न्यौली मिल पर RC जारी: 3,965 किसानों के 18.54 करोड़ के लिए सिर्फ 7 दिन का अल्टीमेटम

2 फरवरी 2026 को न्यौली चीनी मिल का पेराई पहिया रुका था। उसके बाद आठ महीने बीत गए, लेकिन मिल से जुड़े 3,965 गन्ना किसानों की जेब तक उनका पैसा अब तक नहीं पहुंचा। अब कासगंज का तहसील प्रशासन इस मामले में सख्ती पर उतर आया है। मिल के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट यानी आरसी जारी कर दी गई है और प्रबंधन को सिर्फ एक सप्ताह के अंदर पूरा बकाया चुकाने का अल्टीमेटम दिया गया है। तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो नियमानुसार विधिक कार्रवाई होगी।
दैनिक जागरण की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को एसडीएम सदर एसएन त्रिपाठी, तहसीलदार बलवंत उपाध्याय और नायब तहसीलदार सुरेश चौधरी खुद मिल परिसर पहुंचे थे। तीनों अधिकारी बकाया भुगतान की स्थिति जानना चाहते थे, लेकिन मिल के अधिकारी बैठक में व्यस्तता का हवाला देकर सामने नहीं आए। इसी के बाद प्रशासन ने आरसी जारी करने का फैसला लिया।
जब अधिकारी पहुंचे, मिल प्रबंधन सामने नहीं आया
इस मामले में सबसे अहम बात यही है कि अधिकारी खुद मिल पहुंचे। आमतौर पर नोटिस और पत्राचार से काम चलता है, लेकिन यहां एसडीएम और तहसीलदार को मिल परिसर जाना पड़ा। मिल के अधिकारियों का न मिलना भी एक संदेश है। बैठक में व्यस्तता का बहाना देकर टालमटोल करने के बाद अब भुगतान टालना आसान नहीं रहेगा।
जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि आरसी जारी कर एक सप्ताह में भुगतान के निर्देश दिए गए हैं और निर्देशों का पालन कराया जाएगा। एसडीएम एसएन त्रिपाठी ने भी पुष्टि की कि तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो आगे की कार्रवाई होगी।
बकाये का पूरा हिसाब: 2.55 करोड़ तो सिर्फ ब्याज
दैनिक जागरण के फैक्ट फाइल के अनुसार न्यौली चीनी मिल का 2025-26 का पेराई सत्र 22 नवंबर 2025 को शुरू हुआ था और 2 फरवरी 2026 को समाप्त हुआ। मिल ने अब तक किसानों को 25.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इसके बावजूद 15.99 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य और 2.55 करोड़ रुपये ब्याज की राशि अब भी बकाया है। कुल बकाया 18.54 करोड़ रुपये बनता है और इसका असर सीधे 3,965 गन्ना किसानों पर पड़ रहा है।
यहां ब्याज का आंकड़ा ध्यान देने लायक है। देरी इतनी लंबी खिंची कि बकाये पर ब्याज भी करोड़ों में पहुंच गया।
पहले एफआईआर, अब आरसी: दबाव बढ़ता जा रहा है
न्यौली चीनी मिल का बकाया विवाद कोई नया मामला नहीं है। चिनिमंडी और अमर उजाला की रिपोर्टों के अनुसार इस मिल का संचालन शेरवानी शुगर सिंडिकेट लिमिटेड करती है। बकाया भुगतान न करने पर पहले मिल के प्रबंध निदेशक कुणाल यादव, यूनिट हेड इसरार अहमद और एजीएम (लेखा/वित्त) वेदप्रकाश शुक्ला के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी प्रणय सिंह के निर्देश पर हुई थी।
जिला सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड के सचिव प्रदीप कुमार वर्मा की शिकायत के मुताबिक, मिल ने 2 फरवरी 2026 तक 10.37 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा था। 19 जून 2026 तक मिल पर 19.18 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य और 27.06 लाख रुपये विकास अंशदान बकाया था। एफआईआर के बाद भी भुगतान पूरा नहीं हुआ, तो प्रशासन ने अब आरसी का रास्ता अपनाया है।
आरसी जारी होने का किसानों को क्या फायदा
रिकवरी सर्टिफिकेट कोई साधारण नोटिस नहीं है। आरसी जारी होने के बाद तहसील प्रशासन के पास बकाया वसूली के लिए मिल की संपत्ति कुर्क करने तक की कानूनी ताकत आ जाती है। यानी अब यह सिर्फ चेतावनी नहीं, वसूली की कार्रवाई की शुरुआत है, और किसानों के लिए भुगतान की उम्मीद पहले से ज्यादा ठोस हुई है।
देरी पर ब्याज किसान का कानूनी हक
उत्तर प्रदेश के नियमों के मुताबिक चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों का भुगतान करना अनिवार्य है। समय पर भुगतान न होने पर बकाये पर ब्याज देना होता है। न्यौली मिल के मामले में 2.55 करोड़ रुपये का ब्याज बकाया इसी नियम के तहत जुड़ा है।
इस नियम को सुप्रीम कोर्ट ने भी मजबूत किया है। किसान तक की रिपोर्ट के अनुसार 6 अक्टूबर 2026 के आदेश में कोर्ट ने यूपी सरकार की अर्जी खारिज कर बकाये पर 15 प्रतिशत ब्याज का नियम बरकरार रखा।
आगे क्या होगा
तहसील प्रशासन ने एक सप्ताह की मियाद तय की है। इस बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी मिलें 2026-27 का पेराई सत्र शुरू करने की तैयारी में हैं, जो अक्टूबर के तीसरे सप्ताह के आसपास शुरू होने की उम्मीद है। नए सत्र से पहले पुराने बकाये पर यह सख्ती किसानों के मनोबल के लिए अहम है।
किसान अपने बैंक खाते सक्रिय रखें, ताकि भुगतान जारी होते ही पैसा सीधे खाते में पहुंचे और कोई तकनीकी अड़चन न आए।
मुख्य बातें
- कासगंज की न्यौली चीनी मिल पर 3,965 किसानों का 18.54 करोड़ रुपये बकाया, जिसमें 15.99 करोड़ गन्ना मूल्य और 2.55 करोड़ ब्याज शामिल।
- तहसील प्रशासन ने मिल के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर एक सप्ताह में भुगतान का अल्टीमेटम दिया; तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो विधिक कार्रवाई।
- पहले मिल के एमडी समेत तीन अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है; सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर के आदेश में बकाये पर 15 प्रतिशत ब्याज का नियम बरकरार रखा है।
स्रोत: दैनिक जागरण (9 अक्टूबर 2026), चिनिमंडी/अमर उजाला, किसान तक
