कटाई से 15 दिन पहले रोक दें गन्ने की सिंचाई, वैज्ञानिकों की बड़ी सलाह

लखनऊ। पर्ची का एसएमएस आ चुका है, खेत में गन्ना पककर तैयार खड़ा है और किसान के मन में एक सवाल घूम रहा है: अब पानी लगाऊं या नहीं? अक्टूबर के इस समय में यही छोटा सा फैसला तय करता है कि मिल गेट पर गन्ने का वजन कितना उतरेगा और उसमें चीनी की मात्रा कितनी रहेगी। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह इस मामले में बिल्कुल साफ है, लेकिन खेत-खेत में इसे लेकर उलझन भी खूब है।
कटाई से 15 दिन पहले पानी बंद करने का नियम
वैज्ञानिक सलाह के मुताबिक बुवाई के 35 से 100 दिन तक की अवस्था में हर 7 से 10 दिन में और 170 से 360 दिन की अवस्था में हर 15 दिन के अंतर पर सिंचाई करना ठीक रहता है। इसके बाद एक साफ लकीर खींची गई है: कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई का काम पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
यह नियम गांव जंक्शन की उस विस्तृत गाइड में दर्ज है जो बुवाई से कटाई तक हर चरण की वैज्ञानिक सलाह देती है। कटाई के नजदीक पहुंची फसल में अब बढ़वार नहीं, परिपक्वता चाहिए। लगातार पानी मिलता रहा तो गन्ना हरा-भरा तो दिखेगा, लेकिन उसके डंठल में चीनी जमा होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी।
परिपक्वता का गणित: जल्दी कटाई से रिकवरी घटती है
चीनी मिलों के लिए गन्ने में चीनी का प्रतिशत यानी रिकवरी सबसे अहम पैमाना है। हिंदी बिज़नेस स्टैंडर्ड की सितंबर 2026 की रिपोर्ट बताती है कि अगर गन्ना पूरी तरह पके बिना ही काट लिया जाए तो रिकवरी 1 से 1.5 प्रतिशत तक घट सकती है। इसका सीधा असर किसान की जेब पर पड़ता है, प्रति टन करीब 500 रुपये तक का नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
इसीलिए कुछ मिलों ने इस साल कटाई से पहले खेत में ही गन्ने की रिकवरी जांचने की व्यवस्था लागू की है, और रिकवरी के आधार पर कटाई को प्राथमिकता मिल रही है। किसान हेल्पलाइन की सितंबर 2026 की सलाह भी इसी दिशा में है: जिस खेत का गन्ना पककर कटाई के योग्य हो गया है, उसकी कटाई की योजना समय पर बनाएं, पके गन्ने को खेत में ज्यादा देर तक न रोकें।
4-5 दिन पहले हल्की सिंचाई: उलझन सुलझाएं
यहां एक बात किसानों को अक्सर उलझाती है। एक तरफ कटाई से 15 दिन पहले पानी बंद करने की सलाह है, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. श्री प्रकाश यादव कहते हैं कि जिस खेत में कटाई करनी हो, उसमें चार से पांच दिन पहले हल्की सिंचाई जरूर करें। ये दोनों बातें एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं।
15 दिन वाला नियम नियमित सिंचाई रोकने के लिए है, ताकि फसल परिपक्व हो सके। वहीं कटाई से 4-5 दिन पहले की हल्की सिंचाई का मकसद खेत में नमी बनाए रखना है, ताकि कटाई के दौरान और उसके बाद गन्ने का वजन न घटे। न्यूज18 हिंदी की 13 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में डॉ. यादव ने साफ कहा कि कटाई शुरू करने से लेकर गन्ने को मिल गेट तक भेजने की अवधि में खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि नमी से गन्ने में वजन बना रहता है।
कटाई के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
पानी का प्रबंधन जितना जरूरी है, कटाई का तरीका भी उतना ही अहम है। डॉ. यादव की सलाह है कि कटाई जमीन की सतह से करनी चाहिए, ताकि पेड़ी की फसल अच्छी हो। कटा हुआ गन्ना धूप और हवा में खुला न छोड़ें। कटिंग के तुरंत बाद उसे पताई या तिरपाल से ढक दें, क्योंकि सीधी धूप और हवा के संपर्क में आने से नमी तेजी से कम होती है और वजन घटता है।
हिंदी इकोनॉमिक टाइम्स की नवंबर 2024 की कृषि सलाह में भी यही बात दोहराई गई है: कटाई सतह से करें और कटाई के एक हफ्ते बाद सिंचाई करें, ताकि पेड़ी का फुटाव अच्छा हो। यानी कटाई के बाद खेत को पूरी तरह सूखा नहीं छोड़ना है, पेड़ी के लिए समय पर पानी देना जरूरी है।
इस अक्टूबर में किसान क्या करें
पेराई सीजन सिर पर है और मिलों की पर्ची व्यवस्था शुरू हो चुकी है। किसान अपने खेत का हिसाब इस तरह लगाएं: जिस खेत की कटाई 15 दिन बाद तय है, वहां से नियमित सिंचाई अभी रोक दें। जिस खेत की पर्ची आ गई है या 4-5 दिन में कटाई होनी है, वहां एक हल्की सिंचाई कर लें। पका हुआ गन्ना खेत में ज्यादा दिन न रोकें, क्योंकि देर से कटाई में भी नुकसान होता है। और कटाई के दिन खेत में काटा गन्ना ढककर ही मिल भेजें।
इससे बिजली-डीजल की बचत भी होती है। रूटीन में पानी लगाते रहने से खर्च बढ़ता है और गन्ने की गुणवत्ता घटती है। सही समय पर पानी बंद करना, हल्की सिंचाई और सतह से कटाई, यही तीन काम इस सीजन गन्ने का पूरा दाम दिलाएंगे।
मुख्य बातें
- कटाई से 15 दिन पहले नियमित सिंचाई पूरी तरह बंद कर दें, ताकि गन्ना परिपक्व हो सके और चीनी की मात्रा अच्छी रहे।
- कटाई वाले खेत में 4-5 दिन पहले हल्की सिंचाई जरूर करें, इससे कटाई के दौरान और बाद में गन्ने का वजन बना रहता है।
- कटाई जमीन की सतह से करें, कटे गन्ने को पताई या तिरपाल से ढकें और पेड़ी के फुटाव के लिए कटाई के एक हफ्ते बाद सिंचाई करें।
स्रोत: गांव जंक्शन (जून 2024), न्यूज18 हिंदी/उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान (13 दिसंबर 2025), हिंदी बिज़नेस स्टैंडर्ड (सितंबर 2026), हिंदी इकोनॉमिक टाइम्स (नवंबर 2024), किसान हेल्पलाइन (सितंबर 2026)
