₹5,000 नहीं तो मिलें बंद: कराड धरना, 20 अक्टूबर का प्रदर्शन — यूपी किसान क्या करें?

पांच चीनी मिलों के कांटे रुक चुके हैं, एक मिल के गेट पर धरना लगा है और पुलिस की मध्यस्थता भी बेनतीजा रही। महाराष्ट्र में गन्ना भाव को लेकर छिड़ी लड़ाई अब खाली धमकी के दौर से आगे निकल चुकी है, और यूपी के किसान इसे तमाशबीन बनकर नहीं देख सकते — क्योंकि उनकी अपनी 122 चीनी मिलों में पेराई बस कुछ दिनों में शुरू होने वाली है।
सातारा के कराड में कृष्णा सहकारी चीनी मिल के बाहर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जुटे। संगठन के अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने खुद मोर्चा संभाला। किसान तक (16 अक्टूबर 2026) के मुताबिक, मिल परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा और पुलिस की मध्यस्थता से हुई बातचीत भी बेनतीजा रही। इसके बाद शेट्टी ने साफ कह दिया — मांगें पूरी होने तक मिलों को सुचारु रूप से चलने नहीं दिया जाएगा।
कांटा बंद: मिलों के वज़न रुकने से प्रबंधन दबाव में
कराड का धरना अचानक नहीं हुआ। एक दिन पहले ही शेट्टी ने सांगली और सातारा जिलों की पांच बड़ी मिलों के कांटों पर आंदोलन चला दिया था — कृष्णा (कराड), क्रांति (कुंदल), सोनहिरा (वांगी), हुतात्मा (वालवा) और विश्वास (चिखली)। चिनीमंडी (अक्टूबर 2026) की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद संबंधित मिलों ने परिचालन रोकने का फैसला किया।
कांटा बंद का मतलब सीधा है — गन्ने की तौल ही नहीं होगी, तो पेराई रुकेगी। किसान नेताओं का गणित है कि मिल तभी दबाव में आएगी, जब चीनी उसकी गोदाम में फंसेगी और बाजार से उसका संपर्क टूटेगा। शेट्टी ने तो यहां तक कहा कि जो मिल चलाने की कोशिश करेगा, उससे होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी उसी की होगी।
₹5,000 प्रति टन: तीन मांगों का हिसाब किताब
मांगें तीन हैं। गन्ने का भाव 5,000 रुपये प्रति टन — यानी 500 रुपये प्रति क्विंटल, जिसमें 450 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी और सत्र के अंत में 50 रुपये बोनस शामिल है। रूरल वॉयस (अक्टूबर 2026) के अनुसार शेट्टी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यही मांग रखी है।
दूसरी मांग चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 50 रुपये प्रति किलो और तीसरी सी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल का भाव 70 रुपये प्रति लीटर। पुणेकर न्यूज (14 अक्टूबर 2026) के अनुसार ये तीनों मांगें संगठन के 25वें गन्ना सम्मेलन में तय हुई थीं।
तुलना के लिए केंद्र ने 2026-27 का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है — 10.25 प्रतिशत बेस रिकवरी पर। यानी संगठन की मांग सरकार के भाव से करीब 37 प्रतिशत ज्यादा है।
जल्दी पेराई ही असली टकराव की जड़
भाव के बाद सबसे बड़ी लड़ाई समय पर है। केंद्र ने मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी है ताकि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़े। शेट्टी का कहना है पेराई 15 नवंबर के बाद ही होनी चाहिए।
तर्क यह है कि इस वक्त गन्ना पूरी तरह पका नहीं है — रिकवरी 8 प्रतिशत के आसपास है, जबकि उम्मीद 12-13 प्रतिशत की है। किसान तक के अनुसार, शेट्टी का दावा है कि समय से पहले कटाई-पेराई से प्रति एकड़ लगभग 20 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने 40 टन प्रति एकड़ उत्पादन मानते हुए 500 रुपये प्रति टन अनुदान मांगा है, ताकि यही 20 हजार रुपये प्रति एकड़ किसान को मुआवजे के रूप में मिले।
वहीं मिल संचालकों का कहना है कि अल नीनो के असर से गन्ना सूखने लगा है — फसल बर्बाद हुई तो गन्ना चारे के काम का भी नहीं रहेगा।
दिल्ली की बातचीत से हुब्बली के मैदान तक
इस आंदोलन की टाइमलाइन यूपी के किसान नोट कर लें, क्योंकि आगे का कार्यक्रम तय है। 12 अक्टूबर को दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान से करीब तीन घंटे की बैठक हुई, पर ठोस फैसला नहीं निकला। सरकार ने एक हफ्ते में समिति बनाने का भरोसा दिया, किसान नेता ठोस घोषणा चाहते थे।
13 अक्टूबर को पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर कोगनोली टोल प्लाजा पर चक्का जाम, 15 अक्टूबर को पांच मिलों पर कटका-बंद, 16-17 अक्टूबर को कराड में धरना। रूरल वॉयस के अनुसार 20 अक्टूबर को कर्नाटक के हुब्बली में बड़ा प्रदर्शन होगा — रणनीति साफ है, मांगें पूरी होने तक पेराई नहीं चलने दी जाएगी।
यूपी के किसान: पेराई से पहले ये तीन बातें
महाराष्ट्र का आंदोलन यूपी के लिए सिर्फ खबर नहीं, चेतावनी है। यूपी की 122 मिलों में पेराई करीब 20 अक्टूबर से शुरू होने की तैयारी है।
पहली बात — 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र (2025-26) का एसएपी 400/390/370 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती/सामान्य/अनुपयुक्त) था। पुराने भाव को इस सत्र का भाव न समझें; घोषणा का इंतजार करें।
दूसरी बात — एफआरपी 10.25 प्रतिशत बेस रिकवरी से जुड़ा है। रिकवरी जितनी कम, हाथ में आने वाला भाव उतना कम। इस सत्र में पर्ची कैलेंडर और तौल की निगरानी पहले से ज्यादा जरूरी है।
तीसरी बात — जब मिलें जल्दी पेराई की दौड़ में हों, तो कांटे पर भीड़ और जल्दबाजी दोनों बढ़ती है। तौल के समय मौजूद रहें, पर्ची का हिसाब लिखित में रखें। टोल-फ्री गन्ना हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
मुख्य बातें
- कराड की कृष्णा मिल के बाहर राजू शेट्टी का धरना, पुलिस की मध्यस्थता बेनतीजा; पांच मिलों पर कटका-बंद के बाद परिचालन रुका।
- मांगें: गन्ना ₹5,000 प्रति टन (एफआरपी ₹450 + ₹50 बोनस), चीनी एमएसपी ₹50 किलो, एथेनॉल ₹70 लीटर।
- 20 अक्टूबर को हुब्बली में बड़ा प्रदर्शन; यूपी में पेराई से पहले एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है।
स्रोत: किसान तक (16 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस (अक्टूबर 2026), पुणेकर न्यूज (14 अक्टूबर 2026), गाँव जंक्शन, चिनीमंडी।
