गन्ना भाव

गन्ना भाव ₹5,500/टन की मांग: मंत्री के घर घेराव, जानिए UP किसानों पर इसका असर

✍️ Aamir Raza · 🗓 29 Sep 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ना भाव ₹5,500/टन की मांग: मंत्री के घर घेराव, जानिए UP किसानों पर इसका असर

आपने एक एकड़ में गन्ना बोया है, खाद-बीज-पानी का खर्च आसमान छू रहा है, और आपको भाव मिल रहा है ₹400 प्रति क्विंटल। वहीं देश के दूसरे कोने का किसान ₹550 प्रति क्विंटल की मांग लेकर केंद्रीय मंत्री के दरवाजे पहुंच गया है। यही खबर आज कर्नाटक से आई है, और यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं होगा।

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ने का भाव ₹5,500 प्रति टन तय करने की मांग रखी है। क्विंटल में बदलें तो यह बनता है ₹550 प्रति क्विंटल, यानी यूपी के मौजूदा SAP से पूरे ₹150 प्रति क्विंटल ज्यादा।

हुब्बल्ली में आज: मंत्री के दरवाजे पर किसान

कर्नाटक राज्य रैत संघ और हसीरु सेने के बैनर तले राज्य के अलग-अलग जिलों से किसान आज हुब्बल्ली पहुंचे, जहां केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव किया गया। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक किसानों की मांग साफ है। गन्ने का वैज्ञानिक तरीके से तय किया गया उचित भाव मिले और चीनी मिलों द्वारा किसानों के कथित शोषण पर रोक लगे।

संगठन के जिला अध्यक्ष संगमेश सागर का आरोप है कि मिलें दशकों से गन्ना किसानों का शोषण कर रही हैं और करीब 30 साल से उचित भाव नहीं मिल रहा। प्रदेश उपाध्यक्ष शंतगौड़ा पाटिल नडहल्ली ने ₹5,500 प्रति टन के साथ तीन और ठोस मांगें रखीं। मिलों में डिजिटल तौल मशीनें लगें ताकि तौल में पारदर्शिता रहे, भुगतान सीधे बैंक खातों में जाए, और पैदावार तय करते समय किसान प्रतिनिधि अधिकारियों के साथ मौजूद रहें।

डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक कर्नाटक में करीब 7.5 लाख हेक्टेयर में गन्ना बोया जाता है और 89 मिलें सालाना करीब 576 लाख टन गन्ना पेरती हैं। खास बात यह है कि वहां सरकार अपना SAP घोषित नहीं करती, जबकि यूपी में SAP की व्यवस्था है।

मंत्री का जवाब: सड़क पर नहीं, दिल्ली आइए

जोशी ने आज ही एक वीडियो संदेश में किसानों से अपील की कि वे सड़कों पर उतरने के बजाय दिल्ली आकर चर्चा करें। सीएनबीसी टीवी-18 पर प्रकाशित पीटीआई की खबर के मुताबिक मंत्री ने कहा कि केंद्र उनकी शिकायतें सुनने को तैयार है। जोशी का दावा है कि किसान नेता फरवरी 2026 में उनसे मिले थे और FRP बढ़ाने की मांग रखी थी, जिसके बाद केंद्र ने मई में FRP में ₹365 की बढ़ोतरी की।

यानी सरकार का पक्ष यह है कि FRP हर साल बढ़ रहा है, जबकि किसानों का कहना है कि बढ़ोतरी लागत के मुकाबले न के बराबर है।

10 अक्टूबर की चेतावनी और FRP का हिसाब

इस बीच कर्नाटक शुगरकेन ग्रोअर्स एसोसिएशन ने केंद्र को 10 अक्टूबर 2026 की डेडलाइन दी है। द हिंदू के मुताबिक संगठन के अध्यक्ष कुरुबूर शांतकुमार ने मैसूरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि अगर 10 अक्टूबर तक FRP नहीं बढ़ाया गया तो पूरे राज्य में आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। संगठन का प्रतिनिधिमंडल 3 सितंबर को नई दिल्ली में मंत्री जोशी से मिलकर ज्ञापन भी सौंप चुका है।

एसोसिएशन की मांग रिकवरी के हिसाब से बनी है। 10.25% रिकवरी पर ₹4,500 प्रति टन, 11.25% पर ₹4,850, 12.25% पर ₹5,200 और 13.25% पर ₹5,550। तुलना के लिए, 2025-26 सत्र के लिए केंद्र ने 10.25% रिकवरी पर FRP ₹3,550 प्रति टन तय किया था। साथ ही संगठन ने तमिलनाडु की तर्ज पर ₹800 प्रति टन अतिरिक्त SAP की भी मांग रखी है।

चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) को लेकर भी नाराजगी गहरी है। सालार न्यूज के मुताबिक रैत संघ और हसीरु सेने के अध्यक्ष चूणप्पा पुजेरी ने कहा कि चीनी का MSP 2019 से ₹31 प्रति किलो पर अटका है, जबकि खेती की लागत तीन गुना बढ़ चुकी है। उनकी मांग है कि MSP बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो किया जाए। साथ ही एथेनॉल बिक्री की 30% सीमा हटाकर दूसरे राज्यों की तरह 100% करने की मांग है।

पिछले साल का सबक: आंदोलन से मिला ₹3,300, पर भुगतान अटका

यह पहली बार नहीं है। डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक पिछले साल गुरलापुर क्रॉस पर धरने के दबाव में सरकार को ₹3,300 प्रति टन भाव घोषित करना पड़ा था। लेकिन सालार न्यूज के मुताबिक कुछ मिलों ने वही तय भाव भी नहीं चुकाया और बकाया अब भी बाकी है।

राजू शेट्टी ने चेतावनी दी है कि यह आंदोलन राष्ट्रीय होगा और महाराष्ट्र के किसान भी जुड़ेंगे। उनका कहना है कि अगर मिलें साथ नहीं देंगी तो किसान पेराई शुरू नहीं होने देंगे।

यूपी के किसान के लिए असल मतलब क्या है

कर्नाटक की लड़ाई से यूपी के किसान को क्या लेना-देना? सीधा जवाब यह है कि गन्ना भाव राष्ट्रीय राजनीति का विषय है। अगर कर्नाटक का दबाव चीनी का MSP बढ़वाता है तो मिलों की आय बढ़ेगी, और फिर किसानों को ज्यादा भाव देने की गुंजाइश भी बनेगी। यही कड़ी यूपी के SAP से जुड़ती है।

यूपी में हापुड़ समेत कई जिलों के किसान पहले से ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। कर्नाटक की ₹550 वाली मांग इसे हवा देती है। फर्क बस इतना है कि कर्नाटक में लड़ाई FRP पर है क्योंकि वहां SAP घोषित ही नहीं होता, जबकि यूपी में SAP की व्यवस्था है।

एक और काम की बात। यूपी में ढुलाई कटौती का नियम साफ है। दैनिक जागरण के मुताबिक बाहरी क्रय केंद्रों से मिल गेट तक कटौती 60 पैसे प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर, अधिकतम ₹12 प्रति क्विंटल तय है। अगर मिल इससे ज्यादा काट रही है तो उपायुक्त से शिकायत का हक है।

मुख्य बातें

  • कर्नाटक के किसानों ने 2026-27 के लिए ₹5,500 प्रति टन (₹550/क्विंटल) गन्ना भाव की मांग रखी है और 29 सितंबर को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के हुब्बल्ली आवास का घेराव किया।
  • कर्नाटक शुगरकेन ग्रोअर्स एसोसिएशन ने 10 अक्टूबर 2026 तक FRP न बढ़ने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है; 3 सितंबर को दिल्ली में ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
  • यूपी के किसानों के लिए मतलब साफ है: राष्ट्रीय स्तर पर भाव का दबाव FRP और SAP दोनों को प्रभावित करता है, और ढुलाई कटौती (अधिकतम ₹12/क्विंटल) से ज्यादा कटौती पर शिकायत का हक है।

स्रोत: न्यू इंडियन एक्सप्रेस, डेक्कन हेराल्ड, द हिंदू, सालार न्यूज, चिनीमंडी, सीएनबीसी टीवी-18 (पीटीआई), दैनिक जागरण

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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