खेत की खाली मेड़ पर उगाएं ये 7 फसलें, गन्ने को नुकसान बिना अतिरिक्त फायदा

अक्टूबर की सुबह है। पश्चिमी यूपी के खेतों में शरदकालीन गन्ने की बुवाई पूरी होने को है और पेड़ी वाले किसान पेराई का इंतज़ार कर रहे हैं। इसी बीच एक बार अपने खेत की मेड़ों पर नज़र डालिए। सितंबर की तेज़ बारिश ने कई जगह मेड़ की मिट्टी बहा दी है। टूटी मेड़ से सिंचाई का पानी इधर-उधर बह जाता है, किनारे की कतारों के पौधे मिट्टी के नीचे दब जाते हैं और खेत की सीमा भी धुंधली पड़ जाती है।
यही मेड़ अगर सही समय पर मज़बूत कर ली जाए और उस पर छोटी-मोटी फसल लगा दी जाए, तो बिना एक इंच ज़मीन घटाए दोहरा फायदा मिलता है। मेड़ की खेती का मतलब बस इतना ही है। हाल में ट्रेंच विधि से गन्ने के बीच सहफसली खेती की काफी चर्चा रही है। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओम प्रकाश सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि दो कतारों के बीच करीब 5 फीट की दूरी रखकर ट्रेंच विधि से बुवाई करें, ताकि बीच की खाली जगह में फूलगोभी, मटर, पालक और बंदगोभी जैसी सहफसली फसलें ली जा सकें। मेड़ की खेती उससे भी आसान है, क्योंकि इसमें गन्ने की बुवाई का तरीका बदलने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
मेड़ की मरम्मत: सबसे पहला काम
अक्टूबर का महीना टूटी मेड़ों को ठीक करने का सबसे अच्छा समय है। मानसून थम चुका है और पेराई से पहले खेत की नालियां साफ होनी चाहिए। जहां मेड़ बैठ गई है, वहां फावड़े से मिट्टी चढ़ाकर उसे ऊंचा करें। मिट्टी चढ़ाने के बाद उस पर पैर मारकर या हल्का पानी छिड़ककर दबा दें, ताकि अगली सिंचाई में मिट्टी फिर से न बहे।
मज़बूत मेड़ का सीधा फायदा पानी पर पड़ता है। नाली का पानी खेत के एक छोर से दूसरे छोर तक बराबर पहुंचता है और किनारे की कतारों को पर्याप्त नमी मिलती है। कमज़ोर मेड़ वाले खेत में पानी बाहर निकल जाता है और किनारे के पौधे सूखने लगते हैं।
मेड़ पर उगाने वाली 7 फसलें
मेड़ की चौड़ाई कम होती है, इसलिए ऐसी फसलें चुनें जो छोटी ऊंचाई की हों और जल्दी तैयार हो जाएं। सर्दियों की ये 7 फसलें मेड़ पर सबसे अच्छी चलती हैं।
1. पालक: सबसे तेज़ तैयार होने वाली सब्ज़ी। अक्टूबर-नवंबर में बोएं और कुछ हफ़्तों में कटाई शुरू हो जाती है। ऊंचाई कम रहती है, इसलिए गन्ने पर छाया नहीं पड़ती।
2. मेथी: सर्दियों में मेथी की पत्ती अच्छी उगती है। पत्ती के लिए काटें या दाने के लिए छोड़ दें, दोनों तरह काम आती है। मेड़ की मिट्टी में थोड़ी गोबर की खाद मिला देने से बढ़वार अच्छी होती है।
3. धनिया: पत्ती धनिया कम जगह में खूब उगता है। अक्टूबर के अंत से नवंबर तक बोया धनिया दिसंबर-जनवरी में अच्छा भाव देता है।
4. मटर: सर्दियों में मटर मेड़ पर बहुत अच्छी चलती है। शाहजहांपुर के किसान गन्ने के साथ मटर की सहफसली खेती पहले से कर रहे हैं। मेड़ पर बोई मटर को गन्ने की सिंचाई का पानी भी मिल जाता है।
5. लहसुन: लहसुन को कम पानी चाहिए और मेड़ की ढलवां मिट्टी में इसकी गांठें अच्छी बनती हैं। कृषि सलाह के मुताबिक गन्ने के साथ लहसुन, प्याज, आलू, मसूर और चना जैसी फसलों की सहफसली पहले से अपनाई जा रही है।
6. लोबिया (बरबटी): फली सब्ज़ी के काम आती है और पत्तियां पशुओं को खिलाई जा सकती हैं। एक फसल, दो काम। दलहनी फसल होने की वजह से इसकी जड़ें हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में जमा करती हैं।
7. हरा चारा (बाजरा-नेपियर घास): जिन किसानों के पास गाय-भैंस हैं, उनके लिए मेड़ पर हरा चारा लगाना सबसे समझदारी का काम है। चारे की जड़ें मिट्टी को कसकर पकड़ती हैं, जिससे मेड़ लंबे समय तक मज़बूत रहती है।
समय का हिसाब: फरवरी से पहले कटाई
मेड़ की फसल में सबसे ज़रूरी नियम समय का है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि गन्ने के साथ लगाई गई कोई भी सहफसल फरवरी के पहले हफ़्ते तक कट जानी चाहिए, क्योंकि फरवरी-मार्च में गन्ने में कल्ले तेज़ी से निकलते हैं। अगर मेड़ की फसल इस समय तक खेत में खड़ी रही, तो वो गन्ने के कल्लों से धूप और पोषण छीनेगी। इसलिए अक्टूबर-नवंबर में बोई गई फसल का पूरा चक्र फरवरी तक खत्म हो जाना चाहिए।
पानी और खाद का आसान हिसाब
मेड़ की फसल का सबसे बड़ा फायदा ये है कि उसे अलग से सिंचाई नहीं देनी पड़ती। गन्ने को दी जा रही सिंचाई का पानी मेड़ तक पहुंच ही जाता है। बुवाई के समय मेड़ की मिट्टी में थोड़ी गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिला देना काफ़ी होता है। मेड़ पर ज़्यादा रासायनिक खाद डालने से बचें, क्योंकि बची हुई खाद बारिश में बहकर नाली में जा सकती है।
ये गलतियां मेड़ पर न करें
ऊंचे पेड़ न लगाएं: कई किसान मेड़ पर सफेदा या शीशम लगा देते हैं। ये पेड़ बड़े होकर गन्ने पर छाया डालते हैं और ज़मीन से पानी-खाद खींच लेते हैं। पड़ोसी खेत से सीमा को लेकर झगड़े भी इन्हीं पेड़ों की वजह से होते हैं।
पेराई के रास्ते वाली मेड़ खाली रखें: जिस मेड़ के पास से ट्रैक्टर-ट्रॉली गुज़रती है, वहां लंबी फसल न लगाएं। पेराई के समय ये फसल कुचल जाएगी और गाड़ी का रास्ता भी रुकेगा।
खरपतवार को बढ़ने न दें: मेड़ पर उगे मोथा, दूब और कांसी को नज़रअंदाज़ न करें। ये खरपतवार मेड़ से फैलकर पूरे खेत में फैल जाते हैं और गन्ने की बढ़वार रोकते हैं।
मुख्य बातें
- अक्टूबर में टूटी मेड़ों की मरम्मत कराएं। मज़बूत मेड़ से सिंचाई का पानी बहता नहीं और किनारे की कतारें सुरक्षित रहती हैं।
- पालक, मेथी, धनिया, मटर, लहसुन, लोबिया और हरा चारा मेड़ पर लगाने के 7 अच्छे विकल्प हैं। हर फसल फरवरी के पहले हफ़्ते तक काट लें, ताकि गन्ने के कल्लों को पूरी धूप और पोषण मिले।
- मेड़ पर ऊंचे पेड़ न लगाएं और पेराई के रास्ते वाली मेड़ पर लंबी फसल से बचें। खरपतवार समय पर निकालते रहें।
स्रोत: News18 Local18 (शाहजहांपुर, नवंबर 2025; सहारनपुर, अगस्त 2026), Indian Express (गन्ने में अंतरफसली खेती पर विश्लेषण)।
