गन्ने में केंचुआ खाद: 1 एकड़ में 10 क्विंटल, रासायनिक खाद का खर्च घटाने का तरीका

बुवाई का सीजन आते ही खेत की तैयारी के साथ एक हिसाब हर किसान के दिमाग में चलता है। यूरिया, डीएपी और पोटाश की बोरी का दाम देखकर हाथ रुक जाता है। मिट्टी में जान तो डालनी है, पर जेब भी खाली नहीं करनी। ऐसे में जो किसान खेत तैयार करते समय केंचुआ खाद डाल देता है, वह आगे चलकर रासायनिक खाद की जरूरत कम महसूस करता है।
गन्ने की फसल के लिए विशेषज्ञों की सलाह साफ है। खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ 10 क्विंटल केंचुआ खाद डालें। यह मात्रा गन्ने के पूर्व आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी ने बसंतकालीन गन्ना बुवाई की सलाह में बताई थी। प्रति हेक्टेयर के हिसाब से यह 25 क्विंटल होती है। अच्छी बात यह है कि यही मात्रा शरदकालीन बुवाई में भी लागू होती है। नीचे मात्रा, समय, डालने का तरीका और घर पर बनाने की पूरी विधि दी गई है।
मात्रा का साफ हिसाब
गन्ना लंबी अवधि की फसल है और मिट्टी से भारी मात्रा में पोषक तत्व खींचती है। इसलिए बुवाई के समय ही जैविक पदार्थ की ठोस मात्रा खेत में डालना जरूरी है। प्रति एकड़ 10 क्विंटल केंचुआ खाद अंतिम जुताई के समय खेत में डालें।
जिस किसान के पास केंचुआ खाद न हो, वह विकल्प के तौर पर 100 क्विंटल गोबर की सड़ी खाद या 50 क्विंटल प्रेसमड भी डाल सकता है। यह विकल्प भी उसी सलाह का हिस्सा है। केंचुआ खाद के साथ प्रति हेक्टेयर 10 किलो एजोटोबैक्टर और 10 किलो पीएसबी भी मिलाएं, यानी प्रति एकड़ करीब 4-4 किलो। ये जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपलब्ध कराते हैं और फास्फोरस को घुलनशील बनाते हैं।
मिट्टी परीक्षण करवाना सबसे बेहतर है। अगर मिट्टी परीक्षण हुआ हो तो केंचुआ खाद और रासायनिक खाद की मात्रा उसी के अनुसार तय करें। परीक्षण न हुआ हो तो ऊपर बताई गई मात्रा सुरक्षित है। ध्यान रखें, यह खाद बुवाई के समय डालनी है। फसल खड़ी होने के बाद या कटाई के नजदीक इसका पूरा फायदा नहीं मिलता।
डालने का सही तरीका
केंचुआ खाद को पूरे खेत में एक समान बिखेरकर अंतिम जुताई में मिट्टी में मिला दें। कुछ किसान इसे कूड़ों में डालना पसंद करते हैं, वह भी ठीक है। मुख्य बात यह है कि खाद जड़ों के दायरे में पहुंचे और धूप में खुली न पड़ी रहे। धूप में पड़ी खाद के सूक्ष्मजीव मर जाते हैं और असर आधा रह जाता है।
ताजी गोबर को सीधे खेत में न डालें। बिना सड़ी गोबर में दीमक और बीमारियों का खतरा रहता है। केंचुआ खाद पूरी तरह तैयार और सड़ी हुई होनी चाहिए। गंध से पहचान आसान है। अच्छी केंचुआ खाद में मिट्टी जैसी खुशबू होती है, बदबू नहीं। खाद डालने के बाद हल्की सिंचाई कर दें, तो नमी में सूक्ष्मजीव तेजी से सक्रिय होते हैं।
घर पर बनाने की विधि
बाजार से खरीदने के बजाय केंचुआ खाद घर पर भी बनाई जा सकती है। विधि सरल है। खेत के पास छायादार जगह पर टांका या गड्ढा बनाएं। उसमें गोबर और फसल के अवशेष की परतें बिछाएं और केंचुए छोड़ दें। ऊपर जूट के बोरे डालकर नमी बनाए रखें। करीब 45 दिन में खाद तैयार हो जाती है।
कुछ बातों का ध्यान रखें। खाद हाथ से निकालें, गैंती या कुदाल का इस्तेमाल न करें, नहीं तो केंचुए मर जाते हैं। निकाली हुई खाद को छाया में सुखाकर छान लें और छायादार जगह पर रखें। केंचुओं की संख्या करीब 2 महीने में दोगुनी हो जाती है, यानी एक बार इकाई लग जाए तो अगले सीजन की खाद उसी से मिल जाएगी। चाहें तो टांके से निकलने वाला वर्मीवॉश भी इकट्ठा कर सकते हैं, जो पत्तियों पर छिड़काव में काम आता है।
रासायनिक खाद के साथ संतुलन
यह समझना जरूरी है कि केंचुआ खाद रासायनिक खाद का पूरा विकल्प नहीं है। शोध बताते हैं कि केवल केंचुआ खाद से गन्ने की पूरी नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की जरूरत पूरी नहीं हो पाती। सबसे अच्छा परिणाम तब मिलता है जब केंचुआ खाद के साथ संतुलित मात्रा में रासायनिक खाद भी दी जाए।
केंचुआ खाद मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाती है और सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाती है। इससे रासायनिक खाद की दक्षता बढ़ जाती है। यानी वही यूरिया-डीएपी पहले से बेहतर काम करता है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि अत्यधिक रासायनिक खाद न केवल फसल को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मिट्टी और सेहत के लिए भी ठीक नहीं। संतुलित मात्रा ही टिकाऊ खेती का रास्ता है।
आम गलतियां जिनसे बचें
पहली गलती है कच्ची या आधी तैयार खाद डालना। इसमें छिपे खरपतवार के बीज और रोग खेत में फैलते हैं। दूसरी गलती है खेत में बिखेरकर छोड़ देना। बिखेरी हुई खाद को उसी दिन जुताई में मिला दें, वरना नाइट्रोजन हवा में उड़ जाती है और मेहनत आधी रह जाती है। तीसरी गलती है मिट्टी परीक्षण के बिना रासायनिक खाद की पुरानी मात्रा दोहराना। केंचुआ खाद डालने के बाद भी संतुलित मात्रा ही रखें, क्योंकि ज्यादा खाद फसल को नहीं, जेब को नुकसान पहुंचाती है।
खर्च कैसे घटता है
अपनी केंचुआ खाद इकाई लगा लेने के बाद किसान को हर सीजन बाहर से खाद खरीदने की मजबूरी खत्म हो जाती है। गोबर और फसल अवशेष खेत से ही मिलते हैं, केंचुए एक बार लगाकर बढ़ते रहते हैं। एक बार की मेहनत कई सीजन काम आती है।
इसके अलावा केंचुआ खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी होते हैं। इनकी अलग से खरीद का खर्च भी बचता है। पेड़ी की फसल में भी इसका असर दिखता है, क्योंकि मिट्टी में जमा जैविक कार्बन लंबे समय तक पोषक तत्व छोड़ता रहता है।
मुख्य बातें
- गन्ने में खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ 10 क्विंटल (प्रति हेक्टेयर 25 क्विंटल) केंचुआ खाद डालें।
- साथ में एजोटोबैक्टर और पीएसबी मिलाएं और मिट्टी परीक्षण के आधार पर रासायनिक खाद की मात्रा तय करें।
- घर पर टांका विधि से करीब 45 दिन में खाद तैयार करें, खाद हाथ से निकालें और छाया में रखें।
स्रोत: चिनीमंडी पर प्रकाशित गन्ना विभाग के पूर्व आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी की बसंतकालीन बुवाई सलाह; कृषि जागरण पर केंचुआ खाद की प्रयोग मात्रा और तैयारी विधि।
