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बेलगावी बैठक बेनतीजा: ₹5500 की मांग अटकी, 29 अक्टूबर को दिल्ली की समिति तय करेगी रास्ता

✍️ Aamir Raza · 🗓 27 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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बेलगावी बैठक बेनतीजा: ₹5500 की मांग अटकी, 29 अक्टूबर को दिल्ली की समिति तय करेगी रास्ता

बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में सोमवार को दिनभर चली बैठक का नतीजा वही निकला, जिससे किसान नेता सबसे ज्यादा नाराज थे। कोई फैसला नहीं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पहले चीनी मिल मालिकों से बात की, फिर किसान प्रतिनिधियों से मिले। दोनों बैठकों के बाद भी गन्ने के दाम पर कोई घोषणा नहीं हुई। अब सबकी नजर 29 अक्टूबर पर है, जब केंद्र की समिति कर्नाटक पहुंचेगी।

किसान नेताओं की मांग साफ है। गन्ने का कुल दाम ₹5500 प्रति टन हो। इसमें केंद्र के एफआरपी के ऊपर राज्य की ओर से ₹1000 प्रति टन का एसएपी भी शामिल है। राज्या रैथा संघ के अध्यक्ष चुनप्पा पुजारी ने बैठक में यह भी कहा कि एफआरपी को बढ़ाकर ₹4500 प्रति टन किया जाए और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो किया जाए। मिलों में डिजिटल तौल के लिए ₹500 करोड़ की मांग भी उठी, ताकि वजन और रिकवरी को लेकर हर बार विवाद न हो।

मुख्यमंत्री ने समय क्यों मांगा

शिवकुमार ने किसानों से धैर्य रखने को कहा। उनका तर्क था कि राज्य भीषण सूखे से गुजर रहा है। तुंगभद्रा और कावेरी जैसी नदियों के बेसिन में बारिश कम हुई है। भूजल स्तर में करीब 38 प्रतिशत की गिरावट बताई गई। बिजली सब्सिडी पर सरकार हर साल करीब ₹22,000 करोड़ खर्च कर रही है। कृषि पंपसेट की बिजली के लिए हेसकॉम ने ₹9,000 से ₹12,000 करोड़ की अतिरिक्त मांग रखी है। मुख्यमंत्री का कहना था कि इतने दबाव के बीच एकतरफा फैसला करना सही नहीं होगा।

पिछले साल का हिसाब भी बैठक में उठा। मुख्यमंत्री ने बताया कि ₹250 प्रति टन के अतिरिक्त भुगतान में सरकार ने अपना ₹50 प्रति टन वाला हिस्सा दे दिया था, लेकिन मिलों का हिस्सा किसानों तक नहीं पहुंचा। किसान नेताओं ने इसे ही अपनी नाराजगी की वजह बताया। उनका कहना था कि घोषणा के बाद भी पैसा पूरा नहीं मिला, तो इस बार सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा।

बैठक में कई किसान नेता एक साथ बोलने लगे, इसलिए कुछ देर तक बातचीत रुक भी गई। नेताओं की मांग थी कि फैसला उसी बैठक में घोषित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह झूठा वादा करके नहीं जाना चाहते। केंद्रीय समिति के सामने राज्य अपना पक्ष रखेगा, उसके बाद ही फैसला होगा।

29 अक्टूबर को क्या होगा

केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की समस्याओं पर विचार के लिए एक समिति बनाई है, जिसके अध्यक्ष पूर्व नीति आयोग सदस्य प्रो. रमेश चंद हैं। यह समिति 29 अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह खुद समिति के सामने किसानों की मांगें रखेंगे और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से भी बात होगी। महाराष्ट्र और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों से भी सलाह लेने की बात कही गई है, क्योंकि गन्ने का दाम अब सिर्फ एक राज्य का मुद्दा नहीं रहा।

कर्नाटक के किसानों का तर्क है कि जब तक चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य नहीं बढ़ेगा, मिलें ज्यादा दाम देने में असमर्थता जताती रहेंगी। मिल मालिकों का पक्ष दूसरा है। उनका कहना है कि बिजली सह-उत्पादन का बकाया, पुराने बिजली खरीद समझौते और कम मार्जिन उनकी मजबूरी है। इसी खींचतान में हर बार फैसला अटक जाता है। इस बार केंद्रीय समिति से उम्मीद इसलिए ज्यादा है, क्योंकि उसी की रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई टिकी है।

यूपी के किसान के लिए इसका मतलब क्या है

उत्तर प्रदेश के किसान इस खबर को दूर की खबर समझकर छोड़ दें, तो गलती होगी। कर्नाटक में जो बहस चल रही है, वह दरअसल पूरे देश के गन्ना भाव की बहस है। एफआरपी, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य, तौल में पारदर्शिता और रिकवरी की जांच, ये चारों मुद्दे यूपी में भी उतने ही अहम हैं। केंद्र ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर ₹3650 प्रति टन के बराबर है। यूपी में 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए कर्नाटक के फैसले और केंद्रीय समिति की रिपोर्ट पर यूपी के किसानों की भी नजर रहनी चाहिए।

यूपी में 122 मिलों का पेराई सत्र चल रहा है। इस समय किसान की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि पर्ची समय पर मिले, तौल सही हो और भुगतान में देर न हो। कर्नाटक की घटना एक सबक भी देती है। दाम की लड़ाई में देर होने पर नुकसान किसान को ही उठाना पड़ता है, क्योंकि खेत में खड़ा गन्ना सूखता है और वजन घटता है। इसलिए 29 अक्टूबर की बैठक के बाद जो भी फैसला आए, उसकी खबर पर नजर रखना यूपी के किसान के लिए भी जरूरी है।

अगले दो दिन में तीन बातें साफ होंगी। पहला, केंद्रीय समिति कर्नाटक में किससे मिलती है और क्या सिफारिश करती है। दूसरा, महाराष्ट्र और तेलंगाना से सलाह के बाद कोई साझा रुख बनता है या नहीं। तीसरा, किसान संगठन 29 अक्टूबर के बाद आंदोलन जारी रखते हैं या समिति की रिपोर्ट का इंतजार करते हैं। इन तीनों का असर सिर्फ कर्नाटक तक नहीं रहेगा।

मुख्य बातें

  • बेलगावी में 26 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बैठक बिना फैसले के खत्म हुई।
  • किसान ₹5500 प्रति टन दाम मांग रहे हैं, जिसमें एफआरपी के ऊपर ₹1000 प्रति टन एसएपी भी शामिल है।
  • केंद्र की रमेश चंद समिति 29 अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचेगी, उसके बाद ही फैसले की उम्मीद है।

स्रोत: द हिंदू (26 अक्टूबर 2026), डेक्कन हेराल्ड (26-27 अक्टूबर 2026), द न्यू इंडियन एक्सप्रेस (26 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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