गन्ना किसान मंत्री के घर की ओर, कलबुर्गी में 5 मिलों को 1 हफ्ते का अल्टीमेटम

15 अक्टूबर की शाम को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध के बाहर गन्ना किसानों की भीड़ जमा थी। दो दिन तक नेशनल हाईवे जाम रखने के बाद अब उनका निशाना कोई चौराहा नहीं है। सैकड़ों किसान पैदल चलकर हुबली जा रहे हैं, जहां केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी का आवास है। आंदोलन अब तीसरे दिन में है और थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।
किसानों की मांग सीधी है। वे गन्ने का एफआरपी ₹5,500 प्रति टन चाहते हैं। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹60 प्रति किलो तय करने की मांग है। साथ में इथेनॉल की खरीद और उसके दाम में संशोधन भी मांगा गया है। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक ये फैसले नहीं होते, वे घर नहीं लौटेंगे।
30 घंटे का जाम, फिर पदयात्रा
आंदोलन की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई। बेलगावी जिले में पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे (एनएच-48) पर किसानों ने हट्टर्गी टोल प्लाजा, हिरेबगेवाड़ी और निप्पानी के कोग्नोली चेकपोस्ट पर जाम लगाया। धारवाड़ में हुबली-बेलगावी हाईवे पर यरिकोप्पा और तेगूर क्रॉस के पास घंटों तक जाम रहा। किसान सड़क पर ही सोए। सड़क किनारे चूल्हा जलाकर खाना बनाया गया।
14 अक्टूबर की शाम को किसानों ने जाम खुद हटाया। उनका कहना था कि आम जनता को परेशान नहीं करना है। लेकिन आंदोलन बंद नहीं किया। उसी शाम हट्टर्गी टोल प्लाजा से पदयात्रा शुरू हो गई। अगले दिन शाम तक किसान सुवर्ण विधान सौध पहुंच गए। अब उनका काफिला हुबली की ओर बढ़ रहा है। कर्नाटक राज्य रैयत संघ के नेता चुनप्पा पुजेरी का कहना है कि जब तक केंद्र चीनी का एमएसपी ₹60 और गन्ने का एफआरपी ₹5,500 प्रति टन घोषित नहीं करता, आंदोलन जारी रहेगा।
केंद्र ने समिति बनाई, किसान संतुष्ट नहीं
12 अक्टूबर को किसान प्रतिनिधियों से बैठक के बाद केंद्र सरकार ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। यह समिति एफआरपी, चीनी के एमएसपी, शुगर रिकवरी, तौल, यंत्रीकृत कटाई और किसानों पर आर्थिक असर जैसे मुद्दों पर सुझाव देगी।
किसानों ने समिति का स्वागत तो किया, पर इसे आंदोलन खत्म करने की वजह नहीं माना। उनका तर्क है कि समिति की रिपोर्ट का इंतजार करना पेराई सीजन का वक्त बर्बाद करेगा। इसलिए दबाव बनाए रखना जरूरी है।
कलबुर्गी: जिलाधिकारी ने मिलों को दिया एक हफ्ता
आंदोलन के बीच कलबुर्गी में प्रशासन भी सक्रिय हुआ। जिलाधिकारी इकराम शरीफ ने जिले की पांच चीनी मिलों के प्रतिनिधियों और किसान नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने मिलों को निर्देश दिया कि 2026-27 के पेराई सीजन से पहले एक हफ्ते के भीतर किसानों से भाव पर सहमति बनाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि चीनी और इथेनॉल के दाम बढ़े हैं, मिलें मुनाफा कमा रही हैं, तो इसका फायदा किसानों तक भी पहुंचना चाहिए।
बैठक में अलग-अलग मिलों के अलग भाव, कटाई कार्यक्रम में भेदभाव, तौल में गड़बड़ी और भुगतान में देरी पर नाराजगी जताई गई। जिलाधिकारी ने बकाया भुगतान जल्द करने, कटाई कार्यक्रम, वजन, भुगतान और बकाए की जानकारी किसानों को एसएमएस से देने, और तौल की शिकायतों पर लीगल मेट्रोलॉजी विभाग से औचक निरीक्षण कराने के आदेश दिए।
कर्नाटक प्रांता रैयत संघ (केपीआरएस) ने कलबुर्गी में ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मांग की कि भाव तय होने तक चीनी मिलों को गन्ना पेराई की इजाजत न दी जाए। संगठन के जिला अध्यक्ष शरणबसप्पा मामशेट्टी ने कहा कि किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप उचित मूल्य मिले और चीनी मिलें गन्ने के उप-उत्पादों के मुनाफे का 50 प्रतिशत हिस्सा किसानों को दें। तौल और रिकवरी में गड़बड़ी रोकने और कटाई-ढुलाई का खर्च घटाने की मांग भी रखी गई।
सिक्कों में जमा ₹1,770 और ₹25,000 प्रति एकड़ की मांग
इस आंदोलन की एक तस्वीर बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क से भी आई। 12 अक्टूबर को वहां प्रदर्शन कर रहे किसानों ने ₹1 और ₹5 के सिक्के जमा किए। कुल ₹1,770 इकट्ठा हुआ। किसान नेता कुरबुर शांतकुमार ने कहा कि यह राशि बैंक ड्राफ्ट के जरिए सरकार को वापस भेजी जाएगी। उनका संदेश था कि किसानों को खैरात नहीं, न्याय चाहिए।
कर्नाटक के 217 तालुक भीषण सूखे की चपेट में हैं। करीब 20 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है और नुकसान ₹20,000 करोड़ से ज्यादा आंका गया है। किसानों ने सूखा प्रभावित हर किसान को ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजा और कृषि ऋण माफी की मांग रखी है। इसी प्रदर्शन में गन्ने का एफआरपी ₹4,500 प्रति टन करने की अलग मांग भी उठी।
यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
कर्नाटक की यह लड़ाई उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भी संदेश है। यूपी में 2026-27 सीजन का नया गन्ना मूल्य (एसएपी) अभी घोषित नहीं हुआ है। 2025-26 सीजन में एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था। हर सीजन की शुरुआत में यही सवाल उठता है कि लागत बढ़ी तो भाव क्यों नहीं बढ़ा।
कर्नाटक में किसान भाव तय हुए बिना मिलें चलाने नहीं दे रहे। यूपी में भी पेराई सीजन नजदीक है। भाव की इस लड़ाई में यही सबसे बड़ा सबक है।
मुख्य बातें
- गन्ने का एफआरपी ₹5,500 प्रति टन और चीनी का एमएसपी ₹60 प्रति किलो: कर्नाटक के किसान इन मांगों पर अड़े हैं
- 30 घंटे के हाईवे जाम के बाद पदयात्रा केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के हुबली आवास की ओर बढ़ रही है
- कलबुर्गी के जिलाधिकारी ने 5 चीनी मिलों को 2026-27 पेराई से पहले एक हफ्ते में भाव पर सहमति बनाने का निर्देश दिया
स्रोत: The Hindu (13-15 अक्टूबर 2026), The New Indian Express (13-15 अक्टूबर 2026), Deccan Herald (13-16 अक्टूबर 2026), ChiniMandi (15-16 अक्टूबर 2026)
