्षा |
|---|---|---|---|
| को.0238 (मानक) | आधार किस्म | — | कमजोर |
| को.शा. 23232 | 95.56 | +9.44% | रोगरोधी |
| को.लख. 21201 | 86.57 | लगभग बराबर | उच्च प्रतिरोधक |
| को.शा. 18232 | 92.38 | ज्यादा | — |
| को.शा. 19235 | 87.58 | ज्यादा | — |
उपज के मामले में को.शा. 23232 सबसे आगे है और लाल सड़न वाले इलाकों में को.शा. 23232 या को.लख. 21201 चुनना समझदारी होगी। देर से पेराई वाले क्षेत्रों में को.शा. 18232 और को.शा. 19235 बेहतर फिट बैठ सकती हैं।
अब किसानों को क्या करना चाहिए
पहला कदम बीज का है। अपनी गन्ना समिति या नजदीकी चीनी मिल के नर्सरी फार्म से संपर्क करें और इन किस्मों के बीज गन्ने की उपलब्धता पूछें। नई किस्मों का बीज शुरुआत में सीमित मिलता है, इसलिए देरी करने पर इस सीजन में बीज न मिलने का खतरा रहता है। दूसरा, बीज उपचार को न भूलें — रोगमुक्त बीज से ही अच्छी शुरुआत होती है। तीसरा, अपनी मिट्टी और पेराई-कैलेंडर के हिसाब से किस्म चुनें।
शोध परिषद लगातार नई किस्में तैयार कर रही है — सितंबर में ट्रेड शो में भी 4 किस्मों का प्रदर्शन हुआ था। अब जिम्मेदारी किसानों पर है कि वे सही स्रोत से बीज लें और नई किस्मों को अपनी खेती का हिस्सा बनाएं।
मुख्य बातें
- 29 सितंबर की बैठक में गन्ने की 4 नई किस्मों को खेती के लिए मंजूरी मिली, जिसमें को.शा. 23232 (95.56 टन/हेक्टेयर) और को.लख. 21201 (86.57 टन/हेक्टेयर) अगेती हैं।
- को.शा. 23232 लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है और को.0238 से 9.44% ज्यादा उपज देती है — रोग-प्रभावित क्षेत्रों के लिए सबसे मुफीद विकल्प।
- शरदकालीन बुवाई के लिए बीज जल्द बुक करें, सिर्फ अधिकृत स्रोतों से ही लें और अपनी पेराई-कैलेंडर के हिसाब से किस्म चुनें।
स्रोत: किसान तक (1 अक्टूबर 2026), प्रभात खबर (30 सितंबर 2026)
