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कर्नाटक बंद वापस: 2 दिन में तय होगा गन्ने का दाम, UP किसानों पर भी पड़ेगा असर

✍️ Aamir Raza · 🗓 28 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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कर्नाटक बंद वापस: 2 दिन में तय होगा गन्ने का दाम, UP किसानों पर भी पड़ेगा असर

कर्नाटक के गन्ना किसानों ने बंद का ऐलान वापस ले लिया है। बेलगावी में सोमवार सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक आधी रात तक चली, और उसी के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि मामला सुलह की ओर बढ़ गया है। किसान और मिल मालिक अब दो दिन के भीतर गन्ने के अंतिम दाम की घोषणा करेंगे। यूपी के किसानों के लिए भी यह खबर अहम है, क्योंकि अंतिम दाम केंद्र की चीनी MSP से जुड़ेगा।

सोमवार दोपहर तक तस्वीर कुछ और थी। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट में कहा गया था कि मुख्यमंत्री की दो बैठकों से मनचाहा नतीजा नहीं निकला है, किसान मांग पर अड़े थे और मिल मालिक प्रोत्साहन पर कुछ कहने को तैयार नहीं थे। मगर रात होते होते बात बन गई, और मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान के हवाले से पीटीआई ने खबर दी कि समझ बन गई है और बंद का ऐलान वापस ले लिया गया है।

आधी रात तक चली बैठक में क्या तय हुआ

बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध और सर्किट हाउस में करीब 10 घंटे तक पांच दौर की बातचीत हुई। इसमें 9 मंत्री, करीब 70 विधायक और सांसद, और वित्त विभाग के बड़े अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिल मालिक इस बात पर राजी हो गए हैं कि केंद्र की चीनी MSP तय होने के बाद उसी के आधार पर किसानों को दिया जाने वाला दाम तय किया जाएगा। किसानों ने अपने बीच चर्चा के लिए दो दिन मांगे हैं, फिर बेलगावी या बेंगलुरु में दोबारा बैठकर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

किसान, मिल मालिक और सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि किसान और मिलें, दोनों का बचना जरूरी है, और सरकार किसानों के हित में उनके साथ खड़ी रहेगी। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से भी किसानों की बात हुई है, और मुख्यमंत्री के मुताबिक जोशी ने चीनी MSP बढ़ाने का भरोसा दिया है।

किसान क्या मांग रहे थे

किसान प्रतिनिधियों की मांगें सोमवार की बैठक में खुलकर सामने आईं। डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक किसान गन्ने का दाम 5,500 रुपये प्रति टन चाहते थे। उनकी मांग थी कि गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति टन किया जाए, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो की जाए, और राज्य सरकार अपने हिस्से के 1,000 रुपये प्रति टन प्रोत्साहन की घोषणा करे। साथ ही मिलों में डिजिटल तौल कांटे लगाने के लिए 500 करोड़ रुपये रखे जाने की मांग भी उठी।

मुख्यमंत्री ने परेशानी की जड़ भी बताई। उनका कहना था कि केंद्र ने पिछले 10 साल से चीनी की MSP नहीं बढ़ाई है, इसलिए किसानों की दिक्कतें बढ़ी हैं। यहां एक बात साफ रखनी चाहिए। अंतिम दाम अभी घोषित नहीं हुआ है। जो हुआ है, वह दाम तय करने का रास्ता और दो दिन की समयसीमा है, न कि दाम की घोषणा।

यूपी के किसान के लिए इसका मतलब क्या है

कर्नाटक का फैसला यूपी का दाम तय नहीं करेगा। यूपी में गन्ने का दाम राज्य सरकार के SAP से तय होता है। मगर केंद्र की चीनी MSP और केंद्रीय समिति की रिपोर्ट से बने माहौल का असर पूरे देश के गन्ना बाजार पर पड़ेगा। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं और पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो रहा है, इसलिए दाम से जुड़ा फैसला सीधे पर्ची और भुगतान से जुड़ जाता है।

यूपी में भी दाम को लेकर चर्चा चल रही है। चीनीमंडी की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक 7 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना आयुक्त कार्यालय की बैठक में 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का दाम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग पर चर्चा हुई थी। यानी यूपी का किसान भी उसी इंतजार में है, जिसमें कर्नाटक का किसान था। फर्क सिर्फ इतना है कि कर्नाटक में अब दो दिन की समयसीमा मिल गई है।

यूपी के किसान के लिए काम की सलाह यही है कि वह अपनी पर्ची और सट्टे से जुड़े कागज संभालकर रखे, और अपनी मिल या समिति से दाम की पक्की सूचना मिलने तक किसी अफवाह पर गन्ना रोकने या बेचने का फैसला न करे। सुबह बेनतीजा दिखने वाली बैठक रात तक समझौते में बदल सकती है, इसलिए एक खबर से नतीजा निकालना जल्दबाजी होगी।

आगे क्या देखना है

अगले दो दिन में तीन चीजों पर नजर रहेगी। पहली, बेलगावी या बेंगलुरु में किसान और मिल मालिकों की दोबारा बैठक और अंतिम दाम की घोषणा। दूसरी, 29 अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचने वाली केंद्रीय समिति। तीसरी, त्रिपक्षीय समझौते का लिखित रूप, जिससे MSP के बाद दाम तय करने का फॉर्मूला साफ होगा। इनका असर सिर्फ कर्नाटक तक नहीं रहेगा, क्योंकि चीनी की MSP देश की मिलों की भुगतान क्षमता से जुड़ी है।

कर्नाटक के किसानों ने बंद वापस लेकर बातचीत को एक और मौका दिया है। अब सबकी नजर केंद्र की MSP और दो दिन में होने वाली घोषणा पर है। यूपी का किसान इस घटनाक्रम से सबक ले सकता है, मगर अपना फैसला सिर्फ अपनी मिल और समिति की पक्की सूचना पर ही करे।

मुख्य बातें

  • बेलगावी में 10 घंटे की बैठक के बाद कर्नाटक के किसानों ने बंद वापस लिया, अंतिम दाम दो दिन में घोषित होगा।
  • दाम केंद्र की चीनी MSP के आधार पर तय होगा, और किसान, मिल व सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा।
  • 29 अक्टूबर को केंद्रीय समिति कर्नाटक पहुंचेगी, जबकि यूपी में 2026-27 के दाम पर चर्चा जारी है।

स्रोत: द प्रिंट (पीटीआई) 27 अक्टूबर 2026, डेक्कन हेराल्ड 27 अक्टूबर 2026, चीनीमंडी 9 अक्टूबर 2026

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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