इथेनॉल टेंडर से गन्ना बाहर, चीनी ₹31 पर अटकी: कर्नाटक CM की 5 मांगों की चिट्ठी, UP पर असर

सात साल से एक ही जगह अटकी चीनी की कीमत और बढ़ते गन्ने के दाम के बीच की खाई अब कर्नाटक के किसानों के सब्र का बांध तोड़ चुकी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर गन्ना किसानों की पांच बड़ी मांगों पर केंद्र से तुरंत फैसला करने की अपील की है। चिट्ठी कर्नाटक के लिए है, लेकिन इसकी दो मांगें सीधे उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान से जुड़ी हैं, खासकर 16 अक्टूबर का इथेनॉल टेंडर, जो UP की चीनी मिलों की कमाई और किसानों के भुगतान, दोनों को छूता है।
सबसे पहले समझिए: 16 अक्टूबर का टेंडर क्या कहता है
इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए 16 अक्टूबर को जारी टेंडर में गन्ने के रस, चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल को बाहर रखा गया है, सिर्फ सी-हेवी शीरे वाला मान्य होगा। शिवकुमार का कहना है कि कर्नाटक की गन्ना आधारित इथेनॉल क्षमता सालाना 225 करोड़ लीटर है, और यह फैसला मिलों की आमदनी घटाएगा, जिसका सीधा असर किसानों के समय पर भुगतान पर पड़ेगा।
UP के किसान के लिए इसका मतलब साफ है। यह टेंडर पूरे देश की मिलों के लिए है, सिर्फ कर्नाटक के लिए नहीं। पश्चिमी UP की मिलें भी गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से इथेनॉल बनाकर अच्छी कमाई करती रही हैं। यह रास्ता बंद रहा तो मिलों की जेब हल्की होगी, और जेब हल्की होने पर सबसे पहले भुगतान की रफ्तार धीमी पड़ती है।
चिट्ठी की पांचों मांगें, एक नजर में
शिवकुमार ने PM से जिन पांच मुद्दों पर फैसला मांगा है, वे हैं: चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) बढ़ाना, जो 12 फरवरी 2019 से ₹31 प्रति किलो पर जमा है; घरेलू और व्यावसायिक चीनी के लिए अलग-अलग MSP तय करना; ऊपर बताए गए इथेनॉल टेंडर पर पुनर्विचार; गन्ना आधारित इथेनॉल का दाम बढ़ाना, जो 2022-23 से नहीं बदला; और FRP की बेस रिकवरी 10.25% से घटाकर फिर से 9.50% करना।
₹31 वाली चीनी, ₹3,650 वाला गन्ना
इस चिट्ठी का सबसे तीखा आंकड़ा चीनी और गन्ने के भाव का फासला है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक चीनी का MSP 12 फरवरी 2019 से ₹31 प्रति किलो पर स्थिर है, जबकि इसी दौरान गन्ने का FRP ₹2,750 से बढ़कर ₹3,650 प्रति टन तक पहुंच चुका है। CM का तर्क सीधा है, 2019 के भाव पर चीनी बेचकर मिल गन्ने का वाजिब दाम कैसे दे। घरेलू और व्यावसायिक चीनी के लिए अलग-अलग MSP की मांग भी इसी से जुड़ी है, ताकि रसोई की चीनी सस्ती रहे और थोक खरीदार वाजिब दाम दें।
बेस रिकवरी 10.25%: UP के किसान को क्या समझना चाहिए
FRP की बेस रिकवरी का मतलब है, गन्ने से कितनी चीनी निकलने पर किसान को पूरा FRP मिलेगा। पहले यह सीमा 9.50% थी, जिसे चरणों में बढ़ाकर 10.25% कर दिया गया। अब रिकवरी इससे कम आने पर किसान का FRP काट लिया जाता है। शिवकुमार का कहना है कि रिकवरी मिट्टी, मौसम और पेराई के समय पर निर्भर करती है, जो किसान के हाथ में नहीं। UP के तराई और पूर्वी इलाकों में भी रिकवरी कम रहती है, और वहां के किसान FRP कटौती की शिकायत करते रहे हैं। अगर केंद्र बेस रिकवरी घटाकर 9.50% करता है तो इसका फायदा UP के कम रिकवरी वाले क्षेत्रों के किसानों को भी मिलेगा।
कर्नाटक सरकार ने खुद क्या कदम उठाए
चिट्ठी में CM ने यह भी गिनाया है कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर क्या किया। 2025-26 में मिलों के तय भाव के ऊपर ₹100 प्रति टन अतिरिक्त दिया गया, जिसमें से ₹50 प्रति टन राज्य ने अपने खजाने से दिया, और करीब ₹290 करोड़ सीधे किसानों तक पहुंचाए गए। राज्य की 81 चालू मिलों में डिजिटल लोड सेल लगाए गए हैं, और चीनी रिकवरी 2022-23 के 9.91% से बढ़कर 11.09% हो गई है।
17 अक्टूबर को शिवकुमार खुद बेलगावी के कित्तूर में प्रदर्शनकारी किसानों से मिले थे और आंदोलन वापस लेने की अपील की थी, लेकिन किसानों का कहना था कि उनकी मांगें सिर्फ केंद्र ही पूरी कर सकता है। उत्तर कर्नाटक में पदयात्राओं और सड़क जाम से पेराई सत्र की शुरुआत में देरी हो रही है, और खेतों में पका गन्ना खड़ा है। हर बीतते दिन के साथ गन्ने का वजन और चीनी की मात्रा घटती है।
आगे क्या होगा
शिवकुमार ने लिखा है कि चीनी क्षेत्र के मुद्दों पर केंद्र की एक कमेटी पहले से विचार कर रही है, लेकिन पेराई सत्र में हो रही देरी को देखते हुए इन मांगों पर जल्द फैसला जरूरी है। UP के किसानों को इस पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इथेनॉल टेंडर और FRP बेस रिकवरी पर केंद्र का जो भी फैसला होगा, वह पूरे देश पर लागू होगा।
मुख्य बातें
- कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने PM मोदी को चिट्ठी लिखकर गन्ना किसानों की 5 मांगों पर तुरंत फैसला मांगा है।
- 16 अक्टूबर के इथेनॉल टेंडर में गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे के इथेनॉल को बाहर रखा गया है, जिससे UP समेत देश की मिलों की कमाई और किसानों के भुगतान पर असर पड़ सकता है।
- चीनी का MSP फरवरी 2019 से ₹31/किलो पर अटका है, जबकि FRP ₹3,650/टन तक पहुंच चुका है; बेस रिकवरी 10.25% से घटाकर 9.50% करने की मांग UP के कम रिकवरी वाले इलाकों के लिए भी राहत ला सकती है।
स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स (20 अक्टूबर 2026), द न्यू इंडियन एक्सप्रेस (20 अक्टूबर 2026), भास्कर लाइव।
