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सिर्फ 3 लाख टन आई आयातित चीनी, तो 31 दिसंबर तक बढ़ी खिड़की: गन्ना किसानों के भुगतान पर असर?

✍️ Aamir Raza · 🗓 23 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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सिर्फ 3 लाख टन आई आयातित चीनी, तो 31 दिसंबर तक बढ़ी खिड़की: गन्ना किसानों के भुगतान पर असर?

“सरकार बाहर से चीनी मंगा रही है, क्या इससे गन्ने का भाव घट जाएगा?” यह सवाल इन दिनों पश्चिमी यूपी के मिल इलाकों में खेत-खलिहान पर सुनाई देने लगा है। वजह है केन्द्र सरकार का ताजा फैसला: विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की खिड़की अब 31 दिसंबर 2026 तक खोल दी है। पहले यह समय सीमा 31 अक्टूबर 2026 को खत्म होने वाली थी।

असल कहानी समय सीमा बढ़ाने से बड़ी है। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक सिर्फ करीब 3 लाख टन ही जहाज से आ पाई है। यानी कोटे का 70 फीसदी हिस्सा अब भी खाली पड़ा है। इसी वजह से खिड़की दो महीने आगे बढ़ाई गई है।

आयात क्यों अटका: 3 लाख टन ही क्यों आई

इकोनॉमिक टाइम्स की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आयात सुस्त रहने की बड़ी वजह यह रही कि घरेलू भाव पर लगाम कसने के लिए सरकार ने जो कदम उठाए, उनसे आयातकों का मुनाफा घट गया। सीधी भाषा में कहें तो बाहर से चीनी लाने का हिसाब ही बैठ नहीं रहा था। इसलिए जितना आयात होना था, वह हुआ नहीं।

अब सरकार ने आयातकों को अतिरिक्त दो महीने दिए हैं, ताकि वे बचा हुआ कोटा पूरा कर सकें। डीजीएफटी ने 19 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना संख्या 45/2026-27 के जरिए यह बदलाव किया है। यह आयात आईटीसी (एचएस) कोड 170114 वाली कच्ची चीनी पर टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था के तहत होगा। अहम बात यह है कि कोटा 10 लाख टन ही रहेगा, बढ़ाया नहीं गया है।

ध्यान रहे, ड्यूटी-फ्री आयात की यह अनुमति अगस्त महीने में मिली थी। डीजीएफटी ने 20 अगस्त 2026 को अधिसूचना संख्या 31/2025-26 जारी कर कच्ची चीनी के आयात की खिड़की खोली थी। ताजा अधिसूचना उसी खिड़की को दिसंबर तक बढ़ाने भर की है, शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

अगस्त में चीनी के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर थे

इस पूरी नीति की जड़ अगस्त महीने में है, जब घरेलू चीनी के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, उत्पादन में गिरावट और उपलब्ध स्टॉक के निर्यात के चलते भाव बढ़े थे। इसी दबाव में सरकार को ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देनी पड़ी थी।

रूरल वॉयस की रिपोर्ट बताती है कि घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और भाव के दबाव को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया। करीब एक दशक में चीनी का यह पहला बड़ा आयात अभियान है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार चीनी की उपलब्धता को लेकर कितनी गंभीर है।

अल नीनो का डर: नया पेराई सत्र अभी बाकी

उद्योग की नजर सिर्फ मौजूदा स्टॉक पर नहीं है। इकोनॉमिक टाइम्स ने उद्योग सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 2026-27 चीनी सीजन (अक्टूबर से सितंबर) में उत्पादन पिछले साल से कम रहने की आशंका है, क्योंकि अल नीनो के असर से महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बारिश कम हुई है।

यही वजह है कि सरकार आपूर्ति को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग बढ़ती है, और नए पेराई सत्र की शुरुआत अभी हुई ही है। दिसंबर तक आयात की खिड़की खुली रखने से सरकार के पास एक सुरक्षा कवच बना रहेगा।

किसान के लिए सीधा सवाल: भाव गिरेंगे या भुगतान अटकेगा

अब असल सवाल पर आते हैं। पहला डर तो यह है कि आयातित चीनी आने से बाजार में चीनी सस्ती हो जाएगी और इसका असर गन्ने के भाव पर पड़ेगा। यहां एक बात साफ रखनी चाहिए: यह नीति चीनी के भाव को गिराने के लिए नहीं, बल्कि बढ़ने से रोकने के लिए है। सरकार का लक्ष्य त्योहारों में भाव उछलने से रोकना है।

दूसरा सवाल बकाया भुगतान का है। चीनी के भाव पर अंकुश की हर नीति मिलों की आमदनी पर दबाव डालती है। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं, और नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है। अगर मिलों की कमाई घटी तो गन्ने के बकाया भुगतान की रफ्तार धीमी पड़ने का खतरा बना रहता है। यही वह बिंदु है जहां आयात की नीति किसान की जेब तक पहुंचती है।

अच्छी बात यह भी है कि आपूर्ति पर्याप्त रहने से सरकार के पास मिलों से किसानों का बकाया समय पर दिलवाने का दबाव बनाने की गुंजाइश बनी रहती है। रूरल वॉयस की रिपोर्ट में एक अलग सार्वजनिक सूचना का भी जिक्र है, जिसमें बेकार पड़े आयात कोटे को सरेंडर करने की समय सीमा 15 नवंबर तक बढ़ा दी गई है। यानी सरकार आयातकों को कोटा इस्तेमाल करने का पूरा मौका देना चाहती है।

टीआरक्यू व्यवस्था को आसान भाषा में समझिए

टैरिफ रेट कोटा एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें तय मात्रा तक का माल रियायती दर पर आयात किया जा सकता है। इस मामले में कच्ची चीनी पर सीमा शुल्क शून्य है, बशर्ते आयात 10 लाख टन के कोटे के भीतर हो। ताजा अधिसूचना से न कोटा बढ़ा है, न शर्तें बदली हैं। सिर्फ समय सीमा दो महीने आगे बढ़ी है।

किसानों को यह भी जानना चाहिए कि कच्ची चीनी घरेलू रिफाइनरियों का कच्चा माल है। यह सीधे बाजार में बिकने वाली सफेद चीनी नहीं है। इसका भाव पर असर अप्रत्यक्ष होता है, तत्काल नहीं।

मुख्य बातें

  • डीजीएफटी ने 19 अक्टूबर की अधिसूचना से 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की समय सीमा 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 की; कोटा और शर्तें अपरिवर्तित।
  • कोटे में से अब तक सिर्फ करीब 3 लाख टन आयात हुआ है, क्योंकि भाव-नियंत्रण के उपायों से आयातकों का मुनाफा घट गया था।
  • अल नीनो के चलते 2026-27 सीजन में उत्पादन घटने की आशंका के बीच सरकार आपूर्ति का सुरक्षा कवच बनाए रखना चाहती है; नीति भाव बढ़ने से रोकने की है, घटाने की नहीं।

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स (22 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस (21 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (21 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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