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162 करोड़ बकाया, 55 करोड़ का चेक बाउंस: बहेड़ी केसर मिल के गन्ना केंद्र छिनकर दूसरी मिलों को

✍️ Aamir Raza · 🗓 23 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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162 करोड़ बकाया, 55 करोड़ का चेक बाउंस: बहेड़ी केसर मिल के गन्ना केंद्र छिनकर दूसरी मिलों को

“मेरा गन्ना इस बार कहां तुलेगा?” बहेड़ी और आसपास के गांवों में ये सवाल अब हर खेत की मेंड़ पर सुनाई दे रहा है। पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है, और बरेली की केसर इंटरप्राइजेज चीनी मिल बहेड़ी के किसानों के लिए बुरी खबर आ गई है। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस के आदेशों से मिल का गन्ना क्षेत्र काट दिया गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक पेराई सत्र 2026-27 के लिए तीन आदेश जारी हुए हैं, जिनके बाद मिल के गन्ना केंद्र फरीदपुर, मीरगंज और दूसरी चीनी मिलों को दे दिए गए हैं। दैनिक जागरण ने भी पुष्टि की है कि बहेड़ी और नवाबगंज की मिलों को इस बार गन्ना आवंटित नहीं किया गया है।

वजह एक ही है, और वो पुरानी है: बकाया। गन्ना आयुक्त के आदेश के मुताबिक मिल पर किसानों का 159.91 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें पेराई सत्र 2024-25 का 142.36 करोड़ और 2025-26 का 17.55 करोड़ रुपये शामिल है। ब्याज जोड़कर रकम करीब 162 करोड़ रुपये बताई जा रही है। बहेड़ी बार एसोसिएशन ने 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में ये बकाया 164 करोड़ बताया था। संख्या चाहे 162 हो या 164, बात एक ही है। दो सत्रों से किसानों की कमाई फंसी पड़ी है।

55 करोड़ का चेक बाउंस, फिर टूटा भरोसा

सितंबर में कहानी ने एक नया मोड़ लिया था। मिल बेचने का सौदा (एमओयू) हुआ, और बतौर भरोसे के 55 करोड़ रुपये का चेक जिलाधिकारी को दिया गया। वो चेक बाउंस हो गया। बार एसोसिएशन के ज्ञापन में भी इस बाउंस चेक का जिक्र है। अधिवक्ताओं ने मिल मालिक पर दंडात्मक कार्रवाई और मिल की संपत्ति कुर्क कर किसानों का भुगतान कराने की मांग की थी।

चेक बाउंस के बाद बकाया मिलने की उम्मीद और धुंधली हो गई। यही वो बिंदु था जहां प्रशासन के लिए मिल को और मोहलत देना मुश्किल हो गया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक गन्ना आयुक्त के आदेश में केसर मिल पर 9 साल की देरी की तालिका का भी हवाला है। मतलब, ये बकाया एक-दो सत्र की कहानी नहीं, सालों से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है।

गन्ना कहां जाएगा: केंद्रों का नया बंटवारा

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार मिल के पास पिछले साल 56 गन्ना केंद्र थे, जिनमें से छह पहले ही हटाए जा चुके थे। इस बार के आदेशों के बाद 40 केंद्र और हटाए गए, और मिल के पास अब सिर्फ 9 गेट केंद्र बचे हैं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक बहेड़ी मिल के केंद्रों का बंटवारा इस तरह हुआ है: 11 केंद्र फरीदपुर, 12 मीरगंज, 3 सेमीखेड़ा, 5 पीलीभीत, 9 निगोही, 9 मिलक नरायनपुर और 7 रोजा चीनी मिल को। फरीदपुर को कुल 245 लाख क्विंटल और मीरगंज को 229 लाख क्विंटल गन्ने का लक्ष्य दिया गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट में भी फरीदपुर (245.62 लाख क्विंटल, 33,455 हेक्टेयर) और धामपुर मीरगंज (229.30 लाख क्विंटल, 30,684 हेक्टेयर) को सबसे बड़ा हिस्सा मिलने की पुष्टि है।

ओसवाल चीनी मिल नवाबगंज को भी इस बार गन्ना आवंटित नहीं किया गया है। जागरण के मुताबिक पिछले साल भी उसे गन्ना नहीं मिला था, और अब नीलामी कराकर किसानों का बकाया दिलाने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं पिछली साल चालू हुई त्रिवटीनाथ चीनी मिल को सिर्फ छह केंद्रों का 19 लाख क्विंटल गन्ना मिला है।

किसान पर असर: अब क्या करना होगा

केसर मिल के किसानों के लिए सबसे जरूरी काम अभी एक ही है: अपने गन्ना केंद्र की नई मिल का नाम पक्का करना। जिस केंद्र से आपका गन्ना तौला जाता था, वो अब फरीदपुर, मीरगंज या किसी और मिल के खाते में है। अपनी सहकारी गन्ना विकास समिति या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से लिखित में जानकारी लें कि आपका सट्टा अब किस मिल से जुड़ा है। मुंहजुबानी जानकारी पर भरोसा न करें, क्योंकि पर्ची जारी होने के समय गलत मिल का नाम बड़ी मुसीबत बन सकता है।

दूसरा, बकाये के कागज संभालकर रखें। पर्ची, तौल की रसीद और अब तक मिले भुगतान का हिसाब — यही वो दस्तावेज हैं जिनके दम पर बकाये की लड़ाई लड़ी जाएगी। बार एसोसिएशन पहले ही मिल की संपत्ति कुर्क करने की मांग कर चुका है। ऐसे में हर किसान के पास अपना हिसाब साफ होना चाहिए, ताकि जब भी भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो, उसका नाम सूची में सबसे ऊपर हो।

तीसरा, भुगतान की जानकारी के लिए सरकारी हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर बकाये और पर्ची से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

मुख्य बातें

  • गन्ना आयुक्त के आदेशों से केसर मिल बहेड़ी का गन्ना क्षेत्र कटा; उसके 56 केंद्र फरीदपुर, मीरगंज समेत सात मिलों में बांटे गए, फरीदपुर को 245 और मीरगंज को 229 लाख क्विंटल का लक्ष्य मिला।
  • मिल पर 159.91 करोड़ का बकाया (ब्याज सहित करीब 162 करोड़); 55 करोड़ का चेक बाउंस होने के बाद बार एसोसिएशन ने मिल की संपत्ति कुर्क कर भुगतान की मांग की है।
  • केसर मिल के किसान अपने केंद्र की नई मिल का नाम समिति से लिखित में पक्का करें और बकाये की पर्ची-रसीद संभालकर रखें।

स्रोत: अमर उजाला (बरेली, 21 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (बरेली, 21 अक्टूबर 2026), बहेड़ी बार एसोसिएशन की रिपोर्ट।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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