चीनी MSP से तय होगा गन्ना दाम: 2 दिन में फैसला, किसान बोले गोदाम पर ताला

बेलगावी में सोमवार की रात सर्किट हाउस में बातचीत आधी रात के बाद तक चली, और उसी के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक फॉर्मूला सामने रखा। इसके मुताबिक चीनी मिलें किसानों को गन्ने का दाम उसी हिसाब से देंगी, जो केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) तय करेगी। मिल मालिकों ने इस फॉर्मूले पर सहमति जता दी है। किसान नेताओं ने अपने बीच चर्चा के लिए 2 दिन का समय मांगा है। यानी आज, 29 अक्टूबर को जब केंद्र की समिति कर्नाटक पहुंच रही है, उसी के आसपास किसानों का जवाब भी आना है।
यह खबर उत्तर प्रदेश के किसान के लिए भी सीधी जुड़ी हुई है। चीनी का MSP बढ़ता है तो मिलों की कमाई बढ़ती है, और उसी से गन्ने का दाम देने की उनकी क्षमता तय होती है। कर्नाटक में जो फैसला होगा, उसकी गूंज दिल्ली तक जाएगी, और दिल्ली का फैसला यूपी की मिलों पर भी लागू होगा।
आधी रात को बना फॉर्मूला
सोमवार को सुवर्ण विधान सौध में सुबह से बातचीत शुरू हुई। मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों से अलग-अलग बैठकें हुईं। कुल 5 दौर की बातचीत करीब 10 घंटे चली, जिसमें 9 मंत्री, करीब 70 विधायक और 79 मिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। रात को सर्किट हाउस में संयुक्त बैठक आधी रात के बाद तक चली, वहीं से फॉर्मूला निकला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों से किसानों की बात हुई है और समर्थन का भरोसा मिला है। किसान को भी जीना है और फैक्ट्री को भी जीना है, दोनों की आजीविका सरकार के लिए अहम है। आंदोलन सकारात्मक नतीजे की ओर बढ़ा है और सरकार प्रोत्साहन देने को तैयार है। किसान नेताओं ने तुरंत हां या ना नहीं कहा, 2 दिन में अपने संगठनों से चर्चा करके फैसला सुनाने की बात कही। यही 2 दिन अब खत्म होने को हैं।
किसान की मांगें क्या हैं
कर्नाटक राज्या रैथा संघ के अध्यक्ष चुनप्पा पुजारी ने मांगें साफ शब्दों में रखीं। गन्ने का कुल दाम 5,500 रुपये प्रति टन हो। इसमें एफआरपी को बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति टन किया जाए। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य मौजूदा 31 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो किया जाए। मिलों में डिजिटल तौल मशीनों के लिए 500 करोड़ रुपये रखे जाएं, ताकि वजन और रिकवरी को लेकर हर सत्र में झगड़ा न हो। और राज्य सरकार अपने हिस्से के 1,000 रुपये प्रति टन प्रोत्साहन की घोषणा करे।
मिल मालिकों का पक्ष अलग है। बिजली सह-उत्पादन का बकाया अटका है, पुराने बिजली खरीद समझौते बोझ बने हैं और मार्जिन इतना कम है कि ज्यादा दाम देना उनके बस में नहीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली बार 50 रुपये प्रति टन के प्रोत्साहन में राज्य का हिस्सा देने पर ही खजाने पर करीब 300 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था।
गोदाम पर ताला लगाने की चेतावनी
बुधवार को आंदोलन ने और तीखा रुख ले लिया। पुजारी ने कहा कि मुदलगी तालुक के गुरलापुर में किसान लगातार चौथे दिन धरने पर हैं, और अब पूरे राज्य में चीनी मिलों के गोदामों पर ताला लगाने का आह्वान किया जा रहा है। उनकी मांग है कि केंद्रीय समिति बेलगावी जिले का दौरा भी करे, ताकि जमीनी हालत खुद देख सके।
उन्होंने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से अपील की है कि मिल प्रबंधनों की बैठक बुलाकर यह भरोसा दिलाया जाए कि चीनी का दाम 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे नहीं जाएगा। गुरलापुर में बुधवार शाम किसानों की बैठक में आंदोलन का अगला कदम तय होना था। पुजारी ने कहा कि रात में गोदामों से चीनी निकालने की कोशिश हुई तो उसके नतीजों की जिम्मेदारी मिलों की होगी।
आज केंद्रीय समिति के सामने क्या रखा जाएगा
केंद्र की समिति के अध्यक्ष पूर्व नीति आयोग सदस्य प्रो. रमेश चंद हैं। यह समिति 29 और 30 अक्टूबर को कर्नाटक में रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह खुद समिति के सामने किसानों की मांगें रखेंगे और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से भी बात होगी। महाराष्ट्र और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों से सलाह लेने की बात भी कही गई है।
यूपी के किसान के लिए इसका मतलब क्या है
उत्तर प्रदेश में 2026-27 सत्र के लिए केंद्र ने गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर लागू है। लेकिन यूपी में 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। कर्नाटक में MSP और प्रोत्साहन पर जो भी फैसला होगा, वह दिल्ली की नीति को प्रभावित करेगा, और उसी नीति से यूपी का SAP भी जुड़ा रहेगा।
इस बीच यूपी में पेराई शुरू हो रही है। इंडियन शुगर एसोसिएशन के मुताबिक 26 अक्टूबर तक देश की 107 मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी, जिनमें यूपी की 2 मिलें थीं। पश्चिमी यूपी की मिलों में अगले कुछ दिन में पेराई शुरू होने की उम्मीद है। राज्य की 122 मिलों में पेराई शुरू होते ही किसान की चिंता पर्ची, तौल और भुगतान पर आ टिकेगी।
कर्नाटक की घटना से यूपी के किसान के लिए एक सबक भी है। दाम की लड़ाई में देर होती है तो नुकसान खेत में खड़े गन्ने को होता है, क्योंकि गन्ना सूखता है और वजन घटता है। इसलिए फॉर्मूले पर किसानों का जवाब, समिति की सिफारिश और चीनी MSP पर केंद्र का फैसला, इन तीनों पर यूपी के किसान की नजर रहनी चाहिए।
मुख्य बातें
- बेलगावी में आधी रात तक चली बैठक में फॉर्मूला बना: चीनी MSP तय होने के बाद उसी हिसाब से मिलें गन्ने का दाम तय करेंगी, मिल मालिकों ने सहमति जताई है।
- किसान नेता 5,500 रुपये प्रति टन दाम पर अड़े हैं, और उन्होंने 2 दिन में जवाब देने की बात कही है; साथ ही गोदामों पर ताला लगाने की चेतावनी भी दी है।
- केंद्र की रमेश चंद समिति 29-30 अक्टूबर को कर्नाटक में है; यूपी में 2026-27 SAP की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए इस फैसले पर यूपी के किसानों की भी नजर है।
स्रोत: डेक्कन हेराल्ड (26-28 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (27 अक्टूबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (मई 2026)
