कटा गन्ना 24 घंटे में मिल पहुंचाओ, वरना 72 घंटे में 10% तक वजन घट जाएगा

पेराई सीजन में अक्सर यह नजारा दिखता है। पर्ची मिलते ही कटाई शुरू हो जाती है, ट्रॉली भर जाती है, और फिर किसी वजह से वह ट्रॉली एक दिन, कभी दो दिन खेत के किनारे या खरीद केंद्र के पास खड़ी रह जाती है। किसान को लगता है कि गन्ना तो कट चुका है, अब बस तौल होना बाकी है। असल में नुकसान उसी वक्त शुरू हो जाता है जब गन्ना कटता है। कटा हुआ गन्ना हर घंटे नमी खोता है, हल्का होता है और उसके अंदर की चीनी भी घटने लगती है।
कटने के बाद गन्ने के अंदर क्या बदलता है
गन्ने का वजन उसकी नमी से जुड़ा है। कटते ही डंठल के कटे सिरों से पानी उड़ने लगता है। धूप, हवा और गर्मी इस प्रक्रिया को और तेज कर देती है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान से जुड़े अध्ययनों के मुताबिक सामान्य मौसम में 72 घंटे तक पड़े गन्ने का वजन 7 से 10 प्रतिशत तक घट सकता है। यानी 100 क्विंटल गन्ना अगर तीन दिन पड़ा रहे तो 7 से 10 क्विंटल तक का नुकसान सिर्फ सूखने से हो सकता है। यह नुकसान किसी कागज पर नहीं दिखता, सीधे कांटे पर दिखता है।
वजन के साथ चीनी की मात्रा भी घटती है। कटे गन्ने में मौजूद सुक्रोज धीरे धीरे दूसरे शर्करा रूपों में बदलने लगता है। शोध में पाया गया है कि 72 घंटे की देरी में पोल प्रतिशत में करीब 0.9 यूनिट तक की गिरावट आ सकती है। यानी मिल को उसी गन्ने से कम चीनी मिलेगी।
यूपी का 24 घंटे का लक्ष्य क्या कहता है
उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास विभाग ने यह लक्ष्य रखा है कि कटाई के 24 घंटे के अंदर गन्ना संबंधित चीनी मिल तक पहुंच जाए। इसके लिए खरीद केंद्र से मिल तक जाने वाले वाहनों की जीपीएस से लाइव ट्रैकिंग की व्यवस्था लागू की जा रही है। अधिकारी वाहन की लोकेशन देख सकेंगे और देरी होने पर जानकारी लेकर कार्रवाई कर सकेंगे। मकसद साफ है। गन्ना सूखने से पहले मिल पहुंचे ताकि वजन का नुकसान कम से कम हो।
किसान के लिए इसका मतलब यह है कि 24 घंटे कोई कागजी नियम नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक सीमा है। इससे ज्यादा देर गन्ना रखना हर घंटे नुकसान बढ़ाता है। पेराई के पीक दिनों में जब केंद्रों पर भीड़ बढ़ती है, तब यह सीमा और भी अहम हो जाती है।
कटाई से पहले तीन तैयारी कर लें
पहली तैयारी पर्ची और कैलेंडर से जुड़ी है। कटाई उसी दिन करवाएं जिस दिन गन्ना निकालने का पक्का इंतजाम हो। पर्ची मिल गई तो इसका मतलब यह नहीं कि गन्ना चार दिन पहले काटकर रख दिया जाए। कटाई की तारीख, मजदूर और ट्रॉली, तीनों का तालमेल पहले से बैठा लें।
दूसरी तैयारी मात्रा की है। एक दिन में उतना ही गन्ना कटवाएं जितना उसी दिन केंद्र या मिल तक पहुंच सके। ज्यादा काटकर रखना बचत नहीं, नुकसान है। अगर मजदूर कम हैं तो कटाई दो हिस्सों में करवाएं, लेकिन कटा हुआ गन्ना खेत में जमा न होने दें।
तीसरी तैयारी समय की है। सुबह के वक्त कटाई करवाना बेहतर रहता है। सुबह की ठंडक में गन्ना कम सूखता है और दिन चढ़ने तक ट्रॉली भरकर रवाना हो सकती है।
कटा गन्ना संभालने के पांच काम
पहला काम, कटते ही ट्रॉली भरना। गन्ना काटकर ढेर लगाकर छोड़ना सबसे बड़ी गलती है। मजदूरों से कहें कि कटाई और भराई साथ साथ चले।
दूसरा काम, छांव और ढकाव। अगर ट्रॉली तुरंत नहीं निकल सकती तो गन्ने को पत्ती या ट्रैश से ढक दें। शोध में यह साफ पाया गया है कि पत्ती से ढके गन्ने में चीनी का नुकसान खुले में पड़े गन्ने से कम होता है।
तीसरा काम, केंद्र पर पहुंचते ही तौल की स्थिति पता करना। अगर लंबी लाइन है तो केंद्र प्रभारी से अनुमानित समय पूछें। चुपचाप दो दिन इंतजार करने से बेहतर है कि समय पर जानकारी लेकर अगले दिन की कटाई उसी हिसाब से तय करें।
चौथा काम, रास्ते की योजना। ट्रॉली का रास्ता, टायर, रस्सी और बांधने का सामान पहले से जांच लें। रास्ते में खराबी से हुई देरी भी उसी नुकसान में जुड़ती है। ओवरलोड से बचें, क्योंकि ओवरलोड पर चालान का खतरा अलग से है।
पांचवां काम, शिकायत का रास्ता जानना। अगर खरीद केंद्र पर बिना वजह देरी हो रही है तो गन्ना विभाग के टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत में पर्ची की जानकारी और केंद्र का नाम साफ बताएं ताकि कार्रवाई में देर न हो।
तीन गलतियां जो सीधे जेब पर पड़ती हैं
पहली गलती है पर्ची मिलने से कई दिन पहले कटाई करवा लेना। कुछ किसान सोचते हैं कि मजदूर मिल गए तो काम निपटा लें। मजदूर का फायदा वजन के नुकसान से कहीं कम पड़ता है।
दूसरी गलती है कटा गन्ना धूप में खुला छोड़ देना। ढकाव का खर्च न के बराबर है, फायदा बड़ा है।
तीसरी गलती है कटाई और ढुलाई के बीच तालमेल न होना। ट्रॉली एक दिन बाद आएगी, यह जानते हुए भी कटाई करवा देना सीधे नुकसान को न्योता देना है। कटाई तभी करवाएं जब ढुलाई पक्की हो।
इस सीजन की सीधी सीख
पेराई सीजन में गन्ने की कीमत पर्ची पर तय होती है, लेकिन असली कमाई कांटे पर तय होती है। जितना ताजा गन्ना मिल पहुंचेगा, उतना ही वजन बचेगा। 24 घंटे का लक्ष्य याद रखें। कटाई, भराई और रवाना, तीनों काम एक ही दिन में निपटाने की आदत डालें।
मुख्य बातें
- कटा गन्ना हर घंटे सूखता है। 72 घंटे में वजन 7 से 10 प्रतिशत तक घट सकता है।
- यूपी का लक्ष्य है कि गन्ना कटाई के 24 घंटे के अंदर मिल पहुंचे, और वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग से इस पर नजर रखी जा रही है।
- उतना ही गन्ना कटवाएं जितना उसी दिन निकल सके, और रुके हुए गन्ने को पत्ती से ढककर रखें।
स्रोत: गांव जंक्शन (यूपी में गन्ना ढुलाई की जीपीएस निगरानी), भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान से जुड़े पोस्ट हार्वेस्ट अध्ययन (शुगर टेक), अमर उजाला (मिल देरी से वजन और रिकवरी पर असर)।
