2027–28 में कप्तानगंज चीनी मिल की वापसी: ₹25–30 करोड़ में नई जान, किसानों को क्या मिलेगा

कुशीनगर के कप्तानगंज कस्बे में बंद पड़ी चीनी मिल के परिसर में बृहस्पतिवार को अधिकारियों का जमावड़ा लगा। करीब चार साल से जंग खा रही मशीनों का एक-एक कर निरीक्षण हुआ। मिल प्रबंधन की ओर से कहा गया है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो पेराई सत्र 2027-28 से यह मिल दोबारा गन्ना पेरना शुरू कर देगी। मशीनरी की मरम्मत और जरूरी बदलावों पर शुरुआती अनुमान के हिसाब से ₹25 से 30 करोड़ रुपये की पूंजी लगेगी।
यह खबर पूर्वी उत्तर प्रदेश के उन गन्ना किसानों के लिए बड़ी है जो तीन-चार साल से अपनी उपज दूर की मिलों में पहुंचाने को मजबूर हैं। बंद मिल का दोबारा चलना सिर्फ एक औद्योगिक इकाई का फिर से शुरू होना नहीं है, इससे इलाके की पूरी अर्थव्यवस्था में जान आएगी।
निरीक्षण में कौन-कौन आया, क्या तय हुआ
बृहस्पतिवार को मिल के उपाध्यक्ष एसके श्रीवास्तव ने मिल परिसर का दौरा किया। उनके साथ उपमहाप्रबंधक प्रशासन विनोद कुमार श्रीवास्तव, तकनीकी उप महाप्रबंधक शिव गोविंद श्रीवास्तव और शिशुपाल शृंखला सहित तकनीकी टीम के अधिकारी मौजूद रहे। टीम ने लंबे समय से बंद पड़ी मशीनों की मौजूदा हालत देखी और खराब हो चुकी इकाइयों की पहचान की।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, एसके श्रीवास्तव 1992 से इस मिल में अलग-अलग पदों पर काम करते आए हैं। उनका कहना है कि पहले चरण में पुरानी मशीनरी की मरम्मत और बदले जाने वाले उपकरणों का खर्च आंकलित किया जा रहा है। यह रकम मिल प्रबंधन विभिन्न स्रोतों से जुटाएगा। उनकी साफ घोषणा है कि हर हाल में पेराई सत्र 2027-28 से मिल चलाने की कोशिश होगी।
₹25-30 करोड़ की रकम कहां खर्च होगी
चार साल बंद रहने की सबसे बड़ी मार मशीनों पर पड़ी है। बॉयलर, टरबाइन, क्रशर और तौल कांटे जैसे उपकरण लंबे समय तक बिना चले जंग खा चुके हैं। कुछ उपकरणों की मरम्मत से काम चलेगा, तो कुछ को पूरी तरह बदलना होगा। इसी मरम्मत और नवीनीकरण पर करीब ₹25 से 30 करोड़ के खर्च का प्रारंभिक आंकलन तैयार हो रहा है।
अमर उजाला के मुताबिक, रकम की व्यवस्था की जा रही है और मरम्मत का काम जल्द शुरू कराने की तैयारी है। साथ ही प्रबंधन किसानों को गन्ने का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा। यानी प्रबंधन की नजर सिर्फ मिल चलाने पर नहीं, इलाके में गन्ने की पैदावार बढ़ाने पर भी है।
मिल बंद क्यों हुई थी
कप्तानगंज की यह चीनी मिल कनोडिया समूह की है। पेराई सत्र 2021-22 में फरवरी महीने में यहां की पेराई पूरी हुई थी। इसके बाद आर्थिक संकट के चलते अगले सत्र में मिल का संचालन शुरू नहीं हो सका। तब से मिल बंद पड़ी है।
बंदी के बाद किसानों के बकाये को लेकर बड़ा विवाद भी हुआ। चीनीमंडी की रिपोर्ट के मुताबिक, पेराई सत्र 2021-22 का करीब ₹44 करोड़ का बकाया ब्याज समेत बढ़कर ₹77 करोड़ तक पहुंच गया था। वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी होने के बाद मिल प्रबंधन ने यह रकम चुका दी। बकाये के चलते जुलाई 2023 में तहसील प्रशासन ने मिल को सील भी किया था और नीलामी की प्रक्रिया तक शुरू हो गई थी।
जिला प्रशासन भी पहले इस मिल को चलवाना अपनी प्राथमिकता बता चुका है। किसान दिवस की बैठक में तत्कालीन डीएम ने आश्वासन दिया था कि इसे दोबारा चलाने का प्रयास प्रशासन की प्राथमिकता है।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
सबसे सीधा फायदा यह है कि कप्तानगंज के आसपास के गांवों के किसानों को गन्ना बेचने के लिए दूर की मिलों का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। नजदीकी मिल खुलने से भाड़ा बचेगा, पर्ची मिलने में आसानी होगी और तौल के बाद भुगतान की रफ्तार भी बेहतर होने की उम्मीद है।
दूसरा फायदा रोजगार का है। मिल चलने पर सैकड़ों मजदूरों और कारीगरों को काम मिलेगा। हिंदुस्तान की रिपोर्ट में कहा गया है कि मिल बंद होने से किसानों के साथ-साथ मजदूरों और कस्बे के व्यापारियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा था। डिस्टिलरी बंद होने के बाद चीनी मिल भी ठप हो जाने से कप्तानगंज की औद्योगिक कस्बे के रूप में पहचान प्रभावित हुई थी, और मिल के दोबारा चलने से कस्बे के बाजार में रौनक लौटने की उम्मीद है।
उपाध्यक्ष एसके श्रीवास्तव ने कहा है कि कनोडिया समूह की यह सबसे पुरानी इकाइयों में से एक है और समूह की इससे विशेष निष्ठा जुड़ी है। इसीलिए मिल को दोबारा चलाने की कोशिश हर हाल में की जा रही है। किसानों के लिए यह बयान एक उम्मीद जगाता है, लेकिन असली कसौटी काम शुरू होने और 2027-28 में पहिया घूमने पर होगी।
क्या नजर रखनी चाहिए
अभी यह योजना की घोषणा है। किसान के तौर पर दो बातों पर नजर रखें। पहला, मशीनरी की मरम्मत का काम कब शुरू होता है। दूसरा, पेराई सत्र 2027-28 से पहले गन्ना सर्वे और सट्टा प्रक्रिया शुरू होती है या नहीं। इलाके के किसान अपने गन्ना समिति और विभागीय अधिकारियों से मिल की तैयारियों की जानकारी समय-समय पर लेते रहें।
मुख्य बातें
- कप्तानगंज चीनी मिल के उपाध्यक्ष एसके श्रीवास्तव ने टीम के साथ मशीनरी का निरीक्षण किया, पेराई सत्र 2027-28 से मिल दोबारा चलाने का लक्ष्य है।
- मरम्मत और नवीनीकरण पर करीब ₹25-30 करोड़ के खर्च का अनुमान है, रकम की व्यवस्था मिल प्रबंधन कर रहा है।
- मिल 2021-22 के पेराई सत्र के बाद से बंद है, नजदीकी मिल खुलने से किसानों का भाड़ा बचेगा और इलाके में रोजगार बढ़ेगा।
स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (कुशीनगर, 2 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (कुशीनगर, 2 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी
