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आज जेवर में किसान अधिकार यात्रा का समापन: 6 दिन, 6 जिलों में उठे गन्ना किसानों के 6 सवाल

✍️ Aamir Raza · 🗓 07 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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आज जेवर में किसान अधिकार यात्रा का समापन: 6 दिन, 6 जिलों में उठे गन्ना किसानों के 6 सवाल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए आज एक अध्याय बंद हो रहा है। दो अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के मीरापुर से शुरू हुई कांग्रेस की किसान अधिकार यात्रा छठे दिन गौतमबुद्धनगर के जेवर में समाप्त हो रही है। छह दिन, छह जिले और डेढ़ सौ किलोमीटर से ज्यादा का सफर। पेराई सत्र के मुहाने पर इसका क्या मतलब बनता है, देखिए।

छह दिन, छह जिलों का सफर

यात्रा का रूट पहले से तय था। दो अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के मीरापुर में हरी झंडी दिखाई गई। इसके बाद तीन अक्टूबर को शामली के थानाभवन, चार अक्टूबर को बागपत के छपरौली, पांच अक्टूबर को मेरठ के सिवालखास और मेरठ दक्षिण, छह अक्टूबर को गाजियाबाद के लोनी में कार्यक्रम हुए। आज जेवर में समापन है।

शुरुआत के दिन यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, सांसद इमरान मसूद, किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष अखिलेश शुक्ला और वरिष्ठ नेता रोहित जाखड़ मौजूद रहे। एमएसपी, गन्ने का बकाया भुगतान, खाद की उपलब्धता और बिजली की दरें शुरू से एजेंडे में सबसे ऊपर रहीं।

मेरठ पड़ाव: जहां गन्ना ही सबसे बड़ा मुद्दा बना

यात्रा का सबसे ज्यादा चर्चित पड़ाव सोमवार, पांच अक्टूबर को मेरठ में रहा। हापुड़ रोड पर फफूंडा गांव में सभा हुई और उसके बाद गांव में पदयात्रा निकाली गई। कांग्रेस ने सभा में हजारों किसानों के शामिल होने का दावा किया।

अखिलेश शुक्ला ने कहा कि खाद, बीज, डीजल, बिजली और कृषि उपकरण महंगे होने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों को उपज का उचित मूल्य और गन्ने का भुगतान समय पर मिलना चाहिए। रोहित जाखड़ ने कहा कि पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी है, और भुगतान में देरी, आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान और बढ़ती लागत सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाती है।

गन्ना किसानों के सवालों को छांटकर देखें तो छह मुद्दे साफ उभरते हैं। पहला, बकाये का समय पर भुगतान। नियम कहता है कि मिलों को गन्ना खरीद के चौदह दिन के भीतर भुगतान करना होता है, लेकिन जमीन पर देरी आम बात है। दूसरा, एमएसपी की कानूनी गारंटी। तीसरा, बुवाई और बढ़वार के समय खाद की उपलब्धता। चौथा, कृषि बिजली की दरों में राहत। पांचवां, लगातार बढ़ती खेती लागत। छठा, ग्रामीण रोजगार।

फसल के साथ जमीन का भी सवाल उठा

फफूंडा की सभा के बाद नेताओं ने लोहियानगर में धरने पर बैठे किसानों से भी संवाद किया। यहां चर्चा खेत से आगे बढ़कर जमीन के मुद्दे तक पहुंच गई। लोहियानगर, गंगानगर और वेदव्यासपुरी आवासीय योजनाओं से जुड़े अतिरिक्त प्रतिकर, लंबित प्लॉट, नकद भुगतान और पुरानी आबादी के समायोजन के मामले लंबे समय से अटके हैं। नेताओं ने भरोसा दिया कि इन मांगों को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया जाएगा।

अब आगे क्या: 12 अक्टूबर की दिल्ली बैठक

यात्रा का समापन हो रहा है, लेकिन गन्ना राजनीति का अगला बड़ा पड़ाव पांच दिन बाद है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में बारह अक्टूबर को गन्ना किसानों और किसान संगठनों के साथ बैठक बुलाने का ऐलान किया है। इसमें चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी समेत किसानों की दूसरी मांगों पर चर्चा होनी है।

किसानों के लिए एक बात साफ समझनी जरूरी है। जोशी ने खुद स्पष्ट किया है कि चीनी का एमएसपी और गन्ने की कीमत दो अलग-अलग मुद्दे हैं। चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी होने से गन्ने का भाव अपने आप नहीं बढ़ेगा, क्योंकि दोनों कीमतें सीधे तौर पर एक-दूसरे से जुड़ी नहीं हैं।

₹365 का FRP तय, SAP की घोषणा अभी बाकी

केंद्र ने एक अक्टूबर 2026 से शुरू हुए नए पेराई सीजन के लिए गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया है। यह फैसला मई 2026 में कैबिनेट की मंजूरी के बाद घोषित हुआ था। लेकिन यूपी सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए अपना नया राज्य सलाहकारी मूल्य (एसएपी) अभी घोषित नहीं किया है। पिछले सत्र 2025-26 में यूपी का एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल था।

भुगतान के दावे अलग-अलग हैं। गन्ना विकास विभाग के आंकड़ों के हवाले से सितंबर की रिपोर्टों में कहा गया था कि पेराई सत्र 2025-26 में कुल बकाये का 94.86 प्रतिशत भुगतान हो चुका है। फिर भी किसान संगठनों का कहना है कि कई मिलों का बकाया अटका है और देरी पर ब्याज का प्रावधान जमीनी स्तर पर लागू नहीं होता। यही वजह है कि समय पर भुगतान की मांग हर मंच पर सबसे तेज गूंजती है।

किसान के लिए इसका सीधा मतलब

यात्रा के समापन से किसान की जेब में सीधे कुछ नहीं आया। लेकिन तीन चीजों पर नजर रखनी चाहिए। पहला, नए पेराई सत्र के लिए एसएपी की घोषणा कब होती है, क्योंकि यही आंकड़ा आपके हिसाब में असली फर्क डालेगा। दूसरा, बारह अक्टूबर की दिल्ली बैठक में चीनी के एमएसपी पर क्या फैसला होता है। तीसरा, बकाये का भुगतान चौदह दिन के नियम के भीतर मिल रहा है या नहीं।

मुख्य बातें

  • दो अक्टूबर को मीरापुर से शुरू हुई किसान अधिकार यात्रा आज जेवर में समाप्त हो रही है; छह दिन और छह जिलों में गन्ना भुगतान, एमएसपी, खाद और बिजली के मुद्दे उठे।
  • मेरठ के फफूंडा की सभा में गन्ना बकाये के समय पर भुगतान, एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत छह सवाल उठे; लोहियानगर में धरने वाले किसानों के जमीन-मुआवजे के पुराने मामले भी सुने गए।
  • अब नजर बारह अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रल्हाद जोशी से गन्ना किसानों की बैठक और यूपी सरकार के नए एसएपी की घोषणा पर टिकी है।

स्रोत: Newstrack, Navbharat Times, Gaon Junction, Kisan India

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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